5. आपका मददगार आप स्वयं हैं

5. आपका मददगार आप स्वयं हैं


आपका मददगार आप स्वयं हैं⇒

             आप सोचते हैं, कोई दृश्य-अदृश्य मददगार आवे जो आपको संकट से मुक्त करे। आप मददगार दूर कहां ढूंढते हैं? मददगार तो आपके पास है। आप ही अपने मददगार हैं। आपकी जीवटता, साहस, धैर्य और किसी भी पहलू को विधेयक रूप में देखने- विचारने की प्रवृत्ति ही आपका सच्चा मददगार है।

          निराशा के स्थान पर आशा, भय के स्थान में निर्भयता, हतोत्साह के स्थान पर उमंग और विश्वास, अकर्मण्यता के स्थान पर कर्मठता, भूत-भविष्य के व्यर्थ की चिंताओं में सिर खपाने के स्थान पर वर्तमान को सुनहला बनाने के संकल्प को अपनाइए। यह आपके जीवन को आनंद और सफलताओं से साराबोर कर देगा। विधेयक विचारों के अंतर्गत पुनः रामबाण चार सूत्र दिए जाते हैं, जिसे अपनाने पर निश्चय ही आप आशातीत शांति पाएंगे-

आपका मददगार आप स्वयं हैं

1. चिंताजन्य परिस्थिति का ईमानदारीपूर्वक विश्लेषण कीजिए और पता लगाइए कि यदि आप असफल हुए तो कौन-सा अनिष्ट घटित हो सकता है।

2. संभावित अनिष्ट को निर्भयतापूर्वक स्वीकार कर लीजिए। अपनी परिस्थति को यथावत स्वीकार कर लेने की हिम्मत रखना किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम प विजय पाने का पहला चमत्कारिक कदम है।

3. तदुपरांत शांतिपूर्वक विचार करें कि स्वीकृत अनिष्ट से उबरने के कौन-कौन से उपाय हो सकते हैं। गहन चिंतन-मनन से जो उपाय आपको दिखते हैं, उन्हें किसी पन्ने पर नोट करें।

4. उन लिखे उपायों में से मंथन करके सर्वश्रेष्ठ उपाय को ढूंढ निकालिए और अपने समस्त सामर्थ्य के साथ; आत्मविश्वास, उत्साह, कर्मठता के साथ उसमें जुट जाइए। मन में संकल्प लाइए कि जो होगा उसे सहर्ष झेल लेंगे, पर बिना युद्ध किए (अनिष्ट, असफलता पर विजय प्राप्त करने का प्रयत्न किए बिना) हार नहीं मानेंगे।

            उपरोक्त सूत्रों को अपनाते के साथ आप तत्काल शांति, उत्साह और जोश का अनुभव करेंगे। किसी अनिष्ट की आशंका से कांपते रहने की अपेक्षा डटकर उसका सामना करना श्रेष्ठ है।

स्रोत: चिंता क्यों

4. जो बांटोगे वही पाओगे

4. जो बांटोगे वही पाओगे


जो बांटोगे वही पाओगे

जो बांटोगे वही पाओगे

             जो पाना चाहते हैं, उसे बांटना शुरू कर दें। एक दोहा है-

सब सन्तन के एक मत, बात कही है दोय।

सुख देवे सुख होत है, दुख देवे दुख होय।।

              अर्थात् दूसरों को सुख देने पर स्वयं सुख मिलता है और दूसरों को दुख देने पर दुख। अतएव सुख चाहते हैं तो सुख बांटना शुरू कर दें, दुखियों की मदद करें, गिरते को सहारा दें। धन चाहते हैं तो इसे मिथ्या भोग-विलास से बचाकर धर्मार्थ, लोकहितार्थ उत्सर्ग करना सीखें। मान चाहते हैं तो मान देना सीखें। आपत्ति-विपत्ति में दूसरों की मदद चाहते हैं तो आपत्ति-विपत्ति में पड़े लोगों की यथाशक्ति मदद करना सीखे। विवेक-बुद्धि का विकास चाहते हैं तो प्राप्त बुद्धि से लोगों को ज्ञान और सहारा देना सीखें। क्षमा चाहते हों तो क्षमा करना सीखें। नित्य जीवन की इच्छा है तो प्राप्त जीवन को सद्प्रयोजनों में सन्नद्ध करना सीखें।

             अधिकारों को गौण एवं कर्तव्यों को प्रधान जाने। माता-पिता, परिवार, बच्चे, समाज, राष्ट्र, स्वधर्म के प्रति निर्धारित अपने कर्तव्यों को स्वार्थ तले कुचल न डालें। अपने कर्तव्यों-दायित्वों को सभी के प्रति ठीक-ठीक निर्वहण करें।

             विवेक को विकसित करें। अमूल्य मानव तन का उद्देश्य परिवार बढ़ाने, भोग भोगने और शरीर पोषण तक सीमित नहीं है। ऐसा तो सभी पशु-पक्षी, कीट-पतंगे भी करते हैं। यदि इतना ही कर्तव्य होता तो भगवान मानव को पशुओं से विलक्षण विवेक बुद्धि, अगणित प्रतिभासम्पन्न एवं सत्यासत्य निर्णय की क्षमता से युक्त क्यों बनाते?

              इस विलक्षण बुद्धि और प्रतिभा का दुरुपयोग पशुवत् जीवन जीकर न करें। आप स्वतंत्र हैं कि प्राप्त जीवन सम्पदा का दुरुपयोग कर नर से नरपशु बन जाएं या इसका सदुपयोग कर नर से नारायण; जीवत्व से शिवत्व की ओर अग्रसर हों या जीवत्व से शवत्व की ओर।

               याद रखें-जो चिंतन और चरित्र मानवीय गरिमा के अनुरूप हो और नर से नारायण बनने के क्रम में प्रेरित करता हो, वही धर्मसम्मत एवं सुखदायी है तथा जो नर से नारायण की दिशा में न ले जाकर नर से नरपिशाच, नरपशु बनाता हो, वह अधर्म और दुखदायी है, चाहे शास्त्रसम्मत ही क्यों न दिखता हो।

             अतएव विवेक बुद्धि के द्वारा मानव से महामानव तथा नर से नारायण बनने के क्रम में ही अपने चिंतन और आचरण का विकास करें। रात्रिशयन के पूर्व एक बार मनोविश्लेषण अवश्य कर लें कि आज आपके चिंतन और चरित्र से किसका पोषण हुआ असुरत्व-पशुत्व का या देवत्व-मनुजत्व का। चुन-चुन कर अपने दुर्गुणों-दुष्प्रवृत्तियों का मूलोच्छेद करें औ संपूर्ण सद्गुणों को अपने में अभिवर्धन।

स्रोत : चिंता क्यों करें 

General Geography Capsule 4

General Geography Capsule 4

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 4

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1.  क्षुद्र ग्रह स्थित है-

उत्तर- मंगल और वृहस्पति ग्रह के बीच

2. सूर्य के उतरायन और दक्षिणायन की सीमा को कहते है-

उत्तर- संक्राति (कर्क और मकर संक्रांति)

3. भारत वर्ष की जल क्षेत्र सीमा (प्रादेशिक) फैली हुई है-

उत्तर-  12 नॉटिकल मील तक

4. 1 नॉटिकल मील (समुद्री मील) बराबर होता है-

उत्तर-  1.852 किमी.

5. किसी स्थान पर दो ज्वारों के बीच का अंतराल होता है-

उत्तर-  12घंटा 26 मिनट

6. ज्वार के कितने समय बाद भाटा आता है-

उत्तर-  6घंटा 13 मिनट

7. ज्वार-भाटा उत्पन्न होने का कारण है-

उत्तर- सूर्य एवं चन्द्रमा का गुरुत्वाकर्षण शक्ति

8. सीस्मोग्राफ (भूकंपमापी) की खोज किसने किया था-

उत्तर- जॉन मिल ने

9. पृथ्वी पर जल भाग है-

उत्तर- 71 %

10. महासागरों की औसत गहराई है-

उत्तर- 4000 मी०

11. समुद्री तल की औसत लवणता होती है-

उत्तर- 35 ‰ (प्रति हजार ग्राम)

12. सर्वाधिक लवणता पायी जाती है-

उत्तर- तुर्की के वॉन झील में (330‰)

13. पृथ्वी पर जलमंडल का स्वच्छ जल क्षेत्र है-

उत्तर- 2.7 भाग

14. समुद्री लवणता में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है-

उत्तर- सोडियम क्लोराइड

15. लवणता के संघटकों में सबसे ज्यादा मिलने वाला तत्व है-

उत्तर- क्लोरीन

16. पृथ्वी के चारों ओर का गैसीय आवरण कहलाता है-

उत्तर- वायुमंडल

17. वायु हैं-

उत्तर- गैसों का मिश्रण

18.  वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में पाई जाने वाली गैस है-

उत्तर- नाइट्रोजन (78.03%)

19. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा होती है-

उत्तर- 0.03%

20. वायुमंडल में सर्वाधिक मात्रा में विद्यमान अक्रिय गैस है-

उत्तर- आर्गन (0.93)

21. वायुमंडल में जलवाष्प की मात्रा होती है-

उत्तर- 5%

22. पृथ्वी पर पहुँचने वाली सौर विकिरण की मात्रा है-

उत्तर- 51%

23. वायुमंडल की सबसे निचली परत है-

उत्तर- क्षोभमण्डल

24. वायुमंडल की सबसे बाहरी परत है-

उत्तर- बहिर्मंडल

25. मौसम परिवर्तन से संबंधित सभी घटनाएँ घटित होती है-

उत्तर- क्षोभमण्डल

26. क्षोभमंडल की ऊंचाई (मोटाई) में वृद्धि होती है-

उत्तर- ग्रीष्म ऋतु में

27. क्षोभ मंडल में उपर जाने पर प्रति 165 मी. की ऊँचाई पर ताप घटता है-

उत्तर- 1ºC

28. क्षोभ मंडल में प्रति 1 किमी. की ऊँचाई पर जाने पर ताप घटता है-

उत्तर- 6.5ºC

29. क्षोभमंडल का विस्तार ध्रुवों तथा विषुवत रेखा पर होती है-

उत्तर- क्रमशः 8 किमी. तथा 18 किमी.

30. सूर्य से आने वाली पराबैंगनी किरणों से रक्षा करती है-

उत्तर- ओजोन परत

31. पृथ्वी का ‘रक्षा कवच’ कहा जाता है-

उत्तर- ओजोन परत को

32. ओजोन परत को नष्ट करने वाली गैस है-

उत्तर- क्लोरो-फ्लोरोकार्बन

33. वातावरण तथा जीवमंडल के बीच का संबंध कहलाता है-

उत्तर- पारिस्थितिकी (Ecosystem)

34. जेट विमान तथा हवाई जहाज उड़ते है-

उत्तर- समताप मण्डल में

35. रेडियो तथा संचार उपग्रह किस मण्डल से संचारित होते हैं-

उत्तर- आयन मण्डल

36. उल्का से संबंधित अधिकांश घटनाएँ होती है-

उत्तर- मध्यमण्डल में

37. अंतरिक्ष यात्री तथा उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते है-

उत्तर- बहिर्मंडल में

38. बहिर्मंडल की प्रधान गैसें है-

उत्तर- हीलियम और हाइड्रोजन

39. पृथ्वी के ताप को बनाये रखता है-

उत्तर- जलवाष्प तथा CO2

40. वायु में जल की उपस्थिति कहलाती है-

उत्तर- आर्द्रता

41. वायुमंडल की आर्द्रता की माप की जाती है-

उत्तर- हइग्रोमीटर

42. ग्रीन हाउस गैसें है-

उत्तर-  CO2 तथा क्लोरोफ्लोरोकार्बन 

43. सागर तल से समान वायुदाब वाले क्षेत्रों को मिलाने वाली काल्पनिक रेखा कहलाती है-

उत्तर-  समदाब रेखा

44. वायुमंडलीय दाब को मापने वाला यंत्र कहलाता है-

उत्तर-  बैरोमीटर

45. किसी भी देश का मानक समय  का निर्धारण ग्रीनवीच मीन टाइम से कितने गुणक पर किया जाता है-

उत्तर- आधे घंटे के गुणक पर

46. सबसे अधिक समय जोन किस देश में बनाया गया है-

उत्तर- रूस

47. विश्व का सबसे ऊँचा ज्वालामुखी पर्वत है-

उत्तर- कोटापैक्सी (इक्वाडो)

General Geography Capsule 4

कोटापैक्सी

48. अंत: सागरीय भूकम्पों द्वारा उत्पन्न लहरों को जापान में कहा जाता है-

उत्तर- सुनामी

49. विश्व की सबसे लम्बी रिफ्ट घाटी है-

उत्तर- जॉर्डन नदी घटी

50. आगरा का किला तथा दिल्ली का लाल किला किस अवसादी चट्टानों से निर्मित है-

उत्तर- बलुआ पत्थर 

General Geography Capsule 3

General Geography Capsule 3

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 3

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1. सूर्य और पृथ्वी की बीच की दूरी अधिकतम (15.2 करोड़ किमी०) अर्थात अपसौर होती है-

उत्तर- 4 जुलाई को

2. सूर्य और पृथ्वी की बीच की दूरी न्यूनत्तम (14.73 करोड़ किमी०) अर्थात उपसौर होती है-

उत्तर- 3 जनवरी को

3. उपसौरिक एवं अपसौरिक को मिलाने वाली रेखा कहलाती है-

उत्तर- एपसाइड रेखा

4. वर्तमान भूगोल का जनक किसे कहा जाता है-

उत्तर- हम्बोल्ट को

5. व्यवस्थित भूगोल का जनक किसे कहा जाता है-

उत्तर- इरैटोस्थनीज

6. सूर्य प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में समय लगता है-

उत्तर-  लगभग 8 मिनट

7. सौर ज्वाला को उत्तरी ध्रुव पर कहा जाता है-

उत्तर- आरोरा बोरियालिस

8. सौर ज्वाला को दक्षिणी ध्रुव पर कहा जाता है –

उत्तर- आरोरा ऑस्ट्रेलिस

9. पृथ्वी अपने अक्ष पर कितने कोण पर झुकी हुई है-

उत्तर- 23½º

10. ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खीची जाने वाली काल्पनिक रेखा है-

उत्तर- देशांतर रेखा

11. ग्लोब पर पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई काल्पनिक रेखा है-

उत्तर- अक्षांश रेखा

12. दो अक्षांश रेखाओं के मध्य दूरी होती है-

उत्तर- 111 किमी०

13. विषुवत रेखा पर दो देशान्तर रेखाओं के मध्य दूरी होती है-

उत्तर- 111.32 किमी०

14. दो देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी को कहा जाता है-

त्तर- गोरे

15. ग्लोब पर देशान्तर रेखाओं की कुल संख्या होती है-

उत्तर- 360

16. ग्लोब पर अक्षांश रेखाओं की कुल संख्या होती है-

उत्तर- 179 

17. पृथ्वी एक घंटे में घुमती है-

उत्तर- 15देशांतर

18. 23½ उत्तरी अक्षांश  रेखा कहलाता है-

उत्तर- कर्क रेखा

19. 23½ दक्षिणी अक्षांश रेखा कहलाता है-

उत्तर- मकर रेखा

20. 66½ उत्तरी अक्षांश रेखा कहलाता है-

उत्तर- आर्कटिक रेखा

21. 66½ दक्षिणी अक्षांश  रेखा कहलाता है-

उत्तर- अंटार्कटिक रेखा

22. 1° देशान्तर के बीच का अंतर होता है-

उत्तर- 4 मिनट 

23. पृथ्वी को 1° देशान्तर पार करने में समय लगता है-

उत्तर- 4 मिनट

24. कर्क संक्रांति (उत्तरी अयनांत) एवं मकर संक्रांति (दक्षिणी अयनांत) होता है-

उत्तर- क्रमशः 21जून तथा 22 दिसंबर को

25. 0° से 30° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांशों के मध्य का भाग कहलाता है-

उत्तर- उष्णकटिबंधीय क्षेत्र

26. 0° अक्षांश तथा 0º देशान्तर रेखा स्थित है-

उत्तर- अटलांटिक महासागर में

27. 45º से 66½º उत्तरी और दक्षिणी अक्षांशों के मध्य का भाग कहलाता है-

उत्तर- शीतोष्ण कटिबंधीय

28. 0° से 5° उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- डोलड्रम या शांत पेटी

29. 40º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- गरजता चलीसा

30. 50º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- प्रचण्ड पचासा

31. 60º  दक्षिणी अक्षांश (पछुआ पवन) का क्षेत्र कहलाता है-

उत्तर- चीखता साठा

32. जब ‘पृथ्वी’ सूर्य और चन्द्रमा के बीच आ जाती है, तो होता है-

उत्तर- चन्द्रग्रहण

33. जब ‘चन्द्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है, तो होता है-

उत्तर- सूर्यग्रहण

34. पूर्ण सूर्यग्रहण हमेशा होता है-

उत्तर- अमावस्या के दिन

35. पूर्ण चन्द्रग्रहण हमेशा होता है-

उत्तर- पूर्णिया के दिन

36. सम्पूर्ण पृथ्वी पर दिन-रात बराबर होता है-

उत्तर- क्रमशः 21 मार्च तथा 22 दिसंबर को

37. पृथ्वी पर दिन-रात किस गति के कारण होता है-

उत्तर-  घुर्णन गति

38. पृथ्वी के मध्य से होकर जाने वाली अक्षांश रेखा है-

उत्तर- विषुवत या भूमध्यरेखा

39. विषुवत रेखा पर दिन और रात की अवधि होती है-

उत्तर- बराबर

40. वसंत विषुव (Vernal Equinox) तथा शरद विषुव (Autumn Equinox) कहलाता है-

उत्तर- क्रमशः 21 मार्च और 23 दिसंबर

41. 0° देशान्तर को कहा जाता है-

उत्तर- प्रधान देशांतर रेखा या ग्रीनवीच रेखा 

42. 0º देशान्तर रेखा (ग्रीनवीच मीन टाइम) स्थित है-

उत्तर- इंग्लैण्ड में

43. भारत का मानक समय, जो प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) के नैनी से गुजरती है-

उत्तर- 82½º पूर्वी देशांतर रेखा को

44. भारतीय मानक समय तथा ग्रीनवीच समय के मध्य अंतर है-

उत्तर- 5 घंटा 30 मिनट आगे

45. अंतराष्ट्रीय तिथि रेखा माना गया है-

उत्तर- 180º देशांतर रेखा को 

46. 180° देशान्तर को वाशिंगटन सभा में अंतराष्ट्रीय तिथि रेखा माना गया-

उत्तर- 1884 ई० में

47. अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा के समानान्त स्थित है-

उत्तर- बेरिंग जल संधि

General Geography Capsule 3

बेरिंग जल संधि

48. पृथ्वी पर सबसे लम्बा दिन उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण गोलार्द्ध में होता है-

उत्तर- क्रमशः 21 जून तथा 22 दिसंबर 

49. पृथ्वी पर सबसे छोटा दिन उत्तरी गोलार्द्ध तथा दक्षिण गोलार्द्ध में होता है-

उत्तर- क्रमशः 22दिसंबर तथा 21 जून को 

50. विश्व ग्लोब के निर्माता है-

उत्तर- मार्टिन बैहम 

General Geography Capsule 2

General Geography Capsule 2

सामान्य भूगोल


General Geography Capsule 2

एक नजर में इसे जरुर पढ़ें

1.  नील नदी का उद्दगम स्थल है-

उत्तर- विक्टोरिया झील

2. आस्वान बाँध निर्मित है-

उत्तर- नील नदी पर

3. विश्व की सबसे बड़े हीरे की खान है-

उत्तर- किम्बरले खान (अफ्रीका)

4. अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय घास के मैदान को कहा जाता है-

उत्तर- सवाना

5. अफ्रिका के शीतोष्ण कटिबंधीय घास के मैदान को कहा जाता है-

उत्तर- वेल्ड  

6. अटाकामा मरुस्थल स्थित है-

उत्तर- चिली (दक्षिण अमेरिका) में

7.  मकरान किस देश के समुद्रतट का भौगोलिक नाम है-

उत्तर- पाकिस्तान

8. एण्डीज पर्वतमाला (द० अमेरीका) की सबसे ऊँची चोटी है-

उत्तर- एकांकागुआ

9. दक्षिणी अमेरिका का सबसे बड़ा नगर है-

उत्तर- ब्यूनस आयर्स

10. सारगैस सागर अवस्थित है-

उत्तर- उत्तरी अतलांतिक महासागर में

11. अर्द्धमहासागर कहा जाता है-

उत्तर- हिन्द महासागर को

12. टॉरनेडो नामक भयंकर चक्रवात आती है-

उत्तर- USA के मिसीसिपी घाटी में

13. जापान सागर तथा चीन सागर के समीपवर्ती भाग में आने वाला चक्रवात कहलाता है-

उत्तर- टायफून

14. कर्क रेखा, विषुवत रेखा एवं मकर रेखा तीनों किस महादेश से होकर गुजरती है-

उत्तर-  अफ्रीका महादेश से

15. एशिया महाद्वीप को यूरोप महाद्वीप से अलग करता है-

उत्तर- काकेशस पर्वत

16. विश्व की प्रसिद्ध मक्का मंडी है-

उत्तर- सेंट लुईस (USA) में

17. ब्लैक फॉरेस्ट पर्वत (जर्मनी) उदाहरण है-

उत्तर- भ्रंशोत्थ पर्वत का 

18. बोर्निया द्वीप स्थित है-

उत्तर- प्रशांत महासागर में

19. ‘भूमध्य सागर की कुंजी’ कहा जाता है-

उत्तर-  जिब्राल्टर जलसन्धि को

20. भूगोल का पिता कहा जाता है-

उत्तर-  हिकेटियस को

21 एशिया एवं यूरोप के बीच सीमा निर्धारण का कार्य करता है-

उत्तर-  यूराल पर्वत

22. स्ट्राम्बोली ज्वालामुखी स्थित है-

उत्तर- लिपारी द्वीप (इटली) में

23. ‘रोटी की डलिया’ कहलाता है-

उत्तर- युक्रेन (यूरोप)

24. विश्व में गंधक उत्पादन में अग्रणी देश है-

उत्तर- USA

25. मृतसागर अवस्थित है-

उत्तर- जॉर्डन एवं इजरायल के बीच

26. ‘पूर्व का मोती’ कहा जाता है-

उत्तर- श्रीलंका को

27. रूर घाटी स्थित है-

उत्तर- जर्मनी में

28. नई दुनिया के नाम से जाना जाने वाला महाद्वीप है-

उत्तर- उत्तरी अमेरिका

29. मिस्ट्रल स्थानीय पवन है-

उत्तर-  स्पेन एवं फ़्रांस की (ठंडी पवन)

30. मैस्ट्रेल स्थानीय पवन है-

उत्तर- उतरी इटली  की (ठंडी पवन)

31. ‘येलोस्टोन पार्क स्थित है-

उत्तर- USA में

32. विश्व का सबसे व्यस्त नहर है-

उत्तर- कील नहर

33. विश्व की सबसे व्यस्त व्यापारिक नदी है-

उत्तर- राईन नदी

34. विश्व का सर्वाधिक विश्वासघाती नदी है-

उत्तर- हांगहो नदी

35. स्वेज नहर का निर्माण हुआ था-

उत्तर- 1869 ई० में

36. स्वेज नहर का राष्ट्रीयकरण हुआ था-

उत्तर- 1956 ई० में

37. पनामा नहर का निर्माण हुआ था-

उत्तर- 1914 ई० में 

38. कलाहारी मरुस्थल स्थित है-

उत्तर- बोत्सवाना (द०-प० अफ्रीका)

39. बेलग्रेड तथा वियना स्थित है-

उत्तर- डेन्यूब नदी के किनारे

40. रोम किस नदी के किनारे स्थित है-

उत्तर- टाईबर नदी

41. बद्दू जनजाति निवास करती है-

उत्तर- अरब के रेगिस्तान में

42. एशिया की सबसे लम्बी नदी का नाम है-

उत्तर- यांगटीसीक्यांग

43. संसार में सर्वाधिक वर्षा वाला स्थान है-

उत्तर- मसिनराम (मेघालय)

44. एशिया का सबसे बड़ा मरूस्थल है-

त्त– गोबी (मंगोलिया)

General Geography Capsule 2

गोबी मरुस्थल

45. एशिया का सबसे गर्म स्थल है-

उत्तर- जैकोबाबाद (पकिस्तान)

46. लॉस एजिल्स (अमेरिका) प्रसिद्ध है-

त्तर- फिल्म उद्योग के लिए

47. विश्व में सबसे बड़ा मांस निर्यातक देश है-

उत्तर- अर्जेंटीना

48. विश्व में चावल तथा गेहूँ का प्रमुख उत्पादक देश है-

उत्तर- चीन

49. विश्व में लोहा तथा मैंगनीज का प्रमुख उत्पादक देश है-

उत्तर- युक्रेन

50. विश्व में पारा उत्पादक प्रमुख देश है-

उत्तर- स्पेन

 3.आपका कर्तव्य

 3.आपका कर्तव्य


आपका कर्तव्य

आपका कर्तव्य

               नाममात्र का मानव अगर सच में मानव बनना चाहता है तो उसका अनिवार्य कर्तव्य है कि उसके सभी कर्म और विचार आदर्श उज्ज्वल और पावन परिष्कृत हों, जिससे उससे शुभ-मंगल ही निःसृत होकर संसार को प्राप्त हो। संसार पोषित शरीर से लोकमंगल की दिशा में ही चरित्र-चिंतन का विकास हो।
          जिस भारतीय संस्कृति के ‘सर्वे भवन्तु सुखिनः’ और ‘आत्मवत् सर्वभूतेषु’ से सुसंस्कृत हो गया, उस देवसंस्कृति के प्रचार-प्रसार में सभी का योगदान हो। मानवमात्र के त्राता (रक्षा करने वाला) इस अलौकिक, वैज्ञानिक संस्कृति की रक्षा और प्रचार में यदि तन- मन-धन से जुटा जाता है तो निश्चय ही ऋण और बंधन से मुक्त हो मोक्ष और परम शांति की दिशा में अग्रसर हो जाया जाएगा।

          तन-मन-धन से संसार, राष्ट्र और देवसंस्कृति की सेवा करें, मान- बड़प्पन के लिए नहीं, सुख-स्पृहा के लिए नहीं, प्रत्युत परमात्म की प्रसन्नता और कर्तव्यपालन के लिए। निष्कामतापूर्वक किया गया कर्म साधन बन जाता है, जो पापों से बचाता है, पापों को काटता है एवं अंतःकरण की शुद्धिकर साध्य ईश्वर की अनुभूति कराता है। परम सद्गुरु कबीर साहब अपनी एक साखी में कहते हैं-

हाड़ बड़ा सेवा किये, धन बड़ा कछु देय।

अक्ल बड़ी उपकार कर, जीवन का फल येह ।। (कबी साखी दर्पण, भाग-२)

      ‘हाड़ (शरीर) का सदुपयोग दूसरों की सेवा करने में है, धन का सदुपयोग अपनी आवश्यकताओं की न्यूनतम पूर्ति कर अधिक-से-अधिक सद्कार्यों में नियोजित करने में है और बुद्धि का सदुपयोग दूसरों के हित-संपादन में है-इसी में मानव-जीवन की सार्थकता है।’

स्रोत: चिंता क्यों


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1. Mobile ka nasha / मोबाइल का नशा

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सामान्य भूगोल



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एक नजर में इसे जरुर देखें-

1. पृथ्वी के ऊपरी भाग को क्या कहा जाता है-

उत्तर- भू-पर्पटी

2. पृथ्वी की भू-पर्पटी पर सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है-

उत्तर- ऑक्सिजन, सिलिकन तथा एलुमिनियम

3. पृथ्वी की आंतरिक संरचना बनी है-

उत्तर- क्रमशः सियाल, सीमा और निफे से

4. पृथ्वी का ‘सियाल’ बना है-

उत्तर- सिलिकन तथा एलुमिना से 

5. पृथ्वी का ‘सीमा’ बना है-

उत्तर- सिलिकन और मैग्नेशियम से 

6. पृथ्वी का क्रोड (नीफे) बना है-

उत्तर- निकिल तथा लोहा से

7. पृथ्वी का औसत घनत्व है-

उत्तर- 5.5 ग्राम/सेमी०3

8. पृथ्वी के नीचे जाने पर प्रति 32 मीटर की गहराई पर तापक्रम बढ़ता है-

उत्तर- 1०C

9. पृथ्वी की सतह के नीचे का द्रवीभूत शैल कहलाता है-

उत्तर- मैग्मा

10. पृथ्वी के बाह्यभित्ति का उपरिभाग कहलाता है-

उत्तर- ऐस्थेनोस्फीयर

11. पृथ्वी पर सबसे विशाल हिमखण्ड है-

उत्तर- अन्टार्कटिका

12. पृथ्वी पर अधिकत्तम कितनी ऊँचाई है-

उत्तर- 8850 मी० (माउन्ट एवरेस्ट की)

13. पृथ्वी पर अधिकत्तम कितनी गहराई है-

उत्तर- 11776 मी० (मेरियाना गर्त), प्रशांत महासागर 

14. ग्रेनाइट, बैसाल्ट, पेमाइड, डायोराइट, ग्रेबो उदाहरण है-

उत्तर- आग्नेय चट्टान का

15. आग्नेय चट्टान का निर्माण होता है-

उत्तर- मैग्मा व लावा के जमाव से 

16. बैसाल्ट में सर्वाधिक मात्रा में होती है-

उत्तर- लोहा

17. काली मिट्टी का निर्माण होता है-

उत्तर- बैसाल्ट चट्टान से

18. बलुआ पत्थर, चूना पत्थर, स्लेट, कॉग्लोमेरेट उदाहरण है-

उत्तर- अवसादी चट्टान का

19. कायान्तरित चट्टान का निर्माण होता है-

उत्तर- आग्नेय तथा अवसादी चट्टानों से 

20. बैसाल्ट से सिल्ट तथा ग्रेनाइट से नाइस बनता है-

उत्तर- आग्नेय चट्टानों के रूपांतरण से

21. बालू-पत्थर से क्वार्टजाइट, शेल से स्लेट, कोयला से हीरा, चुना पत्थर से संगमरमर बनता है-

उत्तर- परतदार चट्टानों के रूपांतरण से 

22. पृथ्वी पर सबसे अधिक तापमान किस स्थान पर पाया जाता है-

उत्तर- अजीजियाह (लीबिया)

23. पृथ्वी पर सबसे कम तापमान किस स्थान पर पाया जाता है-

उत्तर- बर्खोयान्सक (पूर्वी साइबेरिया)

24. पृथ्वी का ‘शीत ध्रुव’ किस स्थान को कहा जाता है-

उत्तर- बर्खोयान्सक (पूर्वी साइबेरिया) को

25. पवनें हमेशा चलती है-

उत्तर- उच्च दाब से निम्न दाब की ओर

26. ज्वालामुखी के मुख को कहा जाता है-

उत्तर- क्रेटर

27. क्रेटर का आकार बड़ा हो जाने पर उसे कहा जाता है-

उत्तर- काल्डेरा

28. ज्वालामुखी के मुख से निकलने वाला द्रवित पदार्थ कहलाता है-

उत्तर- मैग्मा

29. इटली का एटना तथा स्ट्राम्बोली उदाहरण है-

उत्तर- सक्रीय ज्वालामुखी का

General Geography Capsule1

स्ट्राम्बोली

30. ‘भूमध्यसागर का प्रकाश स्तम्भ’ कहा जाता है-

उत्तर- स्ट्राम्बोली को

31. जापान का फ्यूजीयामा, इटली का विसुवियस उदाहरण है-

उत्तर- सुसुप्त ज्वालामुखी का

32. भारत का एकमात्र सक्रिय ज्वालामुखी है-

उत्तर- बैरन (अंडमान में स्थित)

33. ‘पृथ्वी का सुरक्षा बॉल्व (Safty Valve)’ कहा जाता है-

उत्तर- ज्वालामुखी को

34. सक्रिय ज्वालामुखी अधिकांशतः पाये जाते है-

उत्तर- प्रशांत ,महासागर के तटीय भाग में

35. प्रशांत महासागर के परिमेखला को कहा जाता है-

उत्तर- अग्नि वलय

36. किसी ज्ञात अथवा अज्ञात बल के काण भूपटल में होने वाला कम्पन कहलाता है-

उत्तर- भूकंप

37. पृथ्वी पर भूकंपीय तरंग सबसे पहले जहाँ पहुंचता है या अनुभव किया जाता है-

उत्तर- अधिकेन्द्र पर

38. भूकम्प को मापने वाला यंत्र को कहते है-

उत्तर- सीस्मोग्रफ

39. भूकम्प की तीव्रता मापी जाती है-

उत्तर- रिक्टर स्केल पर

40. भूकम्प का आध्ययन कहलाता है-

उत्तर- सीस्मोलॉजी

41. ‘ग्रैण्ड बैंक’ कहाँ स्थित है-

उत्तर- न्यूफाउण्डलैण्ड के पास

42. वायुमण्डल में जिस ओजोन छिद्र का पता लगाया गया है, वह कहाँ स्थित है-

उत्तर- अण्टार्कटिका के ऊपर

43. अन्तर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन का मुख्यालय स्थित है-

उत्तर- लन्दन में

44. सबनकामा ज्वालामुखी अवस्थित है-

उत्तर- पेरू में

45. भारत किस गोलार्द्ध में स्थित है-

उत्तर- उत्तरी-पूर्वी गोलार्द्ध में

46. अंतर्राष्ट्रीय आलू अनुसंधान संस्थान कहाँ स्थित है-

उत्तर- लीमा (पेरू) में

47. रोटरडम का व्यस्त बन्दरगाह कहाँ अवस्थित है-

उत्तर- नीदरलैण्ड में

48. किलाऊआ ज्वालामुखी (Kilauea Volcano) कहाँ स्थित है-

उत्तर- हवाई के बिग आईलैंड पर (संयुक्त राज्य अमेरिका)

49. केपकेनावेरल, जहाँ से अन्तरिक्ष यान (स्पेश शटल) छोड़े जाते हैं, किस देश के तट पर स्थित है-

उत्तर- फ्लोरिडा (USA)

50. हम्बनटोटा (Hambantota) बंदरगाह स्थित है-

उत्तर- श्रीलंका में


 

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भारत का भूगोल 


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उत्तर- सिक्किम में

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उत्तर- लेह (लद्दाख)

16. भारत में हीरा की खान ‘गोलकुंडा’ कहाँ स्थित है-

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17. भारत का परमाणु रिएक्टर ‘कामिनी’ कहाँ स्थित है-

उत्तर- कलपक्कम (तमिलनाडु) में

18. कैगा नाभिकीय संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- कर्नाटक में

19. कोटा नाभिकीय संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- राजस्थान में

20. तारापुर नाभिकीय संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- महाराष्ट्र में

21. नरौरा नाभिकीय संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- उत्तर प्रदेश में

22. रावत भाटा (चित्तौड़गढ़) संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- राजस्थान में

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रावत भाटा

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23.नेशनल वुड फॉसिल पार्क कहाँ स्थित है-

उत्तर- जैसलमेर (राजस्थान) में

24. संघ शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव भारत के किन राज्यों के बीच स्थित है-

उत्तर- गुजरात व महाराष्ट्र

25. दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव पश्चिमी भारत में स्थित एक केंद्रशासित प्रदेश है जिसकी स्थापना पहले के दादर और नगर हवेली तथा दमन और दीव के विलय द्वारा हुई। यह  कब से अस्तित्व में आया-

उत्तर- 26 जनवरी 2020 से

26. दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव की राजधानी स्थित है-

उत्तर- दमन में

27. विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ की ऊँचाई कितनी है-

उत्तर- 182 मीटर

28. राष्ट्रीय जैव उर्वरक विकास केन्द्र स्थित है-

उत्तर- गाजियाबाद में

29. विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान स्थित है-

उत्तर- अल्मोड़ा (उत्तराखंड) में

30. विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी’ किस देश में स्थित है-

उत्तर- भारत में

31. ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) का मुख्यालय कहाँ स्थित है-

उत्तर- बेंगलुरु (कर्नाटक) में

32. मुप्पान्दल (कन्याकुमारी) संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- तमिलनाडु में

33. कुडनकुलम नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- तमिलनाडु में

34. सतारा पवन ऊर्जा संयंत्र के लिए प्रसिद्ध है-

उत्तर- महाराष्ट्र में

35. भारत में प्रथम न्यूक्लियर ऊर्जा स्टेशन संयंत्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- तारापुर (महाराष्ट्र) में

36. भारत में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध महत्वपूर्ण नाभिकीय ईंधन है-

उत्तर- थोरियम

37. परमाणु विद्युत संयंत्र काकरापारा स्थित हैं-

उत्तर- सूरत (गुजरात) में

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उत्तर- दक्षिणी अण्डमान में

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उत्तर- लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) में

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उत्तर- राजस्थान में

41. गोलकोण्डा किला कहाँ स्थित है-

उत्तर- हैदराबाद (तेलंगाना) में

42. कोशिकीय व आण्विक जीव विज्ञान केन्द्र कहाँ स्थित है-

उत्तर- हैदराबाद (तेलंगाना) में

43. महुआडार अभ्यारण्य अवस्थित है-

उत्तर- झारखण्ड में

44. देश की प्रथम चालक रहित मेट्रो ट्रेन का परिचालन किया गया है-

उत्तर- जनकपुरी पश्चिम को बॉटनिकल गार्डन मेटो स्टेशन, नोएडा

45. ताप विद्युत संयंत्र बदरपुर अवस्थित है-

उत्तर- दिल्ली में

46. ताप विद्युत संयंत्र हरदुआगंज अवस्थित है-

उत्तर- उत्तर प्रदेश में

47. ताप विद्युत संयंत्र उतारन अवस्थित है-

उत्तर- गुजरात में

48. राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान स्थित है-

उत्तर- जयपुर (राजस्थान) में

49.राष्ट्रीय खरपतवार विज्ञान अनुसंधान केंद्र स्थित है-

उत्तर- जबलपुर (मध्य प्रदेश) में

50. केन्द्रीय बागवानी संस्थान स्थित है-

उत्तर- नागालैंड में



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नोट :  मैं आशा करता हूँ कि भारत का भूगोल से सम्बंधित सभी Capsule आपके परीक्षा के लिए नींव का पत्थर साबित होंगे। अगर किसी भी प्रश्न के उत्तर को लेकर आपके मन में कोई संदेह हो तो हमसे Contact With us के माध्यम से, Comment या Email से Contact क सकते है। मैं हमेशा आपके मंगल भविष्य की कामनाता हूँ।

Thank You @ By Dr. Amar Kumar


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10. आचारपरक क्रांति या व्यवहारिकतावाद / Behavioral Revolution

10. आचारपरक क्रांति या व्यवहारिकतावाद




आचारपरक क्रांति या व्यवहारिकतावाद

          द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद अन्तरविषयक अध्ययन का दौर प्रारंभ हुआ। अन्तरविषयक अध्ययन के परिणाम स्वरूप भूगोल में कई क्रांतियों का आगमन हुआ जिनमें मात्रात्मक क्रांति और आचारपरक या व्यावहारात्मक क्रांति प्रमुख था। आचारपरक क्रांति का अभ्युदय मात्रात्मक क्रांति के विरोध में हुआ क्योंकि मात्रात्मक क्रांति ने मानव को पूर्णतः मशीनीकृत बना दिया था। मात्रात्मक क्रांति ने मानवीय चेतना, बौद्धिकता, व्यवहार, सौंदर्य, श्रृंगार रस इत्यादि को कोई महत्व नहीं दिया था।

     अर्थात मात्रात्मक क्रांति ने भूगोल को एक निर्जीव विषय बना दिया था। इस तरह भूगोल में मनोविज्ञान तथ्यों का अध्ययन प्रारंभ किया गया ताकि भूगोल को मानवीय चेतनाओं से मुक्त विषय बनाया जाय।

       भूगोल में मनोविज्ञान के तथ्यों का अध्ययन भौगोलिक संदर्भ में करना ही आचारपरक क्रांति कहलाती है। इस क्रांति का स्रोत विषय मनोविज्ञान और लक्ष्य क्षेत्र मानव भूगोल था। अमेरिकी भूगोलवेता ओलसन ने कहा है कि “आचारपरक क्रांति मानव भूगोल या सामाजिक भूगोल की पूँजी है।” व्यवहारात्मक क्रांति प्रारंभ करने का श्रेय अमेरिका के गेस्टोल्ट समप्रदाय को जाता है। लेकिन भूगोल में आचारपरक क्रांति को मान्यता दिलाने का कार्य डब्लू. किर्क महोदय ने किया।

       आचारपरक क्रांति में इस तथ्य का अध्ययन किया जाता है कि मानव के व्यवहार पर पर्यावरण का प्रभाव और पर्यावरण पर मानव का प्रभाव कैसे पड़ता है? आचारपरक भूगोलवेताओं का कहना है कि वास्तविक पर्यावरण और आचारपरक पर्यावरण दोनों अलग-अलग चीजें हैं। जैसे वास्तविक पर्यावरण का अध्ययन प्रत्यक्ष साधनों के द्वारा किया जाता है। जबकि आचारपरक पर्यावरण का अध्ययन अप्रत्यक्ष साधरों के द्वारा किया जा सकता है।

     वास्तविक पर्यावरण के अन्तर्गत जैविक घटक, अजैविक घटक और उन दोनों के बीच चलने वाला ऊर्जा का प्रवाह का अध्ययन करते हैं जबकि आचारपरक क्रांति में एक व्यक्ति के व्यवहार का अध्ययन करते हैं। आचारपरक क्रांति एक ऐसी क्रांति है जो मनोविज्ञान, दर्शनशास्त्र, समाजशास्त्र और मानवशास्त्र के गर्भ से उत्पन्न हुआ है। भूगोल में आचारपरक क्रांति के विकास के चरण को चार भागों में बाँटते है:-

(1) प्रथम चरण (1955-60) ⇒ प्रथम चरण में डब्लू. किर्क, जे.के. राइट,  गिलबर्ट व्हाइट और हैगर स्टैंड का मुख्य योगदान है। हैगर स्टैंड ने अपने नव उत्पाद सिद्धांत के माध्यम से कृषि स्थानीयकरण का सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसमें यह बताया कि कृषि के स्थानीयकरण पर मानव व्यवहार का प्रभाव पड़ता है। फेटर और हॉटली महोदय ने अमेरिका के म्यामी बिच पर साफ्टी (आईसक्रीम ) उद्योग विकसित होने के पीछे मानव के व्यवहार को ही उत्तरदायी माना है।

(2) दूसरा चरण (1960-65) ⇒ दूसरा चरण में किट्स, वोल्पर्ट, डेविडहफ और लोवेंथल जैसे भूगोलवेताओं का योगदान है। इस चरण में प्रथम चरण की तुलना में और अधिक मनोविज्ञान के तथ्यों का प्रयोग भूगोल में किया गया है। ओल्पर्ट महोदय ने बताया कि मानवीय जनसंख्या के स्थानान्तरण पर आचारपरक क्रांति का प्रभाव पड़‌ता है। जैसे उन्होंने कहा बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश से मजदूरों का प्लायन पंजाब की ओर होना व्यावहारात्मक क्रान्ति का परिणाम है।

(3) तीसरा चरण (1965-71)⇒ तीसरा चरण में एलेन व्रेड, मरफी और पीटर गोल्ट, बोल्डिंग जैसे भूगोलवेताओं का योगदान प्रमुख है।

         बोल्डिंग महोदय ने आचारपरक क्रांति को एक मॉडल से समझाने का प्रयास किया है। 

आचारपरक क्रांति

   एलेन प्रेड महोदय ने व्यावहारात्मक क्रांति समझाने के लिए निम्नलिखित मैट्रिक्स चर का विकास किया।

आचारपरक क्रांति

(4) चौथा चरण (1971ई० के बाद से)⇒ चौथा चरण में डाउन्स और सोनेन फील्ड जैसे भूगोलवेताओं का विशेष योगदान है। सोनेन फील्ड ने व्यावहारात्मक क्रान्ति को समझाने के लिए एक संकेन्द्रीय मॉडल का प्रयोग किया है।

आचारपरक क्रांति

              पर्यावरण और व्यावहार को समझने के लिए डाउन्स महोदय ने भी एक मॉडल का प्रयोग किया है।

आचारपरक क्रांति

          उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भूगोल में व्यवहारात्मक क्रांति का विकास कई चरणों में हुआ है और मनोविज्ञान के तथ्यों के आधार पर उद्योगों के स्थानीयकरण, कृषि स्थानीकरण, जनसँख्या स्थानान्तरण के संबंध में कई सिद्धांत प्रस्तुत किए गए है। 

आचारपरक क्रान्ति का भूगोल पर प्रभाव

           भूगोल में आचारपरक क्रांति के आगमन ने भूगोल को कई तरह से प्रभावित किया है।

(i) इस क्रांति से मानव पर्यावरण और भौतिक पर्यावरण को समझने में मदद मिलती हैं।

(ii) प्रादेशिक प्रारूप और मानवीय गतिशीलता को समझने में मदद करती है। जैसे 1980 ई0 तक बिहार के अधिकांश लोग कलकत्ता की ओर स्थानान्तरण करते थे। लेकिन ज्यों ही यहाँ के लोगों को पंजाब और सूरत के संबंध में अधिक सूचनाएँ प्राप्त हुई त्यों ही स्थानान्तरण इन क्षेत्रों की ओर होने लगा।

(iii) स्थानीयकाण से संबंधित मानवीय निर्णय को भी आचारपरक क्रांति प्रभावित करता है। जैसे- फेटर और स्मिथ महोदय ने बताया है कि अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित नियामी बिच पर आइसक्रीम उद्योग का विकास मानव के व्यवहार के कारण हुआ है न कि भौतिक पर्यावरण के करण।

(iv) हैगरस्टैंड ने नवोत्पाद विसरण का सिद्धांत आचारपरक सिद्धांत से ही समझाते का प्रयास किया है।

आलोचना

(i) डेविड हार्वे महोदय ने अपनी पुस्तक “Explanation in Geography” में इसका आलोचना करते हुए कहा कि मानव का व्यवहार एक जटिल तंत्र है। इसे इतनी सफलता पूर्वक समझा नहीं जा सकता।

(ii) मानव का आचरण यदि सूचनाओं से नियंत्रित होता है तो यह संभव है कि गलत सूचना देकर मानव के व्यवहार को प्रभावित किया जाय इसके चलते गुलत परिणाम भी आ सकते हैं।

(iii) इसी संदर्भ में स्किनर महोदय ने कहा कि व्यवहारात्मक क्रांति के अध्ययन से प्रदूषित सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक चिन्तन विकसित हो सकता है।

निष्कर्ष

      उपरोक्त सीमाओं के बावजूद व्यावहारात्मक क्रान्ति की शुरुआत भूगोल में एक नयी पहल थी जिसके चलते भूगोल के विषयस्तु और विधितंत्र में स्पष्ट परिवर्तन हुए।



व्यवहारात्मक क्रांति याआचारपरक क्रांति उत्तर लिखने का दूसरा तरीका



व्यवहारात्मक क्रांति याआचारपरक क्रांति (Behavioral Revolution)

            द्वितीय विश्व युद्ध के बाद भूगोल के विधितंत्र में कई क्रांतियों का आगमन हुआ। उनमें से एक व्यवहारात्मक क्रांति था। इस क्रांति का आगमन मात्रात्मक क्रांति के विरुद्ध माना जाता है क्योंकि मात्रात्मक क्रांति के अन्तर्गत मानवीय मूल्यों का अध्ययन संभव नहीं था।

           प्रिस्टन विश्वविद्यालय (USA) में मानविकी विषयों के विद्वानों के सम्मेलन में यह निर्णय लिया गया था कि अन्तरविषाक अध्ययन पर विशेष जोर दिया जाय। इसी चिन्तन का परिणाम था कि कई भूगोलवेताओं ने दूसरे विषय के तथ्यों को भूगोल में आयात किया। मानव भूगोल में मनोविज्ञान के जो तथ्य आयात किये गये उससे मानवीय भूगोल के चिन्तन में त्वरित परिवर्तन हुआ। उसी त्वरित परिवर्तन को आचारपरक क्रांति / व्यवहारात्मक क्रांति से संबोधित किया गया।

           भूगोल में आचारपरक क्रांति का शुरुआत करने का श्रेय डब्लू. किर्क महोदय को जाता है। इनके कार्यों के बाद USA के गेस्टॉल्ड सम्प्रदाय ने भूगोल में आचारपरक क्रांति को विकास करने में विशेष भूमिका निभायी।

          आचारपरक क्रांति इस तथ्य का अध्ययन करता है कि मानव के द्वारा विकसित सामाजिक आर्थिक भूदृश्य पर मानव के आचारपरक वातावरण का प्रभाव पड़ता है। ओल्सन महोदय ने कहा है कि आचारपरक क्रांति सामाजिक आर्थिक भूगोल की कूंजी है।

आचारपरक क्रांति का विश्लेषण

       आचारपक क्रांति के समर्थक भूगोलवेताओं ने कहा है कि पर्यावरण को दो भागों में बाँटा जा सकता है-

(1) वास्तविक पर्यावरण – प्रत्यक्ष साधन

(2) आचारपरक पर्यावरण – अप्रत्यक्ष साधन

             वास्तविक पर्यावरण का अध्ययन प्रत्यक्ष साधनों या तकनीक के द्वारा किया जा सकता है। जबकि आचारपरक पर्यावरण का अध्ययन अप्रत्यक्ष साधनों के द्वारा किया का जा सकता है। आचारपरक क्रांति वास्तविक पर्यावरण की तुलना में एक व्यक्ति के आचारपरक पर्यावरण के अध्ययन पर विशेष जोर देता है। भूगोल में आचारपरक क्रांति का विकास निम्नलिखित चार चरणों में हुआ है।

चरण  काल (ई० में) प्रमुख भूगोलवेता
प्रथम चरण 1955-60 जे.के.राइट, डब्लू. किर्क, हैगरस्टैंड, गिल्वर्ट व्हाइट
दूसरा चरण  1960-65 वालपर्ट, कीट्स,डेविड हफ
तीसरा चरण 1965-71 एलेन प्रेड, मर्फी, पीटर गॉल्ड, बोल्डिंग,
चौथा चरण 1971 से आगे डाउन्स, सोनेनफील्ड

आचारपरक भूगोल के मॉडल

                आचारपरक भूगोलवेताओं में अलग-अलग मॉडल से समझने का प्रयास किया है। जैसे-

(1) बोल्डिंग महोदय ने मानव और पर्यावरण के बीच मिलने वाला संबंध को निम्नलिखित मॉडल से प्रस्तुत किया है। जैसे- 

चित्र: बोल्डिंग के अनुसार मानव-वातावरण संबंध का एक पम्परागत मॉडल (1956)

(2) एलेनप्रेड ने व्यवहारात्मक क्रांति को समझाने के लिए मैट्रिक्स मॉडल का प्रयोग किया। उन्होंने बताया कि मानव के व्यवहार पर सूचनाओं का प्रभाव पड़ता है। जैसे- इसे नीचे के मॉडल से समझा जा सकता है।

चित्र : एलेन प्रेड  का आचारपरक मैट्रिक्स (1969)

(3) डाउन्स महोदय ने पर्यावरण बोध और मानव के व्यवहार को निम्नलिखित मॉडल से समझाने का प्रयत्न किया है।

चित्र: पर्यावरण बोध तथा व्यवहार (1970)     

(4) सोनेनफील्ड ने आचारपरक क्रांति को समझने के लिए निम्नलिखित मॉडल को प्रस्तुत किया है-

चित्र: सोनेनफील्ड का सकेंद्रीय मॉडल (1972)

आचारपरक क्रान्ति का भूगोल पर प्रभाव

          भूगोल में आचारपरक क्रांति के आगमन ने भूगोल को कई तरह से प्रभावित किया है।

(i) इस क्रांति से मानव पर्यावरण और भौतिक पर्यावरण को समझने में मदद मिलती हैं।

(ii) प्रादेशिक प्रारूप और मानवीय गतिशीलता को समझने में मदद करती है। जैसे 1980 ई0 तक बिहार के अधिकांश लोग कलकत्ता की ओर स्थानान्तरण करते थे। लेकिन ज्यों ही यहाँ के लोगों को पंजाब और सूरत के संबंध में अधिक सूचनाएँ प्राप्त हुई त्यों ही स्थानान्तरण इन क्षेत्रों की ओर होने लगा।

(iii) स्थानीयकाण से संबंधित मानवीय निर्णय को भी आचारपरक क्रांति प्रभावित करता है। जैसे- फेटर और स्मिथ महोदय ने बताया है कि अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित नियामी बिच पर आइसक्रीम उद्योग का विकास मानव के व्यवहार के कारण हुआ है न कि भौतिक पर्यावरण के करण।

(iv) हैगरस्टैंड ने नवोत्पाद विसरण का सिद्धांत आचारपरक सिद्धांत से ही समझाते का प्रयास किया है।

आलोचना

(i) डेविड हार्वे महोदय के इसका आलोचना करते हुए कहा है कि मानव का व्यवहार एक जटिलतंत्र है। इसे सफलता पूर्वक नहीं समझा जा सकता है।

(ii) मानव का आचारण प्राप्त सूचनाओं से नियंत्रित होता है। अगर ऐसा मान लिया जाय तो किसी को गलत सूचना देकर उससे गलत कार्य भी करवाया जा सकता है।

(iii) स्किनर महोदय ने इसका आलोचना करते हुए कहा कि व्यवहारात्मक क्रांति के अध्ययन से सामाजिक आर्थिक चिन्तन प्रदूषित हो सकता है। ऐसे आचारपरक क्रांति का अध्ययन सावधानी पूर्वक किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

        उपरोक तथ्यों से स्पष्ट है कि आचारपरक क्रांति की कई सीमाएँ हैं। इन सीमाओं के बावजूद आचारपरक क्रांति ने भूगोलवेताओं को सोचने/चिन्तन के लिए एक नवीन विचा प्रस्तुत किया है।

16. रूढ़ प्रक्षेप, मॉलवीड प्रक्षेप, सिनुस्वायडल प्रक्षेप

16. रूढ़ प्रक्षेप, मॉलवीड प्रक्षेप, सिनुस्वायडल प्रक्षेप



रूढ़ प्रक्षेप (Conventional Projection)

⇒ किसी निश्चित उद्देश्य की पूर्ति हेतु स्वेच्छा के अनुसार छाटे गये सिद्धांतों पर निर्मित प्रक्षेप को रूढ़ प्रक्षेप कहते हैं।

⇒ रूढ़ प्रक्षेप पर समस्त संसार की मानचित्र बनायी जाती है।

⇒ रूढ़ प्रक्षेप इतना संशोधित प्रक्षेप है कि इसे न तो शंकु, न बेलनाकार, न खमध्य प्रक्षेप के वर्ग में रखते हैं। अत: यह पूर्णतः गणितीय विधि पर आधारित है।

⇒ रूढ़ प्रक्षेप मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं:-

(1) मॉलवीड प्रक्षेप

(2) सिनुस्वायडल प्रक्षेप

(1) मॉलवीड प्रक्षेप  (Mollweide’s Projection)

⇒ मॉलवीड प्रक्षेप का निर्माण 1805 ई० में जर्मन मानचित्रकार ब्रेडन मॉलवीड ने किया था।

⇒ मॉलवीड प्रक्षेप में समक्षेत्र प्रक्षेप का गुण पाया जाता है।

⇒ रूढ़ प्रक्षेप में समक्षेत्र प्रक्षेप का गुण उत्पन्न करने के लिए दो प्रकार के संशोधन किये जाते हैं:

(i) मॉलवीड प्रक्षेप में 90° पूर्वी और 90° पश्चिमी देशान्तर रेखा को एक वृत्त मानते हुए दिखाया जाता है जिसका अर्द्धव्यास (त्रिज्या) √2 x R होता है।

(ii) भूमध्यरेखा की लम्बाई केन्द्रीय मध्याहन रेखा की दुगनी होती है अर्थात् प्रक्षेप में बनाये गये वृत्त के अर्द्धव्यास का चार गुणा (4 x√2 x R) के बराबर भूमध्यरेखा होती है।

⇒ मॉलवीड प्रक्षेप पृथ्वी के वास्तविक अर्द्धव्यास को भी घटाकर निर्मित होता है।

⇒ सभी अक्षांश वृत्त सरल और समान्तर रेखाओं की तरह होते हैं। लेकिन भूमध्यरेखा से ध्रुव की ओर जाने पर अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी कम होती जाती है।

⇒ 90° पूर्वी और 90° पश्चिमी देशान्तर रेखा केन्द्रीय मध्याहन रेखा होती है। यही रेखा एक सरल देशान्तर रेखा होती है। जबकि शेष देशान्तर देखा दीर्घवृताकार होती है।

⇒ केवल केन्द्रीय मध्याहन रेखा अक्षांश को समकोण पर काटती है, शेष देशान्तर रेखा अक्षांश को तिरछी काटती है।

⇒ मॉलवीड प्रक्षेप में केन्द्रीय मध्याहन रेखा की लम्बाई भूमध्यरेखा की आधी रहती है।

⇒ केन्द्रीय मध्याहन रेखा से पूरब या पश्चिम की ओर जाने पर देशान्तर रेखाओं के बीच की दूरी घटते जाती है।

⇒ मॉलवीड प्रक्षेप विश्व मानचित्र बनाने हेतु, फसलों के उत्पादन दिखाने हेतु उपयोगी होता है। अत: यह संसार के वितरण मानचित्र बनाने के लिए सबसे उपयोगी है।

रूढ़ प्रक्षेप

मॉलवीड प्रक्षेप

(2) सैन्सन-फ्लैम्स्टीड या सिनुस्वायडल प्रक्षेप (Sanson-Flamsteed or Sinusoidal Projection)

सिनुस्वायडल प्रक्षेप का निर्माण 1650 ई० में निकोलस सैन्सन ने किया तथा बाद में जॉन फ्लैम्स्टीड ने इसमें संशोधन किया।

⇒ इसीलिए इसे सैन्सन-फ्लैम्स्टीड प्रक्षेप कहते है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप वास्तव में शंक्क्वाकार प्रक्षेप या बोन प्रक्षेप का एक भाग है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप पर क्षेत्रफल शुद्ध होता है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप में भूमध्यरेखा की लम्बाई 2πR के बराबर रखा जाता है। इसलिए भूमध्यरेखा पर लम्बाई शुद्ध होता है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप पर भूमध्यरेखा की लम्बाई πR के बराबर होता है।

⇒ सिनुस्वायडल प्रक्षेप की रचना में Sine Curve (ज्या वक्र) का प्रयोग होता है। इसलिए इसे ज्यावक्रीय या सिनुस्वायडल प्रक्षेप भी कहते हैं।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप में सभी अक्षांश रेखायें सीधी, समान्तर और समान दूरी पर स्थित होते हैं।

⇒ विषुवत रेखा मानक अक्षांश रेखा का कार्य करता है।

⇒ केन्द्रीय मध्याहन रेखा एक लम्बवत एवं सरल रेखा होती है। लेकिन शेष सभी देशान्तर रेखाएँ मिश्रित वक्र होती है।

⇒ लेकिन एक ही अक्षांश रेखा पर दो देशान्तर रेखा के बीच की दूरी नियत रहती हैं। 

⇒ केवल केन्द्रीय मध्याहन रेखा विषुवतीय अक्षांश को समकोण पर काटती है और शेष को तिरछे काटती है।

⇒ केन्द्रीय मध्याहन रेखा पर मापनी शुद्ध होती है लेकिन अन्य देशान्तर रेखाओं पर अशुद्ध होती है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप पर सीमावर्ती भागो में आकृति काफी विकृत हो जाती है।

सिनुस्वायडल प्रक्षेप वैसे महाद्वीपों के लिए उपयोगी है जो विषुवत रेखा के दोनों ओ स्थित है। जैसे- अफ्रीका, द० अमेरिका।

उदाहरण 1. विश्व का मानचित्र बनाने के लिए एक सिनुस्वायडल प्रक्षेप की रचना कीजिए जिसकी मापनी 1:250000000 तथा प्रक्षेपान्तर 30 हो।

रचना विधि-

(i) मापनी के अनुसार आंकलित ग्लोब का अर्द्धव्यास, अर्थात

RR = 250000000/2500000000

= 1″

(ii) भूमध्य रेखा की लम्बाई = 2πR

= 2× 22/7 × 1″

= 6.28″

(iii) केन्द्रीय मध्याह्न रेखा की लम्बाई = 2πR/2

= 6.28″/2

= 3.14″

रूढ़ प्रक्षेप

सिनुस्वायडल प्रक्षेप

         उपरोक्त  चित्र A के अनुसार 1″ का अर्द्धव्यास लेकर वृत्त के चतुर्थांश ABO की रचना करते हैं। OB रेखा के O बिन्दु पर 30 के अन्तराल पर कोण बनाती हुई OC तथा OD रेखायें खींचते हैं।

    फिर BC की चापीय दूरी से O बिन्दु से एक चाप लगाते हैं जो OC तथा OD कोणिक रेखाओं को क्रमशः E तथा F बिन्दुओं पर काटता है। E तथा F बिन्दुओं से OA रेखा पर EE’ तथा FF’ लम्ब डालते हैं (अर्थात् OB के समान्तर रेखा खींचते हैं)। यही क्षैतिज दूरियाँ प्रक्षेप में सम्बन्धित अक्षांशों पर देशान्तरों के मध्य की दूरी को प्रकट करेंगी।

   अब चित्र B के अनुसार 6.28″ लम्बी क्षैतिज रेखा खींचते हैं जो भूमध्यरेखा कहलाती है। इस रेखा को BC की चापीय दूरी 2πR x Interval/360 से 360/ 30 = 12 समान भागों में विभाजित करते हैं।

   तत्पश्चात् इस रेखा के मध्यवर्ती बिंदु से ऊपर तथा नीचे दोनों ओर NS लम्ब डालते हैं, जिसकी लम्बाई भमध्यरेखा की आधी होती है। अर्थात् NS रेखा पर BC की चापीय दूरी से भूमध्यरेखा के ऊपर तथा नीचे तीन-तीन चिह्न अंकित करते हैं तथा इन चिन्हों से भूमध्यरेखा के समान्तर रेखायें खींचते हैं। ये समान्तर रेखायें क्रमशः 30 तथा 60 उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश वृत्त होंगे और N व S बिन्दु क्रमशः उत्तरी एवं दक्षिणी ध्रुव होंगे।

     देशान्तर रेखायें बनाने के लिए 30° तथा 60 उत्तरी एवं दक्षिणी अक्षांश वृत्तों पर केन्द्रीय मध्याह्न रेखा के दायें-बायें दोनों ओर क्रमशः EE’ एवं FF’ दूरी से छः छः चिह्न लगाते हैं।

     तदुपरान्त अक्षांश वृत्तों पर अंकित समान देशान्तरीय मान वाले इन चिन्हों को ध्रुवों (N तथा S बिन्दुओं) से फ्रेंच कर्व द्वारा मिला कर देशान्तर रेखाओं की रचना पूर्ण करते हैं। चित्र की भांति केन्द्रीय मध्याह्न रेखा को 0° की देशान्तर मान कर शेष देशान्तर रेखाओं पर उनके अंशों में मान अंकित करते हैं।



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15. मर्केटर एवं गॉल प्रक्षेप में तुलना (Comparison Between Mercator’s and Gall Projection)

15. मर्केटर एवं गॉल प्रक्षेप में तुलना



मर्केटर एवं गॉल प्रक्षेप में तुलना⇒

मर्केटर प्रक्षेप  गॉल प्रक्षेप 
(1) मर्केटर प्रक्षेप में भूमध्य रेखा की लम्बाई 2πr होती है। (1) गॉल प्रक्षेप में भूमध्यरेखा की लम्बाई 45° अक्षांश के बराबर होती है।
(2) मर्केटर प्रक्षेप में ध्रुव को नहीं दिखाया जा सकता। (2) गॉल प्रक्षेप में ध्रुव को दिखाया जा सकता है।
(3) मर्केटर प्रक्षेप में प्रकाश का स्रोत केन्द्र पर होता है। (3) गॉल प्रक्षेप में प्रकाश का स्रोत विषुवत रेखा के ठीक  180 पर होता है।
(4) इसमें आकृति और दिशा शुद्ध होता है। (4) गॉल प्रक्षेप में आकृति, दिशा और क्षेत्रफल तीनों अशुद्ध होती है।
(5) सभी देशान्तर रेखाएँ Great Circle होती है। (5) इसमें यह गुण नहीं होता है।
(6) मर्केटर में रम्ब लाइन खींचा जाता है। (6) गॉ में रम्ब लाइन नहीं खींचा जाता है।
(7) मर्केटर प्रक्षेप नौसंचालन के लिए उपयुक्त है। (7) गॉल प्रक्षेप राजनीतिक मानचित्र के लिए उपयुक्त है।

मर्केटर एवं गॉल प्रक्षेप


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14. गॉल प्रक्षेप (Gall’s Projection)

14. गॉल प्रक्षेप (Gall’s Projection)



गॉल प्रक्षेप⇒

⇒ गॉल एक संशोधित बेलनाकार प्रक्षेप है।

⇒ इसे गॉल का त्रिविम प्रक्षेप भी कहते हैं क्योंकि इसमें प्रकाश के स्रोत विषुवत रेखा के ठीक 180 पर रहता है।

⇒ गॉल प्रक्षेप में समतल कागज का खोखला बेलन इस प्रकार रखा जाता है कि ग्लोब के 45ºN और 45°S अक्षांश को एक साथ काटता है। अतः इसमें भूमध्यरेखा की लम्बाई पृथ्वी की 45º अक्षांश रेखा के बराबर बनायी जाती है।

⇒ गॉल प्रक्षेप में अक्षांश वृत की लम्बाई एक समान, सीधी एवं समानान्तर होती है।

⇒ प्रत्येक अक्षांश रेखाओं की लम्बाई 45º अक्षांश वृत्त के लम्बाई (2πR Cos45) के बराबर होती है।

⇒ भूमध्यरेखा से ध्रुव की ओर जाने पर अक्षांश रेखाओं के बीच की दूरी बढती है, लेकिन मर्केटर प्रक्षे के तुलना में कम बढ़ती है।

⇒ सभी अक्षांश रेखाओं की लम्बाई 45° अक्षांश रेखा के बराबर होती है।

⇒ सभी देशान्तर रेखाएँ सीधी और समानान्तर होती हैं।

⇒ देशान्तर और अक्षांश रेखाएँ एक-दूसरे के समकोण पर काटती है।

⇒ केवल 45ºN से 45ºS अक्षांश पर मापनी शुद्ध होती है।

⇒ 45º अक्षांश से विषुवत रेखा की ओर जाने पर मापनी छोटी और ध्रुव की ओर जाने पर मापनी बढ़ी हुई होती है।

⇒ गॉल प्रक्षेप पर आकृति, क्षेत्रफल और दिशा तीनों अशुद्ध होती है।

⇒ गॉल प्रक्षेप पर राजनीतिक मानचित्र या दीवारी मानचित्र का निर्माण विशेष तौर पर किया जाता है।

उदाहरण 1. विश्व का मानचित्र बनाने के लिए एक गॉल्स प्रक्षेप की रचना कीजिए जिसकी मापनी 1 : 250000000 तथा प्रक्षेपान्तर 15 हो।

रचना विधि-

(i) मापनी के अनुसार आंकलित ग्लोब का अर्द्धव्यास, अर्थात

RR = 250000000/2500000000

= 1″

(ii) 45º अक्षांश वृत्त की लम्बाई = 2πR Cos45

= 2× 22/7 × 1″ x 0.71

= 4.46″

(iii) Interval Distance (अन्तरालीय दूरी)

= 45º अक्षांश वृत्त की लम्बाई x Interval ÷ 360

= 4.46″ x 15 ÷ 360

= 4.46″ / 24

= .186″

     RF के अनुसार Reduce Radius (RR) = 1″ पर वृत्त NESQ खींचा। केन्द्र O से EQ पर क्रमशः 15°, 30°, 45°, 60°, 75° के कोण बनाती हुई रेखाएं खींची। 45° की रेखा तथा परिधि के कटाव बिन्दु से ध्रुवीय अक्ष से समानान्तर रेखा खींची। सभी अक्षांशों व परिधि व कटान बिन्दु से E को मिलाया। ये रेखाएं अथवा इनके बढ़ाये हुए भाग जहाँ अक्ष के समानांतर खींची गई रेखा से मिलते हैं वह विषुवत रेखा से अक्षांशों की दूरी हुई।

    अतः विषुव अक्ष EQ को आगे बढ़ाया तथा 45° की रेखा पर अन्तरालीय दूरी (.186″) के अनुसार इस पर 24 भाग काट लिए। बिन्दुओं से विषुवत रेखा पर लम्बवत रेखाएं खींचा तथा पूर्व निर्मित रेखा पर प्राप्त कटान बिन्दुओं से विषुवत रेखा के समानान्तर रेखाएं खींचीं जो अक्षांश रेखाएं हैं। इस प्रकार रेखा-जाल तैयार हो जायेगा।

गॉल प्रक्षेप

गॉल प्रक्षेप



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