36. Distribution Maps- Dot, Choropleth and Isopleth Method (वितरण मानचित्र: बिंदु, वर्णमात्री तथा सममान रेखा विधि)

Distribution Maps- Dot, Choropleth and Isopleth Method

(वितरण मानचित्र: बिंदु, वर्णमात्री तथा सममान रेखा विधि)



वितरण मानचित्र:-

          प्राकृतिक अथवा सांस्कृतिक वातावरण के किसी तत्व का दिये हुए क्षेत्र में वितरण प्रदर्शित करने वाले मानचित्र को वितरण मानचित्र कहते हैं।

           वितरण मानचित्र बनाने की विधियों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है-

(1) अमात्रात्मक विधियाँ (Non-Quantitative Methods) तथा

(2) मात्रात्मक विधियाँ (Quantitative Methods)।

    अमात्रात्मक विधियों के द्वारा बनाये गये वितरण मानचित्रों को गुण प्रधान मानचित्र कहते हैं तथा मात्रात्मक विधियों के अनुसार बनाए गए वितरण मानचित्र को सांख्यिकीय मानचित्र कहते हैं।

      गुण प्रधान मानचित्रों में किसी तत्व या वस्तु का वितरण दिखाते समय वितरण के घनत्व पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके विपरीत सांख्यिकीय मानचित्रों का मूल उद्देश्य किसी तत्व या वस्तु के मूल्य, मात्रा या घनत्व की क्षेत्रीय भिन्नता को चित्रित करना होता है। दोनों प्रकार के मानचित्रों का यही एकमात्र अंतर है।

1. अमात्रात्मक विधियां

(i) रंगारेख विधि (Colour-Patch Method):-

         अमात्रात्मक वितरण मानचित्र बनाने की यह एक सरल एवं लोकप्रिय विधि है। इस विधि के अनुसार बनाए गए वितरण मानचित्रों को रंगारेख मानचित्र (Colour Patch Map), रंगक मानचित्र (Tint Map), वर्ण मानचित्र (Colour Map) तथा कोरोकोमैट्रिक मानचित्र (Chorochomatic Map) आदि, भिन्न-भिन्न नामों से पुकारते हैं। उन मानचित्रों में भिन्न-भिन्न तत्वों या वस्तुओं के वितरण क्षेत्रों को रंग भरकर स्पष्ट करते हैं।

      प्राकृतिक प्रदेशों, राजनीतिक व प्रशासनिक क्षेत्रों, भूमि उपयोग के प्रकारों, भूवैज्ञानिक क्षेत्रों तथा प्राकृतिक वनस्पति व मिट्टियों के प्रकारों को प्रदर्शित करने के लिए प्रायः इस विधि का प्रयोग करते हैं।

  • रंगारेख मानचित्रों में अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के अनुसार निर्धारित रंग प्रयोग किये जाते हैं।
  • प्राकृतिक प्रदेश प्रदर्शित करने वाले मानचित्रों में पर्वतीय क्षेत्रों को गहरे भूरे रंग से, पठारी भागों को हल्के भूरे रंग से तथा मैदानों को पीले रंग से दिखाते हैं।
  • वनस्पति मानचित्रों में वनों के लिए हरे रंग का घास के मैदानों के लिए पीले रंग का तथा मरूस्थलीय वनस्पति के लिए भूरे रंग का प्रयोग होता है।

(ii) सामान्य छाया विधि (Simple Shade Method):-

    इसमें रंगों के स्थान पर काली स्याही से बनायी गयी छायाएं प्रयोग में लाते हैं। इस मानचित्र का एकमात्र उद्देश्य भिन्न-भिन्न प्रकार के क्षेत्रों को दिखाना होता है तथा इन मानचित्रों में प्रयुक्त छायाओं का वितरण के घनत्व से कोई संबंध नहीं होता है। इसके विरीत वर्णमात्री मानचित्रों में वितरण के घनत्व के अनुसार छायाओं को हल्का या भारी करना आवश्यक होता है। सामान्य छाया विधि के अनुसार ग्रेट ब्रिटेन में कृषि भूमि उपयोग को दिखलाया जाता है।

  • पुस्तकों में रंगारेख मानचित्रों के स्थान पर सामान्य छाया मानचित्रों की सहायता से भिन्न-भिन्न प्रकार के क्षेत्रों, जैसे- जलवायु, कटिबंध, कृषि पेटियाँ, फसलों के क्षेत्र, मिट्टियों के प्रकार, औद्योगिक पेटियाँ व खनिज क्षेत्र आदि का वितरण दिखलाते हैं।

(iii) चित्रीय विधि (Pictorial Method):-

    इस विधि में जिन-जिन वस्तुओं के स्थान, क्षेत्र या वितरण दिखाने होते हैं, उन वस्तुओं के वास्तविक फोटोचित्रों पर आधारित रेखाचित्रों को मानचित्र में यथा स्थान बना दिया जाता है।

  • किसी देश के दर्शनीय स्थानों, पर्यटक केंद्रों, वेश-भूषा के प्रकारों, जनजातियों तथा ऐतिहासिक व सांस्कृतिक वैभव को प्रायः इसी विधि के द्वारा दर्शाया जाता है।
  • पर्यटन कार्यालयों एवं बड़े-बड़े रेलवे स्टेशनों पर इस प्रकार के चित्रीय मानचित्र देखे जा सकते हैं।

(iv) वर्णप्रतीकी या प्रतीक विधि (Choro-Schematic or Symbol Method):-

   प्रतीक या चिह्नों की सहायता से वितरण प्रदर्शित करने की विधि को वर्णप्रतीकी या प्रतीक विधि कहते हैं। इस विधि में जिन वस्तुओं का वितरण दिखलाना होता है उन सबके अलग-अलग चिह्न या प्रतीक निश्चित करके उन्हें मानचित्र में यथा स्थान अंकित कर देते हैं।

  • चित्रमय प्रतीकों का सबसे बड़ा गुण यह है कि इन्हें देखने मात्र से प्रदर्शित की गई वस्तुओं का बोध हो जाता है तथा मानचित्र के संकेत में प्रतीकों का अर्थ देखने की आवश्यकता नहीं है।

(v) नामांकन विधि (Noming Method):-

     यह विधि मूलाक्षर प्रतीक विधि के समान होती है, केवल इतना अंतर है कि मूलाक्षर विधि में प्रदर्शित की जाने वाली वस्तुओं के नाम के प्रथम अक्षर या अक्षरों को प्रतीक के रूप में प्रयोग करते हैं जबकि नामांकन विधि में मानचित्र पर वस्तुओं के यथास्थान पूरे नाम लिखे जाते हैं।

2. मात्रात्मक विधियाँ

     किसी तत्व या वस्तु के मूल्य, मात्रा अथवा घनत्व की क्षेत्रीय भिन्नता प्रकट करने वाली सांख्यिकीय मानचित्रों जैसे, वर्षा-मानचित्र, जनसंख्या मानचित्र, तथा प्रति हेक्टेयर उत्पादन वाले कृषि मानचित्र आदि की रचना करने के लिए मात्रात्मक विधियाँ प्रयोग में लायी जाती हैं। इस प्रकार के वितरण मानचित्रों का भूगोल में काफी महत्त्व है। इन विधियों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जाता है-

(i)  वर्णमात्री विधि (Choropleth Method)

(ii) सममान रेखा विधि (Isopleth Method)

(iii) बिंदु-विधि (Dot Method)

(iv) सांख्यिकीय आरेख विधि (Statistical Diagram Method)



(i)  वर्णमात्री विधि (Choropleth Method)



       इस विधि द्वारा प्रशासकीय इकाइयों को आधार मानकर पदार्थों की मात्रा तथा घनत्व का वितरण, मानचित्र पर एक ही रंग की कई आभाओं तथा साधारण रेखा छाया द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार के मानचित्र दी हुई सांख्यिकीय तालिका की सहायता से खींचे जाते हैं। सर्वप्रथम, इस तालिका की सहायता से विभिन्न प्रशासकीय इकाइयों के लिए क्रमबद्ध घनत्व आंकड़ों (Graded Density Figures) की तालिका निश्चित कर लेते हैं। तत्पश्चात् एक रंग की विभिन्न आभाओं तथा रेखाओं द्वारा व विभिन्न छायाओं द्वारा पदार्थों के घनत्व एवं मात्रा को प्रदर्शित कर देते हैं।

       ऊंचाई दर्शाने के लिए रंग छाया विधि अधिक उपयोगी है, परन्तु अन्य पदार्थों के घनत्व एवं मात्रा का वितरण रेखाओं द्वारा छाया देकर प्रदर्शित किया जाता है। इस प्रकार के मानचित्र छाया-वितरण अथवा वर्णमात्री वितरण-मानचित्र (Choropleth Maps) कहलाते हैं। वर्णमात्री-मानचित्र (Choropleth Maps) द्वारा कृषि, उद्योग-धन्धों तथा यातायात सम्बन्धी आंकड़े प्रदर्शित किए जाते हैं।

  • इन मानचित्रों में घनत्व आदि की भिन्नता को राजनीतिक अथवा प्रशासकीय क्षेत्रों के आधार पर प्रदर्शित किया जाता है।
  • इस प्रकार के मानचित्र में सबसे कम घनत्व वाले क्षेत्र में सबसे हल्की छाया, उससे अधिक घनत्व वाले क्षेत्र में और भारी छाया तथा सबसे अधिक घनत्व वाले क्षेत्र में सबसे भारी छाया भरी जाती है।

     छाया विधि द्वारा पदार्थों की मात्रा एवं घनत्व का प्रदर्शन करने के लिए विभिन्न घनत्वों एवं मात्राओं पर आधारित एक छाया-तालिका (Index to Shading) बना ली जाती है। यह छाया तालिका क्रमानुसार (Graded) होती है। तत्पश्चात् विभिन्न घनत्व के क्षेत्रों में इस तालिकानुसार छाया दी जाती है। उदाहरण के लिए, वर्षा के घनत्व को प्रदर्शित करने के लिए 75 सेमी० से कम, 76 सेमी० से 100 सेमी० तक, 101 सेमी० से 135 सेमी० तक वर्षा के विभिन्न घनत्वों के लिए घनत्व की रेखाएं खींच देते हैं। 135 सेमी० अथवा सबसे अधिक घनत्व को काले रंग अथवा अत्यधिक पास खींची गई रेखाओं द्वारा प्रदर्शित करते हैं।

     यहां एक तत्व अत्यन्त महत्वपूर्ण है। वह यह है कि केवल वही मानचित्र कोरोप्लेथ मानचित्र (Choropleth Maps) कहलाते हैं जिनमें वितरण प्रशासकीय सीमाओं (Administrative Boundaries) के अनुसार, उन सीमाओं को मानचित्र में खींचकर प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे मानचित्रों में चाहे एक ही रंग की विभिन्न आभाओं द्वारा वितरण का घनत्व प्रदर्शित किया जाए चाहे रेखा छाया द्वारा घनत्व प्रदर्शित किया जाये, घनत्व प्रशासकीय इकाइयों के अनुसार मानचित्र में भरा जाता है। अतः ऐसे मानचित्रों (Choropleth Maps) में प्रशासकीय इकाइयां खींचना आवश्यक होता है।

      इस विधि द्वारा पदार्थों की मात्रा तथा घनत्व का प्रदर्शन प्रायः अशुद्ध रहता है। इसका कारण यह है कि घनत्व के विभिन्न क्षेत्र अधिकतर राजनीतिक सीमाओं का अनुसरण करते हैं। इसके अतिरिक्त समस्त क्षेत्र में पदार्थ के समान घनत्व का भ्रम होता है, यद्यपि अधिक न्यून घनत्व भी उस क्षेत्र में हो सकता है। 



(ii) सममान रेखा विधि (Isopleth Method)



        इस विधि द्वारा रेखाओं द्वारा घनत्व अथवा मात्रा का वितरण प्रदर्शित करते हैं। पदार्थों के समान मात्रा एवं घनत्व वाले स्थानों को रेखाओं द्वारा मिला देते हैं। इन रेखाओं को सममान रेखाएं (Isopleth) कहते हैं।

     दूसरे शब्दों में मानचित्रों पर किसी वस्तु के समान मूल्य या घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएँ को सममान रेखाएँ कहा जाता है। 

(नोट : सम = बराबर, मान = मूल्य अर्थात मानचित्र पर किसी तत्व या वस्तु के समान मूल्य / घनत्व) 

    उदाहरण के लिए, समान तापक्रम वाले स्थानों को मिलाने वाली समताप रेखाएं (Isotherms), समान वायु दाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखाएं समदाब रेखा (Isobars), तथा समान वर्षा वाले स्थानों को मिलाने वाली समवर्षा रेखाएं (Isohyets) कहलाती हैं। समोच्च रेखाएं (Contours) भी इसी प्रकार की रेखाएं होती हैं।

     इसी प्रकार कृषि के समान उपज वाले स्थानों को मिलाने के लिए रेखाएं खींचकर Agricultural Isopleth Maps आदि बना सकते हैं, परन्तु इस विधि का उपयोग जलवायु के तत्वों के प्रदर्शन के लिए किया जाता है।

    इस विधि द्वारा निर्मित मात्रात्मक वितरण-मानचित्र भूगोल में अति उपयोगी होती हैं। समान रेखाएं किसी देश अथवा क्षेत्र को विभिन्न मात्रा एवं घनत्व के क्षेत्रों में विभाजित कर देती हैं। उदाहरण के लिए, समवृष्टि रेखाओं द्वारा अधिक एवं न्यून वर्षा क्षेत्रों के विषय में मानचित्र को एक ही बार देखने से वर्षा का ज्ञान प्राप्त हो जाता है। सममान रेखाएं (Isopleth Lines) शुद्ध आंकड़ों के प्राप्त होने पर ही खींची जा सकती हैं। इन रेखाओं के खींचने में निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए :

  • सममान रेखाओं का मान निश्चित अन्तिम मान शून्य से प्रारम्भ करके निर्धारित करते हैं।
  • सममान रेखाएं निश्चित अन्तर पर खींची जाती हैं।
  • पास-पास खिंची सममान रेखाएं वितरण के अधिक परिवर्तन की द्योतक हैं। इसी प्रकार दूर-दूर खिंची समरेखाएं वितरण का न्यून परिवर्तन दर्शाती हैं।

मानचित्रों पर दर्शाएँ जाने वाली प्रमुख सममान रेखाएँ

1. आइसोनीफ (Isonif)⇒ समान हिम वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनीफ कहते है।

2.  सममेघ रेखा या आइसोनेफ (Isoneph)⇒ समान मेघ आच्छादन वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आइसोनेफ कहते है।

3. आइसो बाथ (Isobath)⇒ समुद्र के अंदर समान गहराई वाले स्थानों को मिलाकर खींचे जाने वाली रेखा को आइसो बाथ कहते है।

4. आइसो ब्रांट (Isobront)⇒ एक समान समय पर तूफान आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

5. समपवनवेग रेखा या आइसोटैक (Isotach)⇒ मौसम मानचित्र पर पवन की समान गति वाले स्थानों को मिलाकर खींची गई रेखा।

6. समताप रेखा (Isotherm)⇒ समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

7. आइसोपैच (Isopach)⇒ हिमानी अथवा चट्टानों के समान मोटाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

8.  समकाल रेखा या आइसोक्रोन (Isochrone)⇒ किसी बिंदु से एक समान समय में तय कि गई दूरी वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

9. समदिक्पाती रेखा (Isogone)⇒ समान चुंबकीय झुकाव वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

10. समलवणता रेखा (Isohaline)⇒ समुद्री जल में खारेपन की समान मात्रा मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा

11. आइसोरेमे (Isoraime)⇒ पाला गिरने की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

12. आइसोस्टेड (Isostade)⇒ समान अधिवासीय संख्या को मिलाने वाली रेखा।

13. समभूकंपीय (Isoseismal)⇒ भूकंपीय तीव्रता की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

14. सहभूकंप रेखा या होमोसिस्मल (Homoseismal) ⇒ भूकंप के एक ही समय आने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

15. आइसोथेरे (Isothere)⇒ ग्रीष्मकाल के समान तापमान वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

16. समदाब रेखा (Isobars)⇒ समान वायुदाब वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

17. इसालोबार (Isallobar)⇒ एक विशिष्ट अवधि में वायुमंडलीय दबाव में होने वाले समान परिवर्तन के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

18. आइसोहेल (Isohel)⇒ सूर्य के प्रकाश की समान अवधि वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

19. समोच्च रेखा या आइसोहाइप (Contour lines or Isohypes)⇒ समुद्र तल से समान ऊँचाई वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

20. आइसोपाइकनिक (Isopycnic)⇒ मानव जनसंख्या के समान घनत्व वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

21. आइसोकाइनेटिक (Isokinetic)⇒ समान पवन वेग के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

22. समवर्षा रेखा (Isohytes)⇒ वर्षा की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

23. आइसोमेर (Isomer)⇒ वर्षा की वार्षिक मात्रा की प्रतिशत के रूप में व्यक्त की जाने वाली उसकी औसत मासिक मात्रा के स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

24. आइसोपाथ (Isopath)⇒ भूगर्भिक अथवा भू भौतिक परत की समान मोटाई वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

25. आइसोसिस्ट (Isoseist)⇒ समान भूकंपीय लहरों को एक समय में ही अनुभव करने वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

26. आइसोटालेंटोज (Isotalantose)⇒ औसत मासिक तापांतर की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

27. आइसोइकेते (Isoikete)⇒ लोगों केहने योग्य निवास की समान मात्रा वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

28. आइसोफीन (Isophene)⇒ समान मौसमी घटनाओं को दर्शाने वाली रेखा।

29. आइसोथर्मो बाथ (Isothermobath)⇒ सागरीय जल की गहराई के अनुसा समान ताप वाले बिंदुओं को मिलाने वाली रेखा।

30. आइसोचाइम (Isochime)⇒ औसत शीत की तापमान की समानता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।

31. आइसोफाइट (Isophite) ⇒ वनस्पतियों की समान ऊंचाई अथवा समान ऊंचाई वाले वनस्पति के स्तरों को मिलाने वाली रेखा।

32. आइसोप्रैक्ट (Isopract)⇒ मानव जनसंख्या के समान वितरण वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा।



(iii) बिंदु-विधि (Dot Method)



        वितरण मानचित्र बनाने की इस विधि में किसी वस्तु के वितरण के घनत्व को समान आकार व आकृति वाले बिंदुओं के द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। यह एक ऐसा वर्णप्रतीकी मानचित्र होता है जिसमें एक ही प्रतीक की बार-बार पुनरावृत्ति होती है। चूंकि बिंदुकित मानचित्र में बिंदुओं की कुल संख्या तथा प्रदर्शित मात्राओं के मध्य निरपेक्ष अनुपात होता है। अतः बिंदु विधि को कभी-कभी निरपेक्ष विधि (Absolute Method) नाम से भी जाना जाता है।

    इस कार्य के लिए एक बिन्दु का कोई मान, जैसे- 5,000 व्यक्ति, 4,000 पशु अथवा 5,000 हेक्टेअर, आदि निश्चित कर लेते हैं। इसके बाद दिए गए क्षेत्र के प्रत्येक विभाग जैसे- देश, राज्य, जिला, तहसील या विकास खण्ड जिसके अनुसार आंकड़े दिए गए हों, में सम्बन्धित वस्तु की सम्पूर्ण संख्या अथवा मात्रा प्रकट करने के लिए बिन्दुओं की संख्या ज्ञात करते हैं तथा अन्त में इन बिन्दुओं को उस क्षेत्र के रूपरेखा मानचित्र में अंकित कर देते हैं।

    यहाँ पर अच्छी तरह जान लेना चाहिए कि बिन्दुकित मानचित्र बनाने का कार्य उतना सरल नहीं है जितना कि यह दिखता है। इसका कारण निम्नलिखित चार समस्यएं हैं, जिन्हें मानचित्र बनाने से पूर्व हल कर लेना अत्यन्त आवश्यक है:-

(i) बिन्दु मूल्य निश्चित करना

(ii) बिन्दुओं का आकार

(iii) बिन्दुओं को अंकित करना-

(a) सम वितरण प्रणाली तथा

(b) असम वितरण प्रणाली

(iv) एक समान बिन्दु बनाना, आदि।

     जनसंख्या का वितरण प्रदर्शित करने वाले बिंदुकित मानचित्र में कोई ऐसा बिंदु-मूल्य चुनना कठिन होता है जिससे नगरीय व ग्रामीण दोनों प्रकार की जनसंख्या का सही-सही वितरण दिखाया जा सके।

     उपर्युक्त समस्याओं को हल करने की निम्नांकित दो विधियां हैं-:

(A) स्टिलजेन बोर विधि (Stilgen Baur’s Method):-

     इसे बिन्दु तथा वृत्त विधि भी कहते हैं। इसमें बिन्दु तथा वृत्तों द्वारा जनसंख्या का प्रदर्शन किया जाता है। इस विधि का आविष्कार 1930 ई० में नगरीय एवं ग्रामीण जनसंख्या को एक ही मानचित्र पर प्रदर्शित करने के लिए अमेरिकी मानचित्रकार स्टिलजेन बोर महोदय ने किया। इसमें ग्रामीण जनसंख्या को समान आकार वाले बिन्दुओं द्वारा तथा नगरीय जनसंख्या को वृत्तों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। नगरीय जनसंख्या को प्रदर्शित करने वाले वृत्तों के अर्द्धव्यास निम्नलिखित सूत्र द्वारा निकाले जाते हैं।

Distribution Maps

Stilgen Baur’s Method

(B) स्टेन डी गीयर विधि (Sten De Geer’s Method):-

     इसे बिन्दु तथा गोला विधि भी कहते हैं। इस विधि का आविष्कार अमेरिकी मानचित्रकार स्टेन डी गीयर ने 1917 ई. में किया। इसमें ग्रामीण जनसंख्या को बिन्दुओं द्वारा तथा नगरीय जनसंख्या को गोलों द्वारा प्रदर्शित किया जाता है। गोले बनाने के लिए घनमूल निकालना पड़ता है। इसे निम्न सूत्र द्वारा ज्ञात किया जा सकता है:

Sten De Geer’s Method

बिन्दु विधि के गुण (Merits of dot Methods)-

     बिन्दु विधि के निम्नलिखित गुण विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं:-

1. चूंकि बिन्दु स्वयं असांतत्य रूप (Discountinuous Form) में होते हैं, अतः यह विधि असांतत्य इकाइयों में मिलने वाली वस्तुओं (जैसे- जनसंख्या, पालतू पशु तथा फसलों, आदि) के वितरण को प्रदर्शित करने में बहुत उपयोगी है।

2. साधारणतया किसी बिन्दुकित मानचित्र में केवल एक वस्तु का वितरण प्रदर्शित करते हैं, लेकिन विशेष परिस्थिति में एक ही मानचित्र में कई सम्बन्धित वस्तुओं को भिन्न-भिन्न प्रकार के बिन्दुओं द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है।

3. बिन्दु विधि का प्रयोग क्षेत्रफल सम्बन्धी आंकड़ों का वितरण दिखाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस विधि के द्वारा मूल्य, आयतन, भार, आदि आंकड़ों का वितरण भी प्रदर्शित किया जा सकता है।

4. चूंकि बिन्दुकित मानचित्रों में वर्णमात्री मानचित्रों की तरह बार-बार संकेत देखने की जरूरत नहीं होती है, अतः इन मानचित्रों को शीघ्रतापूर्वक आसानी से पढ़ा जा सकता है।

5. बिन्दु विधि के द्वारा सही-सही बनाए गए मानचित्र से किसी वस्तु के वास्तविक वितरण का काफी सीमा तक यथार्थ चित्रण सम्भव है।

6. आवश्यकता पड़ने पर किसी सांख्यिकीय इकाई के बिन्दुओं को गिनकर पुनः आंकड़ों में बदला जा सकता है, लेकिन बिन्दु गिनने में होने वाली कठिनाई व त्रुटि की सम्भावना के कारण यह गुण विवादास्पद है।

बिन्दु विधि के दोष (Demerits of Dot Method)-

       बिन्दु विधि के प्रमुख दोष निम्नलिखित हैं :

1. पर्याप्त अभ्यास के बिना समान आकार व आकृति के बिन्दु बनाना कठिन होता है।

2. छोटी-छोटी सांख्यिकीय इकाइयों के आधार पर आंकड़े उपलब्ध न होने की दशा में बिन्दु विधि के द्वारा किसी वस्तु के वितरण की वास्तविक दशाओं का यथार्थ चित्रण करना असम्भव है।

3. बिन्दु विधि मानचित्र बनाने के लिए ऐसे आधार मानचित्र की आवश्यकता होती है जिसमें आव- श्यक सांख्यिकी इकाई क्षेत्रों में सीमाएं हों। इस तरह के आधार मानचित्र सदैव उपलब्ध नहीं होते हैं, अतः सहायक मानचित्रों की सहायता से आधार मानचित्र में इन सीमाओं को अंकित करने के लिए अतिरिक्त परिश्रम व समय की आवश्यकता पड़ती है।

4. विषय की जानकारी एवं दिए हुए क्षेत्र के भौगोलिक ज्ञान के अभाव में सही-सही बिन्दुकित मानचित्र बनाना कठिन होता है।

5. बिन्दुकित मानचित्र की नकल करके उसकी प्रतिलिपि बनाना कठिन होता है।

6. बिन्दु अंकित करने की प्रक्रिया में मानचित्रकार के द्वारा की गई त्रुटियों को मानचित्र में पहचानना कठिन होता है।



(iv) सांख्यिकीय आरेख विधि (Statistical Diagram Method)



       आंकड़ों का प्रदर्शन भिन्न-भिन्न प्रकार के आरेखों (Diagrams) द्वारा भी किया जा सकता है। यह आरेख मानचित्र पर स्थान-विशेष पर खींचकर अध्यारोपित (Superimpose) कर दिए जाते हैं। इस प्रकार आंकड़ों का प्रदर्शन निम्न प्रकार के आरेखों द्वारा किया जाता है:-

(i) रैखिक आरेख (Line Graph)।

(ii) दण्ड या पट्टिका या स्तम्भ आलेख अथवा स्तम्भाकार आरेख (Bar Graph and Columnar Diagrams)।

(iii) मिश्रित अथवा संयुक्त स्तम्भ, दण्ड अथवा पट्टिका आरेख (Compound Bar Graph)।

(iv) द्वि-विस्तारीय मान आयताकार आरेख (Two Dimensional Value Area Rectangular Diagrams)।

(v) वृत्ताकार तथा चक्रारेख (Ring, Pie, Circle or Wheel Diagrams)।

(vi) घनक अथवा इष्टिका पुंज आरेख (Block Pile Diagrams)।

(vii) पिण्ड अथवा गोलाकार आरेख (Spherical Diagrams)।

(viii) चित्रात्मक चित्र (Pictorial Diagrams)।

(ix) तारक आरेख (Star Diagrams)।

3. Intermediate Annual Examination-2023, Geography With Total Solution Paper (इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2023, भूगोल (ऐच्छिक) का सम्पूर्ण हल सहित प्रश्न पत्र)

Intermediate Annual Examination-2023, Geography With Total Solution Paper

(इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2023, भूगोल (ऐच्छिक) का सम्पूर्ण हल सहित प्रश्न पत्र)


इंटरमीडिएट वार्षिक परीक्षा-2023

Theory / सैद्धांतिक

खण्ड – अ / SECTION – A

वस्तुनिष्ठ प्रश्न / Objective Type Questions

प्रश्न संख्या 1 से 70 तक के प्रत्येक प्रश्न के लिए चार विकल्प दिए गए हैं, जिनमें से एक सही है। अपने द्वारा चुने गए सही विकल्प को OMR शीट पर चिह्नित करें। आपको 35 प्रश्नों के उत्तर देने हैं । 35 × 1 = 35

Question Nos. 1 to 70 have four options, out of which only one is correct. You have to mark your selected options on the OMR sheet. Only 35 questions are to be answered. 35 x 135

1. पंपास कहाँ है?

(A) दक्षिण अमेरिका

(B) यूरोप

(C) एशिया

(D) अफ्रीका

Where is Pampas?

(A) South America

(B) Europe

(C) Asia

(D) Africa

उत्तर- (A) दक्षिण अमेरिका

2. बर्मिंघम कहाँ है?

(A) भारत में

(B) ग्रेट ब्रिटेन में

(C) जर्मनी में

(D) आस्ट्रेलिया में

Where is Birmingham?

(A) India

(B) Great Britain

(C) Germany

(D) Australia

उत्तर- (B) ग्रेट ब्रिटेन में

3. कच्चा लोहा में मैंगनीज मिलाकर क्या बनाया जाता है?

(A) इस्पात

(B) सोना

(C) अभ्रक

(D) चाँदी

What is made by mixing manganese in pig iron?

(A) Steel

(B) Gold

(C) Mica

(D) Silver

उत्तर- (A) इस्पात

4. निम्नलिखित में से कौन तृतीयक क्रियाओं से सम्बन्धित है?

(A) परिवहन

(B) संचार

(C) सेवाएँ

(D) इनमें से सभी

Which of the following is associated with tertiary activities?

(A) Transport

(B) Communication

(C) Services

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

5. लाल कॉलर का सम्बन्ध है

(A) प्राथमिक क्रिया से

(B) द्वितीयक क्रिया से

(C) तृतीयक क्रिया से

(D) पंचम क्रिया से

Red collar is associated with

(A) Primary activity

(B) Secondary activity

(C) Tertiary activity

(D) Quinary activity

उत्तर- (A) प्राथमिक क्रिया से

6. विश्व में सर्वप्रथम रेलगाड़ी कब चली?

(A) 1825

(B) 1853

(C) 1925

(D) 1862

When did the first train run is the world?

(A) 1825

(B) 1853

(C) 1925

(D) 1862

उत्तर- (A) 1825

7. विश्व का सघनतम रेलतंत्र पाया जाता है

(A) यूरोप में

(B) एशिया में

(C) अफ्रीका में

(D) उत्तरी अमेरिका में

The world’s most dense rail network is found in

(A) Europe

(B) Asia

(C) Africa

(D) North America

उत्तर- (A) यूरोप में

8. नागपुर योजना सम्बन्धित है

(B) जल परिवहन से

(A) सड़क परिवहन से

(C) वायु परिवहन से

(D) पाइपलाइन से

Nagpur plan is associated with

(A) Road Transport

(B) Water Transport

(C) Air Transport

(D) Pipeline

उत्तर(A) सड़क परिवहन से

9. राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या 1 का विस्तार है

(A) इलाहाबाद से हल्दिया

(B) सदिया से धुबरी

(C) कोट्टापुरम से कोल्लम

(D) इनमें से कोई नहीं

The extension of National Waterways No. 1 is

(A) Allahabad to Haldia

(B) Sadiya to Dhubri

(C) Kottapuram to Kollam

(D) None of these

उत्तर(A) इलाहाबाद से हल्दिया

10. हजीरा-विजयपुर-जगदीशपुर (HVJ) पाइपलाइन का हजीरा अवस्थित है

(A) मध्य प्रदेश में

(B) उत्तर प्रदेश में

(C) गुजरात में

(D) बिहार में

Hazira of Hazira-Vijaipur-Jagdishpur (HVJ) pipeline is in

(A) Madhya Pradesh

(B) Uttar Pradesh

(C) Gujarat

(D) Bihar

उत्तर- (C) गुजरात में

11. कोकण रेलवे का विस्तार किस राज्य में नहीं है?

(A) गुजरात

(B) गोवा

(C) महाराष्ट्र

(D) कर्नाटक

In which state is the extension of Konkan Railway not there?

(A) Gujarat

(B) Goa

(C) Maharashtra

(D) Karnataka

उत्तर- (A) गुजरात

12. भारतीय रेलवे की स्थापना कब हुई?

(A) 1852

(B) 1862

(C) 1853

(D) 1854

When was Indian Railways established?

(A) 1852

(B) 1862

(C 1853

(D) 1854

त्तर- (C) 1853

13. इनसैट का संबंध है

(A) उपग्रह संचार से

(B) वायु परिवहन से

(C) प्रदूषण से

(D) सर्वेक्षण से

INSAT is related to

(A) Satellite communication

(B) Air transportation

(C) Pollution

(D) Survey

उत्तर- (A) उपग्रह संचार से

14. भारत का सबसे बड़ा पत्तन है

(A) मुम्बई

(B) पारादीप

(C) हल्दिया

(D) चेन्नई

India’s biggest port is

(A) Mumbai

(B) Paradip

(C) Haldia

(D) Chennai

उत्तर- (A) मुम्बई

15. भारत में जनगणना का ‘महान विभाजक’ वर्ष है

(A) 1951

(B) 1931

(C) 1921

(D) 1971

Which year is the great divide in Indian census?

(A) 1951

(B) 1931

(C) 1921

(D) 1971

उत्तर(C) 1921

16. परिसंचरण की धमनियाँ सम्बन्धित हैं

(A) सड़क मार्ग से

(B) रेलमार्ग से

(C) जलमार्ग से

(D) इनमें से सभी

The arteries of circulation are related to

(A) Roadway

(B) Railway

(C) Waterway

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

17. मानव भूगोल का संस्थापक किसे कहा जाता है?

(A) रेटजेल

(B) हम्बोल्ट

(C) रिटर

(D) ब्लाश

Who is called the founder of Human Geography?

(A) Ratzel

(B) Humboldt

(C) Ritter

(D) Blache

उत्तर- (A) रेटजेल

18. मात्रात्मक क्रांति सम्बन्धित है

(A) मानव भूगोल से

(B) भौतिक भूगोल से

(C) (A) तथा (B) दोनों से

(D) इनमें से कोई नहीं

Quantitative revolution is associated with

(A) Human geography

(B) Physical geography

(C) Both (A) and (B)

(D) None of these

उत्तर- (A) मानव भूगोल से

19. विश्व में जनसंख्या की दृष्टि से भारत का स्थान कौन-सा है?

(A) पहला

(B) दूसरा

(C) तीसरा

(D) चौथा

What is the rank of India in term of population in the world?

(A) First

(B) Second

(C) Third

(D) Fourth

उत्तर- (B) दूसरा

20. प्रवासी जो नये स्थान पर जाते हैं, कहलाते हैं

(A) आप्रवासी

(B) उत्प्रवासी

(C) (A) तथा (B) दोनों

(D) इनमें से कोई नहीं

Migrants who migrate to a new place are called

(A) Immigrants

(B) Emigrants

(C) Both (A) and (B)

(D) None of these

उत्तर- (C) (A) तथा (B) दोनों

21. विश्व में जनसंख्या का कितने प्रतिशत भाग एशिया में निवास करती है?

(A) 40 प्रतिशत

(B) 60 प्रतिशत

(C) 50 प्रतिशत

(D) 25 प्रतिशत

What percentage of the world’s population lives in Asia?

(A) 40 per cent

(B) 60 per cent

(C) 50 per cent

(D) 25 per cent

उत्तर(B) 60 प्रतिशत

22. विश्व की प्रथम नगरीय बस्ती कौन है ?

(A) पेरिस

(B) लंदन

(C) दिल्ली

(D) मैनचेस्टर

Which is the world’s first urban settlement ? 12

(A) Paris

(C) London

(C) Delhi

(D) Manchester

उत्तर- (B) लंदन

23. बिग इंच सम्बन्धित है

(A) रेलमार्ग से

(B) वायुमार्ग से

(C) पाइपलाइन से

(D) जलमार्ग से

The Big inch is related to

(A) Railway

(B) Airway

(C) Pipeline

(D) Waterway

त्तर- (C) पाइपलाइन से

24. भारत का सबसे कम साक्षर राज्य है

(A) बिहार

(B) झारखंड

(C) राजस्थान

(D) गोवा

India’s least literate state is

(A) Bihar

(B) Jharkhand

(C) Rajasthan

(D) Goa

उत्तर- (A) बिहार

25. निम्न राज्यों में से किसका जनसंख्या घनत्व सबसे कम है ?

(A) अरुणाचल प्रदेश

(B) असम

(C) मिजोरम

(D) सिक्किम

Which of the following states has the lowest density of population?

(A) Arunachal Pradesh

(B) Assam

(C) Mizoram

(D) Sikkim

उत्तर- (A) अरुणाचल प्रदेश

26. भारत में जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर है

(A) 3%

(B) 4%

(C) 2.6%

(D) 1.64%

The annual growth rate of population in India is

(A) 3%

(B) 4%

(C) 2.6%

(D) 1.64%

उत्तर- (D) 1.64%

27. भारत में पुरुष प्रवास का कारण है

(A) शिक्षा

(B) रोजगार

(C) व्यवसाय

(D) इनमें से सभी

The cause of male migration in India is

(A) Education

(B) Employment

(C) Commerce

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

28. 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में साक्षरता है

(A) 63 प्रतिशत

(B) 73 प्रतिशत

(C) 74.04 प्रतिशत

(D) 65 प्रतिशत

According to census 2011 literacy in India is

(A) 63 per cent

(B) 73 per cent

(C) 74.04 per cent

(D) 65 per cent

त्तर- (C) 74.04 प्रतिशत

29. कोलकाता पत्तन किस नदी पर स्थित है?

(A) गंगा

(B) दामोदर

(C) हुगली

(D) यमुना

Kolkata port is situated on which river?

(A) Ganga

(B) Damodar

(C) Hoogly

(D) Yamuna

उत्तर- (C) हुगली

30. निम्नलिखित पत्तनों में से कौन भारत के पूर्वी तट पर है?

(A) मुम्बई

(B) मार्मागाओ

(C) कांडला

(D) पारादीप

Which of the following ports is on the eastern coast of India?

(A) Mumbai

(B) Marmagao

(C) Kandla

(D) Paradip

उत्तर- (D) पारादीप

31. निम्न नदियों में से सर्वाधिक प्रदूषित कौन है?

(A) यमुना

(B) सतलज

(C) गोदावरी

(D) सोन

Which of the following rivers is the most polluted?

(A) Yamuna

(B) Satluj

(C) Godavari

(D) Sone

उत्तर- (A) यमुना

32. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्ल वर्षा का एक कारण है?

(A) जल प्रदूषण

(B) वायु प्रदूषण

(C) ध्वनि प्रदूषण

(D) भू-प्रदूषण

Which of the following is the cause of acid rain?

(A) Water pollution

(B) Air pollution

(C) Noise pollution

(D) Land pollution

उत्तर- (B) वायु प्रदूषण

33. नमामि गंगे कार्यक्रम किस नदी से सम्बन्धित है?

(A) गंगा

(B) यमुना

(C) ब्रह्मपुत्र

(D) नर्मदा

Namami Gange Programme is associated with which river?

(A) Ganga

(B) Yamuna

(C) Brahmaputra

(D) Narmada

उत्तर- (A) गंगा

34. हीराकुड परियोजना है

(A) ओडिशा में

(B) बिहार में

(C) झारखंड में

(D) छत्तीसगढ़ में

Hirakud project is in

(A) Odisha

(C) Jharkhand

(B) Bihar

(D). Chhattisgarh

त्तर- (A) ओडिशा में

35. निम्न में से कौन दक्षिण भारत की नदी है?

(A) गंगा

(C) दामोदर

(B) हुगली

(D) कृष्णा

Which one of the following is the river of South India?

(A) Ganga

(B) Hoogly

(C) Damodar

(D) Krishna

त्तर- (D) कृष्णा

36. विकास का केन्द्र बिन्दु है

(A) संसाधनों तक पहुँच

(B) स्वास्थ्य

(C) शिक्षा

(D) इनमें से सभी

The focal point of development is

(A) Access to resources

(B) Health

(C) Education

(D) All of these

उत्तर(D) इनमें से सभी

37. निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में जनसंख्या वृद्धि सर्वाधिक है?

(A) उत्तर अमेरिका

(B) दक्षिण अमेरिका

(C) एशिया

(D) आस्ट्रेलिया

Which of the following continents has the highest growth of population?

(A) North America

(B) South America

(C) Asia

(D) Australia

उत्तर- (C) एशिया

38. निम्नलिखित देशों में से किसका लिंगानुपात सर्वाधिक है?

(A) जापान

(B) फ्रांस

(C) चीन

(D) लैटविया

Which of the following countries has the highest sex ratio?

(A) Japan

(B) France

(C) China

(D) Latvia

उत्तर- (D) लैटविया

39. मानव विकास सूचकांक को किसने विकसित किया?

(A) डॉ० महबूब-उल-हक

(B) रघुराम राजन

(C) मनमोहन सिंह

(D) इनमें से कोई नहीं

Who developed the Human Development Index?

(A) Dr. Mahbub-ul-Haq

(B) Raghuram Rajan

(C) Manmohan Singh

(D) None of them

उत्तर- (A) डॉ० महबूब-उल-हक

40. निम्न में से कौन प्राथमिक क्रियाकलाप से सम्बन्धित है?

(A) कृषि

(B) वानिकी

(C) आखेट

(D) इनमें से सभी

Which of the following is associated with primary activity?

(A) Agriculture

(B) Forestry

(C) Hunting

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

41. निम्न में से कौन रोपण फसल नहीं है?

(A) कॉफी

(B) गन्ना

(C) गेहूँ

(D) रबड़

Which of the following is not a plantation crop?

(A) Coffee

(B) Sugarcane

(C) Wheat

(D) Rubber

उत्तर- (C) गेहूँ

42. ‘पशुचारण’ किस आर्थिक क्रियाकलाप से सम्बन्धित है?

(A) प्राथमिक क्रियाकलाप

(B) द्वितीयक क्रियाकलाप

(C) तृतीयक क्रियाकलाप

(D) चतुर्थ क्रियाकलाप

‘Pastoralism’ is related to which economic activity?

(A) Primary activity

(B) Secondary activity

(C) Tertiary activity

(D) Quaternary activity

उत्तर- (A) प्राथमिक क्रियाकलाप

43. राउरकेला इस्पात संयंत्र अवस्थित है

(A) झारखण्ड में

(B) राजस्थान में

(C) ओडिशा में

(D) पश्चिम बंगाल में

Rourkela Steel Plant is situated in

(A) Jharkhand

(B) Rajasthan

(C) Odisha

(D) West Bengal

उत्तर(C) ओडिशा में

44. टाटा लौह-इस्पात संयंत्र कहाँ स्थित है?

(A) भिलाई

(B) भद्रावती

(C) जमशेदपुर

(D) दुर्गापुर

Where is Tata Iron and Steel Plant situated?

(A) Bhilai

(B) Bhadravati

(C) Jamshedpur

(D) Durgapur

उत्तर- (C) जमशेदपुर

45. भारत का मैनचेस्टर है

(A) कानपुर

(B) लखनऊ

(C) अहमदाबाद

(D) इंदौर

Manchester of India is

(A) Kanpur

(B) Lucknow

(C) Ahmadabad

(D) Indore

उत्तर-  (C) अहमदाबाद

46. ट्रांबे औद्योगिक केन्द्र किस राज्य में है?

(A) गुजरात

(B) महाराष्ट्र

(C) गोवा

(D) पश्चिम बंगाल

In which state is Trombay industrial centre?

(A) Gujarat

(B) Maharashtra

(C) Goa

(D) West Bengal

उत्तर- (B) महाराष्ट्र

47. नई औद्योगिक नीति लागू की गई

(A) 1981 में

(B) 1990 में

(C) 1991 में

(D) 2001 में

The new industrial policy was implemented in

(A) 1981

(B) 1990

(C) 1991

(D) 2001

उत्तर- (C) 1991 में

48. पर्वतीय क्षेत्र विकास कार्यक्रम की शुरुआत किस पंचवर्षीय योजना में हुई?

(A) तीसरी

(B) चौथी

(C) पाँचवीं

(D) छठी

Hill Area Development Programme has been initiated in which five-year plan?

(A) Third

(B) Fourth

(C) Fifth

(D) Sixth

उत्तर- (C) पाँचवीं

49. नीति आयोग की स्थापना कब हुई?

(A) 1950

(B) 1991

(C) 2014

(D) 2015

When was NITI Aayog established?

(A) 1950

(B) 1991

(C) 2014

(D) 2015

उत्तर- (D) 2015

50. मीटर गेज रेल लाइन की चौड़ाई कितनी होती है?

(A) 1.5 मीटर

(B) 1.6 मीटर

(C) 1.7 मीटर

(D) इनमें से कोई नहीं

What is the width of metre gauge in railfrack?

(A) 1.5 m

(B) 1.6 m

(C) 1.7 m

(D) None of these

उत्तर- (D) इनमें से कोई नहीं

नोट: मीटर गेज में दो पटरियों के बीच की दूरी 1 मीटर ही होती है जबकि ब्रॉडगेज में पटरियों के बीच की दूरी 1.676 मीटर है।

51. विश्व व्यापार संगठन (WTO) की स्थापना कब हुई?

(A) 1948

(B) 1995

(C) 2000

(D) 2005

When was the World Trade Organisation (WTO) established?

(A) 1948

(B) 1995

(C) 2000

(D) 2005

उत्तर- (B) 1995

52. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का मुख्यालय स्थित है

(A) न्यूयार्क में

(B) वियना में

(C) जेनेवा में

(D) नई दिल्ली में

The headquaters of World Trade Organisation is located in

(A) New York

(B) Vienna

(C) Geneva

(D) New Delhi

उत्तर- (C) जेनेवा में

53. अबादान उदाहरण है

(A) तेल पत्तन का

(B) सवारी पत्तन का

(C) पैकेट पत्तन का

(D) नौसेना पत्तन का

Abadan is an example of

(A) Oil port

(B) Passenger port

(C) Packet port

(D) Naval port

उत्तर- (A) तेल पत्तन का

54. निम्नलिखित में से कौन सांस्कृतिक नगर है?

(A) मक्का

(B) जैरूसलम

(C) वाराणसी

(D) इनमें से सभी

Which of the following is a cultural town?

(A) Mecca

(B) Jerusalem

(C) Varanasi

(D) All of these

त्तर- (D) इनमें से सभी

55. सड़क के सहारे किस प्रतिरूप की बस्ती मिलती है?

(A) गोलाकार

(B) रेखीय

(C) आयताकार

(D) सीढ़ीनुमा

Which pattern of settlement is found along a road?

(A) Circular

(B) Linear

(C) Rectangular

(D) Terraced

उत्तर- (B) रेखीय

56. मेगालोपोलिस का अर्थ होता है

(A) मिलियन सिटी

(B) सन्नगर

(C) मेगा सिटी

(D) विशाल नगर

Megalopolis means

(A) Million city

(B) Conurbation

(C) Mega city

(D) Great city

उत्तर- (C) मेगा सिटी

57. निम्न में से कौन खनन नगर नहीं है?

(A) झरिया

(B) रानीगंज

(C) खेतड़ी

(D) पटना

Which of the following is not a mining town?

(A) Jharia

(B) Raniganj

(C) Khetri

(D) Patna

उत्तर- (D) पटना

58. सिंगरेनी है

(A) राजधानी नगर

(B) खनन नगर

(C) पर्यटक नगर

(D) इनमें से कोई नहीं

Singareni is

(A) Capital town

(B) Mining town

(C) Tourist town

(D) None of these

उत्तर- (B) खनन नगर

59. रबी फसल की बोआई कब होती है?

(A) अक्टूबर-नवम्बर

(B) मार्च-अप्रैल

(C) जून-जुलाई

(D) इनमें से कोई नहीं

When is Rabi crop sown?

(A) October-November

(B) March-April

(C) June-July

(D) None of these

त्तर- (A) अक्टूबर-नवम्बर

60. गेहूँ फसल उदाहरण है

(A) रबी का

(B) खरीफ का

(C) जायद का

(D) इनमें से सभी

Wheat crop is an example of

(A) Rabi

(B) Kharif

(C) Zaid

(D) All of these

उत्तर- (A) रबी का

61. चावल उत्पादन में अग्रणी राज्य है

(A) केरल

(B) गोवा

(C) महाराष्ट्र

(D) पश्चिम बंगाल

The leading state in rice production is

(A) Kerala

(B) Goa

(C) Maharashtra

(D) West Bengal

उत्तर- (D) पश्चिम बंगाल

62. कपास उत्पादन में अग्रणी राज्य है

(A) गुजरात

(B) झारखंड

(C) बिहार

(D) ओडिशा

The leading state in cotton production is

(A) Gujarat

(B) Jharkhand

(C) Bihar

(D) Odisha

उत्तर- (A) गुजरात

नोट:  गुजरात कपास का सबसे बड़ा उत्पादक है।

63. निम्न में से किसमें टैनिन पाई जाती है?

(A) चाय

(B) कॉफी

(C) गन्ना

(D) कपास

Tannin is found in which of the following?

(A) Tea

(B) Coffee

(C) Sugarcane

(D) Cotton

उत्तर- (A) चाय, (B) कॉफी

64. पृथ्वी पर कुल जल का कितना प्रतिशत भाग अलवणीय जल है?

(A) 2 प्रतिशत

(B) 3 प्रतिशत

(C) 4 प्रतिशत

(D) 1 प्रतिशत

What percentage of total water on the earth is fresh water P

(A) 2 per cent

(B) 3 per cent

(C) 4 per cent

(D) 1 per cent

त्तर(B) 3 प्रतिशत

65. निम्न में से कौन धात्विक खनिज है?

(A) लोहा

(B) मैंगनीज

(C) ताँबा

(D) इनमें से सभी

Which of the following is a metallic mineral?

(A) Iron

(B) Manganese

(C) Copper

(D) All of these

उत्तर- (D) इनमें से सभी

66. बैलाडीला प्रसिद्ध है

(A) लौह अयस्क के लिए

(B) कोयला के लिए

(C) ताँबा के लिए

(D) अभ्रक के लिए

Bailadila is famous for

(A) Iron ore

(B) Coal

(C) Copper

(D) Mica

त्तर- (A) लौह अयस्क के लिए

67. गुरुमहिसानी खान किस खनिज से सम्बन्धित है?

(A) लौह अयस्क

(B) कोयला

(C) बॉक्साइट

(D) ताँबा

Gurumahisani mine is associated with which mineral?

(A) Iron ore

(B) Coal

(C) Bauxite

(D) Copper

उत्तर-  (A) लौह अयस्क

68. बॉक्साइट उत्पादन में अग्रणी राज्य है

(A) ओडिशा

(B) गोवा

(C) असम

(D) कर्नाटक

The leading state in Bauxite production is

(A) Odisha

(B) Goa

(C) Assam

(D) Karnataka

उत्तर- (A) ओडिशा

69. निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा का नवीकरणीय स्रोत है?

(A) कोयला

(B) पेट्रोलियम

(C) प्राकृतिक गैस

(D) सौर ऊर्जा

Which of the following is a renewable source of energy ?

(A) Coal

(B) Petroleum

(C) Natural Gas

(D) Solar Energy

उत्तर- (D) सौर ऊर्जा

70. कलपक्कम किस राज्य में है?

(A) तमिलनाडु

(B) केरल

(C) गुजरात

(D) कर्नाटक

Kalpakkam is in which state?

(A) Tamil Nadu

(B) Kerala

(C) Gujarat

(D) Karnataka

उत्तर- (A) तमिलनाडु

खंड- ब /Section- B 

Short Answer Type 2uestions

 लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तर

प्रश्न संख्या 1 से 20 लघु उत्तरीय हैं । किन्हीं 10 प्रश्नों के उत्तर दें। प्रत्येक के लिए 2 अंक निर्धारित हैं।

10 x 2 = 20

Question Nos. 1 to 20 are Short Answer Type. Answer any 10 questions. Each question carries 2 marks.

10 x 2 = 20

1 भूमध्यसागरीय कृषि के महत्व को लिखिए।

Write the significance of mediterranean agriculture.

उत्तर-  भूमध्यसागरीय कृषि के महत्व- भूमध्यसागरीय कृषि क्षेत्र को ‘विश्व के बागानों’ की भूमि के नाम से पुरे विश्व में जाना जाता है। यह क्षेत्र रसीले फलों के लिये विश्व विख्यात है जिसमें संतरा, नींबू, सीट्रोंन, अंगूर, जैतून, अंजीर इत्यादि प्रमुख रूप से पाए जाने वाले फल हैं। इन्हीं क्षेत्रों से सिट्रस फलों के कुल वैश्विक निर्यात का लगभग 70 प्रतिशत भाग निर्यात होता है।

2. ऊर्जा के दो अनवीकरणीय स्रोतों का उल्लेख कीजिए।

Mention two non-renewable sources of energy.

उत्तर- ऊर्जा के दो अनवीकरणीय स्रोत- कोयला, पेट्रोलियम।

3. आयु संरचना का क्या महत्व है?

What is the importance of age structure?

उत्तर- आयु संरचना के द्वारा किसी भी देश में निवास करने वाले  विभिन्न आयु वर्ग के लोगों की संख्या को प्रदर्शित किया जाता है। जनसंख्या संघटन का यह एक महत्वपूर्ण सूचक है, क्योंकि 15 से 59 आयु वर्ग के बीच जनसंख्या का बड़ा आकार एक विशाल कार्यशील जनसंख्या को इंगित करता है। 

4. आर्थिक भूगोल के दो उप-क्षेत्रों के नाम लिखिए।

Name two sub-fields of economic geography.

उत्तर- आर्थिक भूगोल के दो उप-क्षेत्रों के नाम- संसाधन भूगोल, कृषि भूगोल, उद्योग भूगोल, पर्यटन भूगोल, इत्यादि।

5. शुष्क कृषि क्या है?

What is dry farming?

उत्तर- शुष्क कृषि- वैसा क्षेत्र जहाँ औसत वार्षिक वर्षा 75 सेमी० से कम होती है, वहाँ की जाने वाली खेती को शुष्क कृषि कहा जाता है। यह कृषि प्राय: शुष्क एवं अर्द्ध-शुष्क भाग में की जाती है। पंजाब से लेकर तमिलनाडु तक शुष्क कृषि की एक सतत् पेटी है, जिसमें पंजाब, हरियाणा, दक्षिणी-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, पश्चिमी मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र के आंतरिक भाग, कर्नाटक के पठारी भाग, तेलंगाना व रायलसीमा तथा तटीय भाग को छोड़कर पूरा तमिलनाडु इसमें शामिल है।

6. प्रवास के दो प्रतिकर्ष कारकों का उल्लेख कीजिए।

Mention two push factors of migration.

उत्तर- प्रवास के प्रतिकर्ष- वे सभी कारक जो किसी स्थान पर जनसंख्या को बसने के लिए आकर्षित नहीं करता हो उसे प्रवास के प्रतिकर्ष कारक कहते है। जैसे – बेरोजगारी, रहन-सहन की निम्न दशाएं, राजनीतिक उपद्रव, प्रतिकूल जलवायु, प्राकृतिक विपदाएँ, महामारीयाँ तथा सामाजिक आर्थिक पिछड़ेपन इत्यादि।

7. उत्तर भारत के दो लौह इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम लिखिए।

Name two centres of iron and steel industry of north India.

उत्तर- उत्तर भारत के दो लौह इस्पात उद्योग केन्द्रों के नाम-

(i) कुल्टी (आसनसोल, पश्चिम बंगाल) में बंगाल आयरन वर्क्स (BIW) 

(ii) झारखण्ड में अवस्थित बोकारो स्टील प्लांट 

8. भू-निम्नीकरण के दो कारणों का उल्लेख कीजिए।

Mention two causes of land degradation.

उत्तर- भू-निम्नीकरण के दो कारण-

(i) मानवीय कारण- वनोन्मूलन, अति पशुचारण, रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग।

(ii) प्राकृतिक कारण- वर्षा दोहन, भूस्खलन और बाढ़।

9. प्रदूषण तथा प्रदूषकों में क्या अन्तर है?

What is the difference between pollution and pollutants?

उत्तर- प्रदूषण व प्रदूषक में अन्तर- पर्यावरण की प्राकतिक संरचना एवं सन्तुलन में उत्पन्न अवांछनीय परिवर्तन को प्रदूषण कहा जाता हैं। दूसरी ओर प्रदूषक वे अनुपयोगी पदार्थ हैं जो अनुचित मात्रा में उपस्थित होकर प्रदूषण के लिए उत्तरदायी होते है, वे प्रदूषक कहलाते हैं।

10. भारत के दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम लिखिए।

Name two international airports of India.

उत्तर- भारत के दो अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के नाम- 

(i) इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा- दिल्ली

(ii) छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा- मुंबई

11. जनसंख्या संघटन क्या है?

What is pupulation composition?

उत्तर- किसी राज्य अथवा देश में निवास करने वाली कुल जनसंख्या में स्त्रियों एवं पुरुषों की संख्या, लिंगानुपात, आयु-वर्ग संरचना, व्यवसाय, शिक्षा का स्तर, जीवन-प्रत्याशा के जनांकिकीय विशेषताओं को जनसंख्या संघटन कहते हैं।

12. निश्चयवाद और संभववाद के बीच अन्तर स्पष्ट कीजिए।

Differentiate between determinism and possibilism.

उत्तर-निश्चयवाद और संभववाद के बीच अन्तर- मानव और प्रकृति के बीच में सदियों से संतुलन का संबंध रहा है। लेकिन भूगोल में कुछ ऐसे विचारधारा विकसित हुए हैं जिसके तहत कुछ विद्वान प्रकृति को श्रेष्ठ मानते हैं जबकि कुछ विद्वान मानव को श्रेष्ठ मानते हैं। वैसी विचारधारा जिसमें प्रकृति को श्रेष्ठ माना गया है वैसी विचारधारा को नियतिवाद से संबोधित करते हैं और जिसमें मानव को श्रेष्ठ माना गया है वैसी विचारधारा को संभववाद से संबोधित करते हैं।

13. मेगा सिटी क्या है?

What is mega city?

उत्तर- मेगा सिटी – वैसे शहर जिसकी आबादी 10 मिलियन से अधिक हैं। मेगासिटी की विशेषताओं में जनसंख्या, बड़े सतह क्षेत्र और व्यापक परिवहन प्रणालियाँ शामिल हैं। मेगासिटी का एक अच्छा उदाहरण जापान में टोक्यो है, जिसकी महानगरीय आबादी लगभग 32 मिलियन है।

14. वर्षा जल संग्रहण तकनीक क्या है?

What is rainwater harvesting technique?

उत्तर- सतह से वर्षा जल को इकट्‌ठा करना बहुत ही असरदार और पारंपरिक तकनीक है। इससे छोटे तालाबों, भूमिगत टैंकों, बाँध आदि के इस्तेमाल से जल संरक्षण किया जा सकता है। भूमिगत पुनर्भरण तकनीक जल संग्रहण का एक नया तरीका है। इसे कुआँ खोदकर गड्‌ढा, खाई, हैंडपम्प और कुएँ को दोबारा चार्ज करके किया जा सकता है।

15. भारत के चार ताँबा उत्पादक केन्द्रों का उल्लेख कीजिए।

Mention four copper producing centres of India.

उत्तर- भारत के चार ताँबा उत्पादक केन्द्र-

(i) बालाघाट (मध्य प्रदेश)

(ii) खेतड़ी (राजस्थान)

(iii) सिंहभूमि (झारखण्ड)

(iv) हजारीबाग (झारखण्ड)

16. भारत के चार सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम लिखिए।

Name four cotton textile industry centres of India.

उत्तर- भारत के चार सूती वस्त्र उद्योग केन्द्रों के नाम-

(i) अहमदाबाद, 

(ii) मुंबई, 

(iii) शोलापुर, 

(iv) नागपुर और इंदौर-उज्जैन हैं।

17. मानव विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर- मानव में होने वाले गुणात्मक व धनात्मक बढ़ोतरी को ही मानव विकास कहा जाता है। मानव विकास स्वास्थ्य, भौतिक पर्यावरण से लेकर आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्वतंत्रता तक सभी प्रकार के मानव विकल्पों को सम्मिलित करते हुए लोगों के विकल्पों में विस्तार और उनके शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं तथा सशक्तिकरण के अवसरों में वृद्धि की प्रक्रिया है।

18. ऋणात्मक व्यापार संतुलन क्या है?

उत्तर- यदि किसी देश का आयात मूल्य, उसके निर्यात मूल्य से अधिक होता हो तो उस देश का व्यापार संतुलन ऋणात्मक अर्थात् प्रतिकूल कहलाता है। ऋणात्मक व्यापार संतुलन से देश की अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ता है और यह वित्तीय संचय की समाप्ति को अभिप्रेरित करता है।

19. मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।

उत्तर- मानव भूगोल, मानव विकास के विभिन्न चरणों में उस पर पड़ने वाले भौगोलिक प्रभाव का आदर्श अध्ययन है।  अर्थात मानव भूगोल, मानव और उसके भौतिक वातावरण के संबंधों का संपूर्ण अध्ययन करता है।

     दूसरे शब्दों में मानव भूगोल वह विज्ञान है जिसमें मनुष्य तथा वातावरण के पारस्परिक संबंधों का क्षेत्रीय आधार पर अध्ययन किया जाता हैं।

20. अशोधित मृत्यु दर की गणना कैसे की जाती है?

उत्तर- अशोधित मृत्यु दर की गणना निम्नलिखित सूत्र से ज्ञात की जाती है-

अशोधित मृत्यु दर= किसी वर्ष विशेष में मृतकों की संख्या ⁄ उस वर्ष के मध्य में अनुमानित जनसंख्या ×1000



दीर्घ उत्तरीय प्रश्न 

Long Answer Type Questions

प्रश्न संख्या 21 से 26 दीर्घ उत्तरीय हैं। किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दें । प्रत्येक के लिए 5 अंक निर्धारित हैं। 3 x 5 = 15

Question Nos. 21 to 26 are Long Answer Type. Answer any three questions. Each question carries 5 marks. 3 x 5-15

21. जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।

Discuss the three stages of demographic transition.

उत्तर-  जनांकिकीय संक्रमण सिद्धांत का प्रतिपादन थॉम्पसन एवं नॉटेस्टीन द्वारा किया गया था। इस सिद्धांत का उपयोग किसी क्षेत्र की जनसंख्या के वर्णन तथा भविष्य की जनसंख्या के पूर्वानुमान के लिए किया जा सकता है। इस सिद्धांत से हमें पता चलता है कि जैसे ही ग्रामीण समाज खेतिहर और अशिक्षित अवस्था से उन्नति करके नगरीय औद्योगिक और साक्षर बनता है तो किसी प्रदेश की जनसंख्या उच्च जन्म और निम्न जन्म व निम्न मृत्यु में परिवर्तित होती है। यह परिवर्तन मुख्यतः तीन अवस्थाओं में होते हैं जिन्हें सामूहिक रूप से जनांकिकीय चक्र के रूप में जाना जाता है।:-

(क) प्रथम अवस्था- 

        उच्च जन्म दर तथा उच्च मृत्यु दर इस अवस्था की प्रमुख विशेषता है। जनसंख्या वृद्धि धीमी होती है और अधिकांश लोग खेती में कार्यरत होते हैं। यहाँ बड़े परिवारों को परिसंपत्ति माना जाता है। जीवन-प्रत्याशा निम्न होती है। अधिकांश लोग अशिक्षित होते हैं और उनके प्रौद्योगिकी स्तर निम्न होते हैं। 200 वर्ष पूर्व विश्व के लगभग सभी देश इसी अवस्था में थे। जैसे- बांग्लादेश, वर्षा वानों के आदिवासी इत्यादि।

(ख) द्वितीय अवस्था-

      इस अवस्था में जन्म दर उच्च रहती है परंतु मृत्यु दर में तेजी से गिरावट आती है। स्वास्थ्य संबंधी दशाओं व स्वच्छता में सुधार के साथ मृत्यु दर में कमी आती है। इस अंतर के परिणामस्वरूप जनसंख्या में विस्फोटक वृद्धि होती है। जैसे- पेरू, श्रीलंका, केन्या आदि देश इस अवस्था से गुजर रहे हैं।

(ग) तृतीय अवस्था-

        इस अवस्था में जन्म दर में तेजी से कमी आती है साथ ही मृत्यु दर भी धीरे-धीरे घटती जाती है। इस प्रकार इस अवस्था में जनसंख्या वृद्धि दर या तो स्थिर हो जाती है या मन्द गति से बढ़ती है। जनसंख्या नगरीय और शिक्षित हो जाती है तथा उसके पास तकनीकी ज्ञान होता है। ऐसी जनसंख्या विचार पूर्वक परिवार के आकार को नियंत्रित करती है। जैसे- जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, इत्यादि।

22. रोपण कृषि की विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

Describe the characteristics of plantation agriculture.

उत्तर- रोपण कृषि के मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित है-

◆ इसमें कृषि क्षेत्र का आकार बहुत विस्तृत होता है।

◆ इसमें अधिक पूँजी निवेश की आवश्यकता होती है।

◆ इसमें उच्च प्रबंधन एवं तकनीकी आधार एवं वैज्ञानिक विधियों का प्रयोग किया जाता है।

◆ यह एक फसली कृषि है जिसमें किसी एक फसल के उत्पादन पर ही सकेंद्रण किया जाता है।

◆ इसमें सस्ते श्रमिक एवं यातायात की सुविधा भी आसानी से उपलब्ध हो जाती है।       

       यूरोपीय लोगों ने विश्व के अनेक भागों का औपनिवेशीकरण किया तथा कृषि के कुछ अन्य रूपों की शुरुआत की जैसे रोप कृषि, जो कि वृहद स्तरीय लाभोन्मुख उत्पादन प्रणाली है। यूरोपीय उपनिवेशों ने अपने अधीन उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में चाय, कॉफी, कोको, रबड़, कपास, गन्ना, केले एवं अन्नानास की पौधे लगाई।

23. कार्यों के आधार पर नगरों को वर्गीकृत कीजिए।

Classify cities on the basis of functions.

उत्तर- वह अधिवासीय क्षेत्र जहाँ मानव सामूहिक रूप से अधिवास करता है, उस स्थान को बस्ती से सम्बोधित करते हैं। अगर किसी भी बस्ती की 2/3 जनसंख्या द्वितीयक तथा तृतीयक कार्यों में संलग्न हो तो वैसी बस्ती को नगरीय बस्ती से सम्बोधित करते हैं। द्वितीयक एवं तृतीयक कार्य भी कई प्रकार होते हैं। उन कार्यों के आधार पर नगरों का वर्गीकरण करना एक जटिल कार्य है। 

      कार्यों के आधार पर भारतीय नगरों को सात वर्गों में बाँटा जा सकता  है। जैसे:-

(i) उत्पादन नगर- वैसे नगर जहाँ पर मुख्य रूप से उत्पादन का कार्य किया जाता है। जैसे- बरौनी, झरिया, जमशेदपुर, रावतभाटा।

(ii) व्यापारिक नगर- ऐसे नगर जहाँ पर व्यापारिक कार्य प्रमुख रूप से किये जाते हैं। जैसे- मुम्बई।

(iii) राजनीतिक या प्रशानिक नगर- वैसे नगर जहाँ पर मुख रूप से राजनीतिक एवं प्रशासनिक कार्य किये जाते हैं। जैसे- भारत के सभी राजधानी नगर।

(iv) सांस्कृतिक नगर- प्राचीन काल से ही भारत में मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर इत्यादि के इर्द-गिर्द सांस्कृतिक नगरों का विकास होता रहा है। जैसे- प्रयागराज, अयोध्या, नालंदा।

(v) मनोरंजनात्मक नगर- वैसे  नगर जहाँ प्राथमिक रूप से मनोरंजन के कार्य सम्पादित किये जाते हैं जो कई प्रकार के होते हैं। जैसे- मुम्बई का जुहू बिच, दार्जलिंग, माऊण्ट आबू।

(vi) परिवहन नगर-  ऐसे नगरों में परिवहन का कार्य मुख्य रूप से किया जाता है। जैसे:- डायमण्ड हार्बर, काल्का, पोर्ट द्वार (उतराखण्ड)

(vii) मिश्रित नगर- ऐसे नगरों में कई कार्य संपादित किये जाते हैं। कार्यों के आधार पर उन नगरों का पहचान कठिन हैं। वैसे नगर को मिश्रित नगर कहते है। उदा०- भारत के सभी महानगर इसके सर्वोत्तम उदाहरण है।

24. ध्वनि प्रदूषण पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

Write a short note on noise pollution.

उत्तर- ध्वनि प्रदूषण मानव जीवन के लिए एक गंभीर समस्या पैदा कर रही है। यह मानव शांतिपूर्ण जीवन को काफी प्रभावित करता है। यह मानसिक तनाव, नींद की कमी, सुनने की क्षमता का गिरना और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बनता जा रहा है। सड़कों पर यातायात, शोर्ट्रैक्टर, मशीनरी, औद्योगिक क्षेत्र और जनसंख्या के बढ़ने के कारण ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ता ही जा रहा है। 

    हमें ध्यान देना चाहिए कि ध्वनि प्रदूषण कम करने के लिए हमें सभी संबंधित नियमों का पालन करना चाहिए। इसके अलावा, हमें शोर कम करने के लिए शोर के स्रोतों को संगठित करने और सामुदायिक जागरूकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। हमें अपनी व्यक्तिगत संगठन और समुदाय के साथ मिलकर ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ लड़ना चाहिए। सुरक्षित, शांत और स्वस्थ माहौल के लिए हमारे लिए आवाज़ का संरक्षण महत्वपूर्ण है। 

25. अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में स्वेज नहर मार्ग के महत्व का वर्णन कीजिए।

Describe the importance of Suez Canal route in international trade.

उत्तर- अंतर्राष्ट्रीय नहर विश्व की सबसे बड़ी एवं महत्वपूर्ण जहाजी नहर है जो भूमध्यसागर को लाल सागर होते हुए अरब सागर से जोड़ने का काम करती है। 160 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण कार्य 1869 में पूरा हुआ। यहाँ से प्रतिदिन लगभग 100 जहाज गुजरते है। यहाँ से जहाजों को गुजरने से 10 से 12 घण्टे का समय लगता है। मिस्र सरकार के नियंत्रण वाले इस नहर के भूमध्यसागर तट पर पोर्ट सईद और लाल सागर तट पर स्वेज बंदरगाह की स्थिति है।

    स्वेज नहर व्यापारिक दृष्टि से यूरोप के विकसित एवं एशिया के विकासशील देशों के मध्य एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करती है। वास्तव में यह नहर विश्व के मध्य से होकर गुजरती है। परिणामस्वरूप इससे यूरोपीय देश, पूर्वी अफ्रीकी देश, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्वी एशियाई देश लाभान्वित है। अंतर्राष्ट्रीय व्यापार का लगभग 20% भाग इस नहर मार्ग से संपादित होता है। यही नहीं, इस नहर के बन जाने से कई देशों के मध्य दूरी में काफी कमी आई है। इस नहर मार्ग से यूरोप को पेट्रोलियम, चाय, कपास, रबड़, टीन, खजूर, रेशम सागौन, मसाला, तंबाकू, ऊन, गेहूँ, मांस तथा फल और एशिया को वस्त्र, रसायन, मशीनरी, कागज, मोटरकार तथा उर्वरक की आपूर्ति होती है।

26. भारत का मानचित्र बनाइए और निम्नलिखित को प्रदर्शित कीजिए:

(A) भिलाई

(B) पानीपत

(C) लखनऊ

(D) हरिद्वार

(E) सोन नदी।

Draw a map of India and show the following:

(A) Bhilai

(B) Panipat

(C) Lucknow

(D) Haridwar

(E) Son River.

उत्तर-



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बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर

(खण्ड 1: मानव भूगोल के मूल सिद्धांत)

Part 1: Principal of Human Geography
बिहा बोर्ड कक्षा 12वीं के भूगोल का सम्पूर्ण प्रश्नोत्तर
(खण्ड 2: भारत- लोग और अर्थव्यवस्था)
Part 2: India- People and Economy

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22. Primary, Secondary, Tertiary and Quaternary Economic Activities of Humans (मानव के प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक व्यवसाय)

Primary, Secondary, Tertiary and Quaternary Economic Activities of Humans

(मानव के प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक आर्थिक गतिविधियाँ)



Q. मानव के प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक एवं चतुर्थक आर्थिक गतिविधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- मानव अपनी मूलभूत और उच्चतर आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाएँ करता है। इन क्रियाओं द्वारा मानव की आर्थिक प्रगति होती है। मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है। चूंकि पृथ्वी सतह पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण में क्षेत्रीय विभिन्नता विद्यमान है, अतः मानव की आर्थिक क्रियाओं में भी क्षेत्रीय विभिन्नता पाई जाती है।

     उदाहरण के लिए वनों में मानव एकत्रीकरण या संग्रहण, आखेट एवं लकड़ी काटने जैसे आर्थिक क्रियाएँ सम्पन्न करता है तो घास के मैदानों में पशुचारण, उपजाऊ समतल मैदानी भागों में कृषि, खनिजों की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में खनन, जल की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में मत्स्याखेट जैसी आर्थिक क्रियाएँ करता है। साथ ही अनुकूल अवस्थिति वाले क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योगों, परिवहन, व्यापार एवं सेवाओं से सम्बन्धित आर्थिक गतिविधियों में भी संलग्न रहता है।

     मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं या गतिविधियों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है, यद्यपि ये चारों वर्ग एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं:

1. प्राथमिक व्यवसाय (Primary Occupation):-

       प्राथमिक व्यवसाय पूर्णतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं। प्राथमिक व्यवसायों के संचालन हेतु अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होती है। वनों से संग्रहण, आखेट, लकड़ी काटना घास के मैदानों में पशु चराना, पशुओं से दूध, मांस, खालें, आदि प्राप्त करना, समुद्रों, नदियों एवं झीलों से मछली पकड़ना, कृषि तथा खानों से खनिज निकालना, आदि प्रमुख प्राथमिक व्यवसाय हैं।

     विश्व के विकासशील देशों में कार्यशील जनसंख्या का अधिकांश भाग प्राथमिक व्यवसायों में लगा हुआ है और विकसित देशों में कार्यरत जनसंख्या का अधिकांश भाग तृतीयक एवं चतुर्थक व्यवसायों में कार्यरत है।

  भारत में 60 प्रतिशत, चीन में 50 प्रतिशत, इथोपिया में 80 प्रतिशत, नाइजीरिया में 70 प्रतिशत जनसंख्या प्राथमिक व्यवसायों में लगी हुई है जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में 8 प्रतिशत, ग्रेट ब्रिटेन में 1 प्रतिशत, जापान में 5 प्रतिशत जनसंख्या ही प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न है।

2. द्वितीयक व्यवसाय (Secondary Occupation):-

    द्वितीयक या गौण व्यवसाय में वे सभी प्रकार के विनिर्माण उद्योग सम्मिलित किए जाते हैं जो प्राथमिक व्यवसायों जैसे- कृषि, खनन, पशुपालन, मत्स्य संग्रहण, लकड़ी काटना, आदि से प्राप्त उत्पादों को कच्चे माल के रूप में प्रयुक्त कर मशीनी प्रक्रिया द्वारा उसे तैयार माल में बदलते हैं। इस प्रक्रिया द्वारा गौण व्यवसाय कच्चे माल के स्वरूप में परिवर्तन करते हैं, उसके मूल्य में वृद्धि करते हैं और उसकी उपयोगिता को बढ़ा देते हैं।

     उदाहरण के लिए कृषि से प्राप्त गन्ना गौण व्यवसाय के लिए कच्चा माल है, मशीनी प्रक्रिया द्वारा गन्ने से चीनी बनाई जाती है। इस प्रकार गन्ने का स्वरूप भी परिवर्तित हो जाता है, गन्ने से शक्कर बनने पर उसके मूल्य और उपयोगिता में वृद्धि हो जाती है।

     इसी प्रकार लौह अयस्क का खनन प्राथमिक व्यवसाय है, लेकिन लोहा-इस्पात का निर्माण गौण व्यवसाय है। विभिन्न प्रकार के उद्योग एक-दूसरे के निकट स्थापित हो जाते हैं, क्योंकि एक उद्योग का तैयार माल दूसरे उद्योग के लिए कच्चा माल हो सकता है। उदाहरण के लिए लौह इस्पात उद्योग अनेक प्रकार के इंजीनियरिंग उद्योगों को विकसित कर सकता है।

     उद्योगों का विकास कच्चे माल, शक्ति, श्रमिक, पूंजी और तैयार माल के लिए बाजार की उपलब्धि पर निर्भर है। इन कारकों के अलावा परिवहन और संचार की सुविधाएं, कच्चे माल और शक्ति का लागत मूल्य, श्रमिकों का वेतन तथा तैयार माल का लागत मूल्य भी उद्योगों की स्थापना और विकास में महत्वपूर्ण आर्थिक कारक है।

     किसी देश में गौण व्यवसायों में कितनी विविधता है तथा उन व्यवसायों में कितने लोग काम करते हैं, यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश में औद्योगिक विकास कितना हुआ है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, जर्मनी, फ्रांस, इटली, ग्रेट ब्रिटेन, जापान, कनाडा, आस्ट्रेलिया, आदि देशों में प्राथमिक व्यवसायों की तुलना में गौण व्यवसायों में अधिक लोग काम करते हैं।

     उद्योगों में कार्यरत लोगों की संख्या, उपयोग में आने वाली यान्त्रिक शक्ति तथा निर्मित उत्पादों के मूल्य के आधार पर उद्योग तीन प्रकार के होते हैं यथा- वृहत् उद्योग, लघु उद्योग और कुटीर उद्योग।

     दस्तकार स्थानीय पदार्थों का उपयोग करके दस्तकारी की वस्तुएं बनाते हैं। हथकरघा, बुनकर, टोकरी बनाने वाले, कालीन बनाने वाले, आदि गौण व्यवसायों में लगे हैं। इन गौण व्यवसायों को कुटीर उद्योग कहते हैं। कुटीर उद्योग की प्रत्येक इकाई में लोग कम संख्या में काम करते हैं और इनमें यांत्रिक शक्ति का प्रयोग नहीं होता है।

    लघु उद्योग यांत्रिक शक्ति का उपयोग करते हैं। ये उद्योग बड़े उद्योगों के लिए पुर्जे भी बनाने हैं। इलेक्ट्रोनिक वस्तुएं बनाने वाली औद्योगिक इकाइयां जैसे- रेडियो, टी. वी. सेट, प्लास्टिक की वस्तुएं, सामान्यतः लघु उद्योगों की श्रेणी में आते हैं।

Tertiary and Quaternary Economic

प्लास्टिक की वस्तुएं

     वृहत् उद्योगों में सैकड़ों लोग काम करते हैं और इनमें करोड़ों रुपए की पूंजी लगी हुई होती है। इनमें से कुछ उद्योग जैसे मोटर कार उद्योग या दुपहिया वाहन उद्योग अधिक उत्पादन के लिए एसेम्बली लाइन तकनीक का उपयोग करते हैं। एसेम्बली लाइन में अलग-अलग स्थानों पर कच्चे पदार्थ तथा विविध पुर्जों को जोड़ने का कार्य होता है।

     एसेम्बली लाइन पर जैसे-जैसे निर्माणाधीन वस्तु आगे सरकती है, प्रत्येक श्रमिक कोई निश्चित काम करता है, फिर दूसरी निर्माणाधीन वस्तु में वह वही काम करता है। इस तरह अन्त तक पहुंचते-पहुंचते वस्तु का निर्माण पूरा हो जाता है और इस प्रकार एसेम्बली लाइन में से निर्मित वस्तु बाहर निकलती है। इस विधि में प्रत्येक श्रमिक किसी एक काम में विशेष दक्ष होता है, जिसे वह बार-बार दोहराता है। निर्माण उद्योगों के परिणामस्वरूप प्राथमिक व्यवसायों जैसे- कृषि, खनन, मत्स्य ग्रहण, आदि में भी मशीनों का खूब प्रयोग होने लगा है।

3. तृतीयक व्यवसाय (Tertiary Occupation):-

      तृतीयक व्यवसायों में समाज को दी जाने वाली व्यक्तिगत तथा व्यावसायिक सेवाएं सम्मिलित हैं। इस व्यवसाय को सेवा श्रेणी भी कहा जाता है। सामान्यतः विकास की प्रक्रिया का एक निश्चित क्रम होता है। प्रारम्भ में प्राथमिक व्यवसायों की प्रधानता होती है। इसके बाद गौण व्यवसायों का महत्व बढ़ता है तथा अन्त में तृतीयक और चतुर्थक व्यवसाय महत्वपूर्ण बन जाते हैं।

    तृतीयक व्यवसायों के अन्तर्गत समाज को प्रदान की जाने वाली सेवाओं में रेल, सडक, जहाज, वायुयान, सेवाएं, डाक-तार सेवाएं, दूरदर्शन, रेडियो, फिल्म, साहित्य, कानूनी सेवाएं, जनसम्पर्क और परामर्श, विज्ञापन, वित्त, बीमा, थोक और फुटकर व्यापार, मरम्मत के कार्य जैसी सेवाएं, स्थानीय, राज्यीय, राष्ट्रीय प्रशासन, पुलिस, सेना और अन्य जन सेवाएं तथा गैर सरकारी संगठनों द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं उल्लेखनीय हैं।

     उद्योगों के विकास के साथ-साथ नगरीय जनसंख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। परिणामस्वरूप विभिन्न प्रकार की सेवाओं की मांग में भी वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में नगरीय क्षेत्रों में अपेक्षाकृत अधिक संख्या में लोग तृतीयक व्यवसायों में संलग्न हैं।

     विकासशील देशों की तुलना में विकसित देशों में कार्यरत जनसंख्या का अधिकांश भाग सेवाओं में लगा हुआ है। उदाहरण के लिए जापान में 70 प्रतिशत, आस्ट्रेलिया में 73 प्रतिशत, कनाडा में 74 प्रतिशत, जर्मनी में 64 प्रतिशत कार्यशील लोग तृतीयक व्यवसायों में संलग्न हैं जबकि भारत में 23 प्रतिशत और चीन में 28 प्रतिशत कार्यशील जनसंख्या ही तृतीयक व्यवसायों में लगी हुई है।

    विकसित देशों में प्रति व्यक्ति आय के बढ़ने से विभिन्न प्रकार की सेवाओं विशेषकर मनोरंजन, परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। प्राथमिक एवं गौण व्यवसायों में काम करने वाले लोगों की भांति तृतीयक व्यवसायों में सेवारत लोगों के कार्य भी महत्वपूर्ण हैं। प्राथमिक और गौण व्यवसायों में लगे लोग, समाज के लिए आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करते हैं और तृतीयक व्यवसायी समाज को विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं।

4. चतुर्थक व्यवसाय (Quaternary Occupation):-

       वर्तमान समय में मानव के आर्थिक क्रियाकलाप दिनोंदिन बहुत ही विशिष्ट और जटिल होते जा रहे हैं। फलतः मानव की कानून, वित्त, शिक्षा, शोध और संचार से जुड़ी उन आर्थिक गतिविधियों को जो सूचना (information), सूचना के संग्रहण, (Acquisition), सूचना के संसाधन, (Manipulation) और सूचना के प्रसारण (Transmission) से सम्बन्धित है, को चतुर्थक व्यवसाय के अन्तर्गत सम्मिलित किया गया है।

    वर्तमान में विश्व के लगभग सभी देशों में और विशेषकर विकसित देशों में चतुर्थक व्यवसाय में संलग्न लोगों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। इस व्यवसाय के लोगों में उच्च वेतनमान और पदोन्नति की चाह में गतिशीलता अधिक पाई जाती है।

    कम्प्यूटर के बढ़ते प्रयोग और सूचना प्रौद्योगिकी ने इस व्यवसाय के महत्व को बहुत बढ़ा दिया है। परिणामस्वरूप औद्योगिक समाज के तकनीकी तत्वों में क्रान्तिकारी परिवर्तन आ गया है और वर्तमान आर्थिक क्रियाकलाप मुख्य रूप से उन अप्रत्यक्ष उत्पादों से प्रभावित हो गए हैं जिनके उत्पादन में ज्ञान, सूचना और संचा अधिक महत्वपूर्ण है।

MCQs/UGC NET/JRF Quick Revision

1. मानव की आर्थिक क्रियाओं में क्षेत्रीय विभिन्नता का सबसे उपयुक्त कारण कौन-सा है?

Which best explains regional variation in human economic activities?

(A) केवल जनसंख्या का आकार / Population size only

(B) भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण की क्षेत्रीय विभिन्नता / Regional variation in physical and social environment

(C) केवल राजनीतिक सीमाएँ / Political boundaries only

(D) केवल तकनीकी विकास / Technological development only

Answer: (B)

2. निम्न में से कौन-सा आर्थिक क्रियाओं के चार-स्तरीय वर्गीकरण का सही क्रम है?

Which is the correct four-fold classification of economic activities?

(A) Primary → Secondary → Tertiary → Quaternary

(B) Primary → Tertiary → Secondary → Quaternary

(C) Secondary → Primary → Quaternary → Tertiary

(D) Tertiary → Primary → Secondary → Quaternary

Answer: (A)

3. निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधि प्राथमिक व्यवसाय की मूल प्रकृति को सर्वाधिक स्पष्ट करती है?

Which activity best represents the basic nature of a primary occupation?

(A) Software development

(B) Banking

(C) Forest resource collection

(D) Retail trade

Answer: (C)

4. प्राथमिक व्यवसायों के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?

Which statement is correct regarding primary occupations?

(A) वे पूर्णतः प्रकृति से स्वतंत्र होते हैं।

(B) वे मुख्यतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं।

(C) उनमें विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता कभी नहीं होती।

(D) वे केवल विकसित देशों में पाए जाते हैं।

Answer: (B)

5. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसायों का समूह है?

Which is a group of primary occupations?

(A) Banking, insurance, trade

(B) Mining, agriculture, fishing

(C) Teaching, research, consulting

(D) Manufacturing, construction, processing

Answer: (B)

6. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?

Which is NOT a primary occupation?

(A) Fishing

(B) Mining

(C) Agriculture

(D) Manufacturing

Answer: (D)

7. प्राथमिक व्यवसायों के लिए अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होने का मुख्य कारण क्या है?

Why do primary occupations generally require relatively extensive areas?

(A) वे सीधे प्राकृतिक संसाधनों एवं भूमि पर निर्भर होते हैं।

(B) उनमें केवल urban population कार्य करती है।

(C) उनमें केवल मशीनों का प्रयोग होता है।

(D) उनका प्राकृतिक पर्यावरण से कोई संबंध नहीं है।

Answer: (A)

8. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय और उसके पर्यावरण के बीच सही संबंध दर्शाता है?

Which correctly relates a primary occupation to its environment?

(A) घासभूमि — पशुपालन

(B) खनिज क्षेत्र — मत्स्य ग्रहण

(C) नदी — खनन ही केवल

(D) वन — बैंकिंग

Answer: (A)

9. आखेट एवं संग्रहण आधारित अर्थव्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

What is the major characteristic of hunting and gathering economy?

(A) पूर्णतः स्थायी कृषि

(B) अत्यधिक औद्योगिकीकरण

(C) स्थानीय प्राकृतिक पर्यावरण पर अत्यधिक निर्भरता

(D) बड़े पैमाने का विनिर्माण

Answer: (C)

10. निम्न में से कौन-सा आखेट एवं संग्रहण से संबंधित नहीं है?

Which is NOT associated with hunting and gathering?

(A) फल एवं जड़ें एकत्र करना

(B) पशु-पक्षियों का आखेट

(C) मछली पकड़ना

(D) बड़े पैमाने पर मशीन आधारित उद्योग

Answer: (D)

11. निम्न में से कौन-सा समूह source के अनुसार आखेट-संग्रहण से संबंधित समुदायों का उदाहरण देता है?

Which group represents communities associated with hunting and gathering according to the source?

(A) पिग्मी, सेमांग, बुशमैन

(B) मसाई, फुलानी, बद्दू

(C) गुज्जर, गद्दी, बकरवाल

(D) डेनमार्क के डेयरी किसान

Answer: (A)

12. उष्ण कटिबंधीय वनों में वाणिज्यिक संग्रहण में निम्न में से किसका संग्रह किया जाता है?

Which may be collected commercially in tropical forests?

(A) लाख, गोंद एवं जड़ी-बूटियाँ

(B) केवल गेहूँ

(C) केवल कोयला

(D) केवल लौह-अयस्क

Answer: (A)

13. आखेट-संग्रहण समुदायों की प्राकृतिक पर्यावरण के प्रति गहरी जानकारी का प्रमुख कारण क्या है?

Why do hunting-gathering communities possess detailed knowledge of their natural environment?

(A) उनकी आवश्यकताओं का बड़ा भाग स्थानीय पर्यावरण से पूरा होता है।

(B) वे केवल आधुनिक उद्योगों पर निर्भर होते हैं।

(C) वे स्थायी कृषि करते हैं।

(D) वे केवल आयातित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।

Answer: (A)

14. पशुपालन के विकास के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा क्रम source की व्याख्या से सर्वाधिक संगत है?

Which sequence is most consistent with the source’s explanation of the development of pastoralism?

(A) व्यापार के बाद संग्रहण का विकास

(B) उद्योग के बाद आखेट का विकास

(C) आखेट-संग्रहण के बाद पशुपालन का विकास

(D) कृषि के बाद ही सभी प्रकार के पशुपालन का विकास

Answer: (C)

15. निम्न में से कौन-सा पशु-पर्यावरण का सही युग्म है?

Which is the correctly matched animal-environment pair?

(A) मरुस्थल — ऊँट

(B) टुण्ड्रा — गाय-बैल

(C) सवाना — याक

(D) तिब्बत — ऊँट

Answer: (A)

16. तिब्बत एवं हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों में किस पशु का पालन source में बताया गया है?

Which animal is associated with pastoralism in Tibet and Himalayan mountainous regions?

(A) Camel

(B) Yak

(C) Reindeer

(D) Alpaca

Answer: (B)

17. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन की मूल विशेषता है?

Which is a basic characteristic of nomadic pastoralism?

(A) चारे एवं पानी की खोज में स्थान परिवर्तन

(B) एक ही खेत में स्थायी फसल उत्पादन

(C) केवल urban market services

(D) पूर्णतः factory-based livestock production

Answer: (A)

18. चलवासी पशुपालक अपने स्थान परिवर्तन के दौरान मुख्यतः किन संसाधनों की खोज करते हैं?

Which resources primarily determine the movement of nomadic pastoralists?

(A) चारा और पानी

(B) कोयला और लौह-अयस्क

(C) बाजार और बैंक

(D) कारखाने और बंदरगाह

Answer: (A)

19. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन का क्षेत्र source में उल्लिखित है?

Which is an area of nomadic pastoralism mentioned in the source?

(A) सहारा मरुस्थल

(B) अमेजन का शहरी क्षेत्र

(C) पश्चिमी यूरोप का औद्योगिक क्षेत्र

(D) जापान का महानगरीय क्षेत्र

Answer: (A)

20. निम्न में से कौन-सा समुदाय चलवासी पशुपालन से संबंधित है?

Which community is associated with nomadic pastoralism?

(A) मसाई

(B) डेनिश डेयरी किसान

(C) पम्पास के आधुनिक कृषक

(D) कनाडाई लकड़ी उद्योग कर्मी

Answer: (A)

21. पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में ऊँचाई की ओर और शीत ऋतु में घाटियों की ओर पशुपालकों का जाना कहलाता है—

Seasonal movement of pastoralists to higher elevations in summer and valleys in winter is called:

(A) Transhumance / ऋतु प्रवास

(B) Plantation

(C) Shifting cultivation

(D) Truck farming

Answer: (A)

22. निम्न में से कौन-सा ऋतु प्रवास का सही उदाहरण है?

Which is an example of transhumance?

(A) कनाडा के औद्योगिक श्रमिक

(B) सहारा के स्थायी कृषक

(C) हिमालय के गुज्जर, गद्दी एवं बकरवाल

(D) डेनमार्क के डेयरी किसान

Answer: (C)

23. निम्न में से कौन-सा कथन Transhumance को Nomadic Pastoralism से अलग करता है?

Which distinguishes transhumance from nomadic pastoralism?

(A) Transhumance में seasonal movement एक अपेक्षाकृत निश्चित ऊर्ध्वाधर/क्षेत्रीय pattern का अनुसरण करता है।

(B) Transhumance में पशुपालन नहीं होता।

(C) Nomadic pastoralism में कभी movement नहीं होता।

(D) दोनों में कोई अंतर नहीं है।

Answer: (A)

24. आधुनिक काल में कुछ क्षेत्रों में चलवासी पशुपालन के स्थान पर व्यापारिक पशुपालन आने का एक प्रमुख कारण क्या बताया गया है?

What is one reason for the replacement of nomadic pastoralism by commercial livestock farming in some regions?

(A) कृषि का पूर्ण अंत

(B) प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण अभाव

(C) पशुओं का विलुप्त होना

(D) उद्योगों एवं आधुनिक सुविधाओं का विकास 

Answer: (D)

25. व्यापारिक पशुपालन की कौन-सी विशेषता उसे चलवासी पशुपालन से अलग करती है?

Which feature distinguishes commercial livestock farming from nomadic pastoralism?

(A) पशुपालक एक स्थान पर रहकर वैज्ञानिक एवं व्यापारिक तरीके अपनाते हैं।

(B) वे लगातार नए चरागाह खोजते हैं।

(C) वे केवल प्राकृतिक घास पर निर्भर रहते हैं।

(D) वे बाजार से पूर्णतः कटे रहते हैं।

Answer: (A)

26. व्यापारिक पशुपालन में चारे की फसलों की खेती का क्या महत्व है?

What is the significance of fodder cultivation in commercial livestock farming?

(A) पशुओं के लिए नियंत्रित एवं पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना

(B) पशुपालकों को प्रवास के लिए बाध्य करना

(C) प्राकृतिक चरागाह समाप्त करना ही इसका उद्देश्य है।

(D) केवल निर्यात फसल पैदा करना

Answer: (A)

27. निम्न में से कौन-सा व्यापारिक पशुपालन का प्रमुख क्षेत्र source में उल्लिखित है?

Which is a major region of commercial livestock farming mentioned in the source?

(A) उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र

(B) सहारा का केंद्रीय मरुस्थल ही

(C) हिमालय का प्रत्येक भाग

(D) अमेजन का प्रत्येक भाग

Answer: (A)

28. व्यापारिक पशुपालन में नस्ल सुधार एवं रोग नियंत्रण का महत्व किस बात को दर्शाता है?

What does emphasis on breeding and disease control indicate in commercial livestock farming?

(A) इसका वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुख स्वरूप

(B) इसका पूर्णतः निर्वाह स्वरूप

(C) इसका पर्यावरण से पूर्ण विच्छेद

(D) इसका केवल खानाबदोश स्वरूप

Answer: (A)

29. लकड़ी काटने का व्यापारिक विकास विशेष रूप से किस प्रकार के वन प्रदेश में हुआ?

Commercial logging developed particularly in which forest region?

(A) मरुस्थलीय प्रदेश

(B) शंकुधारी वन प्रदेश

(C) टुण्ड्रा का बर्फीला क्षेत्र

(D) घासभूमि

Answer: (B)

30. निम्न में से कौन-सा लकड़ी काटने वाले प्रमुख देशों का समूह है?

Which group represents major commercial logging countries mentioned in the source?

(A) अर्जेंटीना, ब्राजील, वेनेजुएला, उरुग्वे

(B) मिस्र, सऊदी अरब, लीबिया, चाड

(C) भारत, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया

(D) स्वीडन, फिनलैंड, रूस, कनाडा 

Answer: (D)

31. लकड़ी से लुग्दी एवं कागज बनाने वाले उद्योगों का वनों से संबंध किस प्रकार का है?

What is the relationship between pulp and paper industries and forests?

(A) वन कच्चा माल प्रदान करते हैं।

(B) वन केवल बाजार प्रदान करते हैं।

(C) वन केवल श्रमिक प्रदान करते हैं।

(D) वन का कोई संबंध नहीं है।

Answer: (A)

32. मध्य अक्षांशीय तटीय प्रदेशों में व्यापारिक मत्स्य ग्रहण के विकास में कौन-सा कारक महत्वपूर्ण है?

Which factor is important for commercial fishing in middle-latitude coastal regions?

(A) शक्तिचालित नावों एवं जलपोतों का उपयोग

(B) केवल पारंपरिक भाले

(C) केवल ऊँट परिवहन

(D) केवल वर्षा जल

Answer: (A)

33. बड़े मत्स्य जहाजों में मछलियों को संसाधित एवं पैक करने की सुविधा किस प्रवृत्ति को दर्शाती है?

Processing and packing fish aboard large fishing vessels indicates:

(A) मत्स्य व्यवसाय का औद्योगिक एवं व्यापारिक स्वरूप

(B) केवल निर्वाह मत्स्य ग्रहण

(C) पशुपालन

(D) स्थानान्तरी कृषि

Answer: (A)

34. खनन को प्राथमिक व्यवसाय क्यों माना जाता है?

Why is mining classified as a primary occupation?

(A) इसमें पृथ्वी से प्राकृतिक खनिज संसाधनों का प्रत्यक्ष निष्कर्षण होता है।

(B) इसमें केवल manufactured goods बेचे जाते हैं।

(C) इसमें केवल financial services होती हैं।

(D) इसमें केवल research किया जाता है।

Answer: (A)

35. निम्न में से कौन-सा खनन के व्यापारिक दोहन को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है?

Which is NOT a factor affecting commercial exploitation of minerals?

(A) अयस्क की मांग

(B) अयस्क की गुणवत्ता

(C) खान की गहराई एवं सुगम्यता

(D) केवल देश की भाषा

Answer: (D)

36. खनिजों के वितरण के संबंध में कौन-सा कथन सही है?

Which statement is correct regarding mineral distribution?

(A) खनिजों का वितरण असमान है और अधिकांश खनिज non-renewable हैं।

(B) सभी देश खनिजों में आत्मनिर्भर हैं।

(C) सभी खनिज renewable हैं।

(D) खनिज पूरे विश्व में समान रूप से वितरित हैं।

Answer: (A)

37. खनन प्रारम्भ होने के बाद किसी क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विकास और बस्ती विस्तार का क्या संबंध हो सकता है?

What may be the relationship between mining and transport/settlement development?

(A) खनन के कारण परिवहन सुविधाएँ विकसित हो सकती हैं और लोगों का आगमन बढ़ सकता है।

(B) खनन हमेशा बस्तियों को समाप्त करता है।

(C) खनन का परिवहन से कोई संबंध नहीं है।

(D) खनन केवल समुद्र में होता है।

Answer: (A)

38. पेट्रोलियम शोधनशालाओं के संदर्भ में source में कौन-सा तर्क दिया गया है?

What reasoning is given in the source regarding petroleum refineries?

(A) अशुद्ध पेट्रोलियम का परिवहन कई petroleum products की तुलना में सस्ता हो सकता है।

(B) पेट्रोलियम का परिवहन असंभव है।

(C) सभी refineries केवल खानों के ऊपर स्थापित होती हैं।

(D) पेट्रोलियम का कोई परिवहन नहीं होता।

Answer: (A)

39. कृषि के विकास के संदर्भ में सबसे प्राचीन रूप किसे बताया गया है?

Which is described as the oldest form of agriculture?

(A) स्थानान्तरी कृषि

(B) रोपण कृषि

(C) मिश्रित कृषि

(D) ट्रक फार्मिंग

Answer: (A)

40. स्थानान्तरी कृषि की मूल प्रक्रिया में क्या शामिल है?

What is involved in the basic process of shifting cultivation?

(A) वनस्पति को काटना-जला कर भूमि साफ करना और कुछ वर्षों बाद दूसरी भूमि पर जाना

(B) स्थायी खेतों में लगातार एक ही भूमि पर खेती करना

(C) केवल greenhouse cultivation

(D) केवल commercial dairy farming

Answer: (A)

41. स्थानान्तरी कृषि में भूमि को कुछ वर्षों के बाद छोड़ने का प्रमुख कारण क्या है?

Why is land left fallow after a few years in shifting cultivation?

(A) समुद्री जल का बढ़ना

(B) भूमि की उर्वरता/उत्पादकता में कमी और नए क्षेत्र की आवश्यकता

(C) उद्योगों की अधिकता

(D) बाजार का पूर्ण अभाव

Answer: (B)

42. निम्न में से कौन-सा स्थानान्तरी कृषि का प्रमुख क्षेत्र source में बताया गया है?

Which is a major area of shifting cultivation mentioned in the source?

(A) उष्ण कटिबंधीय वन

(B) शीतोष्ण घासभूमि ही

(C) मरुस्थलीय क्षेत्र ही

(D) ध्रुवीय हिम क्षेत्र

Answer: (A)

43. स्थायी कृषि के विकास का एक प्रमुख सामाजिक-भौगोलिक परिणाम क्या था?

What was a major socio-geographical consequence of permanent agriculture?

(A) अतिरिक्त खाद्यान्न समाप्त हो गया।

(B) मानव पूरी तरह खानाबदोश बन गया।

(C) परिवहन समाप्त हो गया।

(D) स्थायी बस्तियों को प्रोत्साहन मिला।

Answer: (D)

44. व्यापारिक कृषि की प्रमुख विशेषता क्या है?

What is a major characteristic of commercial agriculture?

(A) बाजार/निर्यात के लिए विशेष फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन

(B) केवल स्थानीय निर्वाह के लिए उत्पादन

(C) केवल जंगली पौधों का संग्रहण

(D) केवल पशुपालन

Answer: (A)

45. रोपण कृषि को कृषि का विशिष्टीकृत रूप क्यों कहा जाता है?

Why is plantation agriculture considered a specialized form of agriculture?

(A) केवल वन्य उत्पादों का संग्रहण

(B) केवल छोटे घरेलू खेतों में खाद्यान्न उत्पादन

(C) केवल पशुपालन

(D) बड़े क्षेत्र में चाय, कॉफी, रबर आदि विशेष फसलों का मुख्यतः व्यापारिक/निर्यात उद्देश्य से उत्पादन

Answer: (D)

46. निम्न में से कौन-सा रोपण कृषि का सही समूह है?

Which is the correct group of plantation crops?

(A) चाय, कॉफी, रबर

(B) गेहूँ, जौ, बाजरा

(C) चना, मसूर, मटर

(D) केवल घास और चारा

Answer: (A)

47. मिश्रित कृषि की सबसे उपयुक्त पहचान क्या है?

What best identifies mixed farming?

(A) फसल उत्पादन और पशुपालन का एक साथ होना

(B) केवल फल उत्पादन

(C) केवल पशुपालन

(D) केवल वन संग्रहण

Answer: (A)

48. ट्रक फार्मिंग मुख्यतः किससे संबंधित है?

Truck farming is mainly associated with:

(A) मरुस्थल में ऊँट पालन

(B) नगरीय क्षेत्रों के समीप साग-सब्जियों की कृषि

(C) पर्वतीय क्षेत्रों में याक पालन

(D) समुद्र में मत्स्य ग्रहण

Answer: (B)

49. उद्यान कृषि का प्रमुख स्थानिक संबंध किससे है?

What is the major locational association of horticulture mentioned in the source?

(A) केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में कृषि

(B) केवल खनिज क्षेत्रों में कृषि

(C) नगरीय उपभोग केन्द्रों के समीप फल एवं फूलों की कृषि

(D) केवल समुद्र के भीतर कृषि

Answer: (C)

50. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक आर्थिक गतिविधियों के बदलते स्वरूप को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

Which best represents the changing nature of primary economic activities?

(A) प्रकृति से पूर्ण स्वतंत्रता

(B) निर्वाह से व्यापारिक एवं वैज्ञानिक उत्पादन की ओर बढ़ता विशिष्टीकरण

(C) प्राथमिक गतिविधियों का पूर्ण अंत

(D) केवल शिकार पर स्थायी निर्भरता

Answer: (B)

21. Primary Economic Activities of Humans (मनुष्य की प्राथमिक आर्थिक गतिविधियाँ)

Primary Economic Activities of Humans

(मनुष्य की प्राथमिक आर्थिक गतिविधियाँ)



Q. मानव के प्राथमिक व्यवसायों का विस्तार से वर्णन कीजिए।

Primary Economic Activities

उत्तर- मानव अपनी मूलभूत और उच्चतर आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु विभिन्न प्रकार की आर्थिक क्रियाएं करता है। इन क्रियाओं द्वारा मानव की आर्थिक प्रगति होती है। मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण का प्रभाव पड़ता है। चूंकि पृथ्वी सतह पर भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण में क्षेत्रीय विभिन्नता विद्यमान है, अतः मानव की आर्थिक क्रियाओं में भी क्षेत्रीय विभिन्नता पाई जाती है।

     उदाहरण के लिए वनों में मानव एकत्रीकरण या संग्रहण, आखेट एवं लकड़ी काटने जैसी आर्थिक क्रियाएं सम्पन्न करता है तो घास के मैदानों में पशुचारण, उपजाऊ समतल मैदानी भागों में कृषि, खनिजों की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में खनन, जल की उपलब्धि वाले क्षेत्रों में मत्स्याखेट जैसी आर्थिक क्रियाएं करता है। साथ ही अनुकूल अवस्थिति वाले क्षेत्रों में विनिर्माण उद्योगों, परिवहन, व्यापार एवं सेवाओं से सम्बन्धित आर्थिक गतिविधियों में भी संलग्न रहता है।

        मनुष्य की आर्थिक क्रियाओं या गतिविधियों को निम्नलिखित चार वर्गों में विभाजित किया जा सकता है, यद्यपि ये चारों वर्ग एक-दूसरे से घनिष्ठ रूप से सम्बन्धित हैं:-

1.  प्राथमिक व्यवसाय (Primary Occupation)

2. द्वितीयक व्यवसाय (Secondary Occupation)

3. तृतीयक (Tertiary Occupation)

4.  चतुर्थक  व्यवसाय (Quaternary Occupation)

1. प्राथमिक व्यवसाय (Primary Occupation):

      प्राथमिक व्यवसाय पूर्णतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं। प्राथमिक व्यवसायों के संचालन हेतु अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होती है। वनों से संग्रहण, आखेट, लकड़ी काटना, घास के मैदानों में पशु चराना, पशुओं से दूध, मांस, खालें, आदि प्राप्त करना, समुद्रों, नदियों एवं झीलों से मछली पकड़ना, कृषि तथा खानों से खनिज निकालना, आदि प्रमुख व्यवसाय हैं।

    विश्व के विकासशील देशों में कार्यशील जनसंख्या का अधिकांश भाग प्राथमिक व्यवसायों में लगा हुआ है और विकसित देशों में कार्यशील जनसंख्या का अधिकांश भाग तृतीयक एवं चतुर्थक व्यवसायों में कार्यरत हैं। भारत में 60 प्रतिशत, चीन में 50 प्रतिशत, इथोपिया में 80 प्रतिशत, नाइजीरिया में 70 प्रतिशत जनसंख्या प्राथमिक व्यवसायों में लगी हुई है जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में 8 प्रतिशत, ग्रेट ब्रिटेन में 1 प्रतिशत, जापान में 5 प्रतिशत जनसंख्या ही प्राथमिक व्यवसायों में संलग्न है। मानव के प्रमुख प्राथमिक व्यवसायों का विवरण निम्नानुसार है:-

(i) आखेट, एकत्रीकरण या संग्रहण:-

    विश्व के कुछ प्रदेशों में आज भी लोग आखेट, संग्रहण या एकत्रीकरण जैसी आर्थिक क्रियाओं द्वारा अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले अफ्रीका के पिग्मी, मलेशिया के सेमांग, कालाहारी मरुस्थल के बुशमैन, आस्ट्रेलिया के मरुस्थल में रहने वाले आदिम लोग, उत्तरी ध्रुवीय प्रदेशों में रहने वाले एस्किमो एवं लैप्स लोग इस प्रकार की आर्थिक क्रियाओं में संलग्न हैं।

     ये लोग अपने आस-पास के पर्यावरण पर पूर्णतया आश्रित होते हैं। ये लोग अपने भोजन के लिए पौधों से विभिन्न प्रकार के फल, जड़ें और पत्तियाँ एकत्रित करते हैं। ये इन पदार्थों की खोज में इधर-उधर घूमते रहते हैं। पशु-पक्षियों के आखेट तथा झीलों और नदियों में मछली पकड़कर ये लोग अपनी भोजन सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करते हैं। आखेट के लिए ये भाले और धनुष-बाण जैसे साधारण हथियारों का प्रयोग करते हैं।

     अपनी वस्त्र और मकान सम्बन्धी आवश्यकता पूर्ति के लिए ये लोग अपने आस-पास के पर्यावरण में उपलब्ध सामग्री उपयोग में लाते हैं। इन लोगों को अपने प्राकृतिक आवास की पूरी जानकारी होती है, क्योंकि इनकी सभी आवश्यकताएं स्थानीय पर्यावरण से ही पूरी होती हैं।

     उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले लोग साधारण पैमाने पर जीविकोपार्जन हेतु और निर्यात के लिए वाणिज्यिक संग्रहण का कार्य करते हैं। इसके लिए ये चिकिल रस (इसका उपयोग चिविंग गम बनाने में किया जाता है), बलाता (इसका उपयोग समुद्री केविल, गोल्फ की गेंद का खोल बनाने में किया जाता है), नट (गिरी फल), रेशों, जड़ी-बूटियों, लाख, गोंद, आदि संग्रहण करते हैं।

(ii) पशुपालन:-

     आखेट और संग्रहण युग के बाद पशुपालन युग का प्रारम्भ हुआ। इस युग में विभिन्न पर्यावरण में रहने वाले लोगों ने विभिन्न प्रकार के पशुओं को पालतु बनाया। उदाहरण के लिए सवाना घास भूमियों में गाय-बैल, मरुस्थलों में ऊंट, स्टेपी घास भूमियों में भेड़, टुण्डा प्रदेशों में रेण्डियर, एण्डीज के पर्वतीय प्रदेशों में तामा और अल्पाका तथा तिब्बत एवं हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों में याक, आदि पशुओं को पालतू बनाया गया। इन पालतू पशुओं से मानव को दूध, मांस, ऊन और खालों की प्राप्ति होती है। इनसे मानव की भोजन, वस्त्र और अन्य अनेक आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

     चलवासी पशुपालक अपने पालतू पशुओं के लिए चारे और पानी की तलाश में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाते रहते हैं। प्रत्येक चलवासी जाति एक निश्चित क्षेत्र में रहती है तथा उन्हें अपने उस क्षेत्र में चारागाहों और जल की आपूर्ति के स्रोत क्षेत्रों तथा ऋतुओं के अनुसार होने वाले परिवर्तनों की पूरी जानकारी होती है।

      सहारा मरुस्थल, पूर्वी अफ्रीका के तटीय भाग, सऊदी अरब, इराक, ईरान, अफगानिस्तान, चीन, मंगोलिया के शुष्क भाग, दक्षिण-पश्चिमी अफ्रीका, मालागासी के पश्चिमी भाग तथा यूरेशिया के दुण्ड्रा के दक्षिणी सीमान्त पर स्थित क्षेत्रों में चलवासी पशुपालन होता है।

      पूर्वी अफ्रीका के मसाई, नाइजीरिया के फुलानी, सहारा मरुस्थल में बद्दू, मध्य एशिया में खिरगीज लोग चतवासी पशुपालन में संलग्न हैं। इन क्षेत्रों में जलवायु उष्ण एवं शुष्क है। यहाँ घास छोटी एवं विरल होती है जो ग्रीष्म ऋतु में सूख भी जाती है। इन क्षेत्रों में प्रति इकाई भूमि की वहन क्षमता कम होती है। ये पशुपालक अपने पशुओं के साथ चारागाहों की खोज में घूमते रहते हैं। ये लोग तम्बुओं में रहते हैं और कठोर जीवन व्यतीत करते हैं।

     पर्वतीय प्रदेशों में चरवाहे ग्रीष्म ऋतु में अपने पशुओं को चराने के लिए अधिक ऊंचे स्थानों पर ले जाते हैं और शीत ऋतु में घाटियों में उतर आते हैं। इस प्रकार अपने पशुओं के साथ पशुपालकों के ऋतुओं के अनुसार प्रवास को ऋतु प्रवास (Transhumance) कहते हैं। उदाहरण के लिए हिमालय के पर्वतीय प्रदेश के गुज्जर, गद्दी, बकरवाल और भोटिया ऋतु प्रवास करते हैं।

     इसी प्रकार दुण्डा प्रदेश के लैप्स चरवाहे ग्रीष्म ऋतु में उत्तर की ओर तथा शीत ऋतु में दक्षिण में कोणधारी वनों की ओर प्रवास करते हैं।

    वर्तमान में चलवासी पशुचारण क्षेत्रों में उद्योगों की स्थापना हो जाने से लोग अब उद्योगों के पास पक्के मकानों में रहने लगे हैं। इसी प्रकार दक्षिणी अमेरिका, दक्षिणी अफ्रीका और आस्ट्रेलिया में चलवासी पशुचारण का स्थान व्यापारिक पशुपालन ने ले लिया है। किरगीजस्तान, कजाखस्तान और उजबेकिस्तान में चलवासी पशुचारण क्षेत्रों में सिंचाई सुविधाएं उपलब्ध कराके कपास की कृषि की जाने लगी है।

    आधुनिक युग में पशुपालन वैज्ञानिक तरीकों से व्यापारिक आधार पर हो रहा है। उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र, ब्राजील का पठारी भाग और अर्जेण्टीना में विस्तृत पम्पास घास स्थल, वेनेजुएला का लानोस घास स्थल, दक्षिणी अफ्रीका का वेल्ड क्षेत्र, आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड की शीतोष्ण घास भूमि, कैम्पियन सागर के पूर्व तथा अरल सागर के उत्तर के विस्तृत भाग व्यापारिक पशुपालन के उल्लेखनीय क्षेत्र हैं।

     व्यापारिक पशुपालन उद्योग पूर्णतया प्राकृतिक चारागाहों पर आश्रित नहीं है। विस्तृत क्षेत्रों में चारे की फसलों और पौष्टिक घासों की खेती की जाती है। पशुओं को सुख-सुविधा सम्पन्न बाड़ों में रखकर खिलाया-पिलाया जाता है। विशेष नस्ल के पशु पाले जाते हैं, जिनकी दूध या मांस उत्पादन क्षमता अत्यधिक होती है। पशुओं के प्रजनन, नस्ल सुधार, रोगों की रोकथाम तथा बीमार पशुओं के इलाज, आदि की ओर विशेष ध्यान दिया जाता है।

     पशुओं को बड़े-बड़े बाड़ों में रखा जाता है। इनमें मांस के लिए पशु पाले जाते हैं। डेनमार्क तथा न्यूजीलैण्ड में बड़े पैमाने पर दुग्ध व्यवसाय होता है। आस्ट्रेलिया तथा न्यूजीलैण्ड में भेड़ ऊन तथा मांस के लिए व्यापारिक स्तर पर पाली जाती हैं।

    व्यापारिक पशुचारण में लोगों को प्रवास नहीं करना पड़ता है। वे एक ही स्थान पर रहते हैं। चारे की फसलों की खेती तथा दूध और मांस से संसाधित पदार्थ बनाने के लिए मशीनों का अत्यधिक प्रयोग होता है। इन संसाधित पदार्थों का बाजार अन्तर्राष्ट्रीय है।

(iii) लकड़ी काटना:-

    लकड़ी काटने के व्यवसाय का व्यापारिक स्तर पर विकास मुलायम लकड़ी के वृक्षों वाले शंकुधारी वन प्रदेशों में हुआ है। इमारती लकड़ी, लुग्दी, कागज तथा कृत्रिम रेशे बनाने के लिए वनों से लाखों पेड़ काटे जाते हैं। स्वीडन, फिनलैण्ड्स, रूस, कनाडा और संयुक्त राज्य अमेरिका के विस्तृत क्षेत्रों में शंकुधारी वन हैं। इन देशों के इन वनों में लकड़ी काटने का काम व्यापारिक स्तर पर होता है।

      पेड़ काटने तथा ल‌ट्ठे ढोने के लिए मशीनों का उपयोग होता है। चिराई के कारखाने लकड़ी के ल‌ट्ठों को संसाधित करके लुग्दी और कागज बनाते हैं। इन प्रदेशों में काटे गए पेड़ों के स्थान पर नए पेड़ लगाने का कार्य साथ-साथ चलता रहता है। इन प्रदेशों में परिवहन की पर्याप्त सुविधाएं हैं। बड़ी मात्रा में लुग्दी, कागज और अखबारी कागज संसार के अनेक देशों को निर्यात किया जाता है।

     उष्ण और उपोष्ण कटिबन्धीय वनों में लकड़ी काटने का व्यवसाय कुछ सुगम्य क्षेत्रों तक ही सीमित है। सागौन, महोगनी, चंदन और रोजवुड के वृक्ष उष्ण कटिबन्धीय वनों में तथा बीच, वर्थ, मैपिल और ओक के वृक्ष मध्य अक्षांशीय वनों में मिलते है। इनका उपयोग इमारते तथा कर्नीचर बनाने में किया जाता है।

     भारत, चीन तथा अफ्रीका के घने बसे कुछ देशों में जलाऊ लकड़ी तथा काठ-कोयले की मांग को पूरा करने के लिए पेड़ों, झाड़ियों तथा दूसरे पौधों का सफाया हो चुका है। इन प्रदेशों में काटे गए पेड़-पौधों के स्थान पर नए पेड़ न लगाने के कारण मिट्टी का अपरदन और बाढ़ों की आवृत्ति बढ़ी है।

(iv) मत्स्य ग्रहण:-

     मध्य अक्षांशों के तटीय प्रदेशों में मछली पकड़ने का काम व्यापारिक स्तर पर विकसित हो चुका है। शक्ति चालित नावों तथा जलपोतों के द्वारा मछलियाँ पकड़ी जाती हैं। बड़े-बड़े जहाज तैरते हुए कारखानों का काम करते है जिनमें पकड़ी हुई मछलियों को संसाधित करके डिब्बों में पैक कर दिया जाता है। जहाजों में बने प्रशीतकों की सुविधा के कारण मछलियों को संसार के अनेक देशों में निर्यात किया जाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस, ग्रेट ब्रिटेन, जापान तथा नार्वे में व्यापारिक मत्स्य ग्रहण बड़े पैमाने पर विकसित हो गया है।

(v) खनन:-

     भू-गर्भ में से खनिजों को निकालने की क्रिया को खनन कहते हैं। खनिजों की उपलब्धता वाले क्षेत्रों को खान क्षेत्र कहते हैं। खनिज प्रकृति में पाए जाने वाले वे जड़ पदार्थ हैं जो रासायनिक तत्व भी हो सकते हैं और यौगिक भी। पृथ्वी पर खनिजों का वितरण असमान है। अधिकांश खनिज नवीकरण के योग्य नहीं हैं।

     कोई भी देश खनिजों की उपलब्धता की दृष्टि से आत्मनिर्भर नहीं है। खनिजों के व्यापारिक दोहन को अयस्क की मांग, अयस्क की गुणवत्ता, भू-वैज्ञानिक दशाएं, खान की गहराई तथा पहुंच की दृष्टि से खानों की सुगम्यता, उपलब्ध प्रौद्योगिकी, आवश्यक पूंजी की उपलब्धता, श्रमिकों की आपूर्ति, आदि कारक प्रभावित करते हैं। खनन का कार्य शुरू होने से परिवहन की सुविधाओं का विकास होने लगता है तथा उस क्षेत्र में लोग बसने के लिए आने लगते हैं।

     अयस्कों के बेनीफिसीएशन संयन्त्र या तो खानों के समीप स्थापित होते हैं या फिर उपभोक्ता केन्द्रों के निकट स्थापित होते हैं। पेट्रोलियम से प्राप्त अनेक प्रकार के उत्पादों के परिवहन की तुलना में अशुद्ध पेट्रोलियम का परिवहन सस्ता पड़ता है। अतः तेल शोधनशालाएं बन्दरगाहों के समीप या उपभोक्ता केन्द्रों के समीप स्थापित की जाती हैं।

       खनन तथा उससे जुड़े व्यवसायों में लगे लोगों की संख्या में प्रतिवर्ष परिवर्तन होता रहता है। इस परिवर्तन के अनेक कारण है, जैसे एक खान के बन्द होने के बाद दूसरी खान का प्रारम्भ होना, अयस्क का लागत मूल्य, अयस्क की मांग, अन्य देशों में नए निक्षेपों की खोज, आदि। अनेक देशों की अर्थव्यवस्था में खनिजों का उत्पादन उल्लेखनीय स्थान रखता है। बोत्सवाना, अजरबेजान, गेबन, कजाखस्तान, चिली, पश्चिमी सहारा, जाम्बिया, आदि कुछ ऐसे देश हैं जिनके कुछ निर्यात मूल्य में 90 प्रतिशत तक भाग खनिजों का होता है।

(vi) कृषि:-

    कृषि एक बहुप्रचलित व्यवसाय है। कृषि के लिए सबसे पहले भूमि से वनस्पति को साफ करना पड़ता है। इसके बाद जुताई करके, चुने हुए पौंधों की खेती की जाती है। जिनसे मानव की भोजन, रेशों या अन्य उत्पादों की आवश्यकताओं की पूर्ति होती है।

     कृषि के सबसे प्राचीन रूप को स्थानान्तरी कृषि कहते हैं। स्थानान्तरी कृषि अधिकतर उष्ण कटिबन्धीय वनों में रहने वाले लोगों द्वारा की जाती है। वे वनों में पेड़-पौधों को काटकर जला देते हैं। इस प्रकार वन भूमि साफ हो जाती है। वे कुदाल की मदद से रतालू, मैनिआक, टैपिओका, आदि जड़ वाली फसलें उगाते हैं।

     वन भूमि के साफ किए गए भागों को दो या तीन साल तक खेती करने के बाद परती भूमि के रूप में छोड़ दिया जाता है और अन्यत्र वन भूमि का दूसरा टुकड़ा साफ कर कृषि की जाती है। स्थानान्तरी कृषि की इस प्रक्रिया में मूल वनों का स्थान कम घने वन ले लेते हैं। इस प्रकार की कृषि में एक छोटे से समुदाय के निर्वाह के लिए विशाल क्षेत्र की आवश्यकता होती है। उत्तर-पूर्वी भारत की जनजातियाँ, मलेशिया के सेमांग तथा अमेजन बेसिन की जनजातियाँ स्थानान्तरी कृषि करती हैं।

     मानव सभ्यता के विकास में स्थायी कृषि एक महत्वपूर्ण चरण था। इससे स्थाई बस्ती बसाने को प्रोत्साहन मिला, क्योंकि आसपास ही खेतों में वर्ष भर काम रहता था। प्रत्येक ऋतु में चुनी हुई फसलों की खेती करने के लिए ऋतुओं की दशाओं का सावधानीपूर्वक अध्ययन जरूरी था। भूमि को साफ करने, मिट्टी की जुताई, उपलब्ध जल का सावधानीपूर्वक सिंचाई द्वारा उपयोग तथा फसल काटने के लिए गांव में रहने वाले लोगों का सहयोग आवश्यक हो गया था।

       अतिरिक्त भोजन सामग्री उपलब्ध होने के कारण एक स्थान से दूसरे स्थान में जाने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई। फसलों से प्राप्त भूसे तथा पुआल, आदि से पालतू पशुओं को चारा मिल जाता था। पशुओं का खेतों की जुताई तथा कृषि के अन्य कार्यों में उपयोग किया जाता था। इस प्रकार एक प्रभावशाली संगठन बन गया।

      अतिरिक्त खाद्यान्न उन लोगों के हिस्से में आता था जो समुदाय की किसी न किसी रूप में सेवा करते थे। पहिए की खोज के बाद पशुओं को गाड़ी खींचने के काम में लाया जाने लगा। अतिरिक्त खाद्यान्न को अन्य उत्पादों से बदलने के लिए गाड़ियों में लाद कर बाहर ले जाया जाने लगा। सड़कों के निर्माण से विभिन्न समुदाय सम्पर्क में आने लगे, विचारों का आदान-प्रदान शुरू हुआ।

     कृषि का प्रारम्भ निर्वाह कृषि के रूप में हुआ, क्योंकि इससे स्थानीय समुदाय की आवश्यकताएं तुरन्त पूरी हो जाती थी। पिछले 125 वर्षों में परिवहन तथा अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार के विकास के साथ-साथ कृषि में विशिष्टीकरण हो गया है। अधिकतर कृषि कार्यों में मशीनों का प्रयोग करके, विशाल क्षेत्रों में एक फसल की खेती विशेष रूप से होने लगी है।

    दूसरे देशों को निर्यात करने के लिए फसल विशेष की कृषि जैसे- कपास, मक्का, गेहूँ, आदि बड़े पैमाने पर होने लगी है। इस प्रकार की कृषि को व्यापारिक कृषि कहते हैं।

    रोपण कृषि, कृषि का एक विशिष्टीकृत रूप है। रोपण कृषि के अन्तर्गत सैकड़ों हेक्टेअर भूमि में कहवा, चाय, मसाले, रबड़, आदि की फसलें पैदा की जाती हैं। इन फसलों को मुख्य रूप से निर्यात के लिए ही पैदा किया जाता है। निर्यात से पूर्व इन फसलों को बड़े-बड़े कारखानों में संसाधित किया जाता है। रोपण कृषि में भारी मात्रा में पूंजी का निवेश होता है तथा इसमें बड़ी संख्या में श्रमिकों की आवश्यकता होती है। रोपण कृषि भारत, श्रीलंका, मलेशिया, आदि देशों के कुछ भागों में की जाती है।

     मिश्रित कृषि में फसलें उगाने तथा पशुओं को पालने का कार्य एक साथ किया जाता है। मिश्रित कृषि यूरोप, उत्तरी अमेरिका के पूर्वी भाग, अर्जेण्टीना के पम्पास, दक्षिण-पूर्वी आस्ट्रेलिया, दक्षिणी अफ्रीका तथा न्यूजीलैण्ड में की जाती है।

     ट्रक फार्मिंग एक विशेष प्रकार की कृषि है जिसमें साग-सब्जियों की कृषि नगरीय क्षेत्रों के समीप की जाती है।

     उद्यान कृषि के अन्तर्गत नगरीय उपभोग केन्द्रों के समीपवर्ती क्षेत्रों में फल औ फूलों की कृषि की जाती है।

    आधुनिक कृषि के अन्तर्गत कृषि के विभिन्न कार्यों के लिए भिन्न-भिन्न मशीनों का प्रयोग किया जाता है। अधिक उपज लेने के लिए उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक दवाइयाँ तथा सिंचाई की उत्तम सुविधा का प्रयोग किया जाता है।

    विस्तृत कृषि, व्यापारिक कृषि, मिश्रित कृषि, डेयरी फार्मिंग कृषि, उद्यान कृषि आदि आधुनिक ढंग से की जाती है।

MCQs/UGC NET/JRF Quick Revision

1. मानव की आर्थिक क्रियाओं में क्षेत्रीय विभिन्नता का सबसे उपयुक्त कारण कौन-सा है?

Which best explains regional variation in human economic activities?

(A) केवल जनसंख्या का आकार / Population size only

(B) भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण की क्षेत्रीय विभिन्नता / Regional variation in physical and social environment

(C) केवल राजनीतिक सीमाएँ / Political boundaries only

(D) केवल तकनीकी विकास / Technological development only

Answer: (B)

2. निम्न में से कौन-सा आर्थिक क्रियाओं के चार-स्तरीय वर्गीकरण का सही क्रम है?

Which is the correct four-fold classification of economic activities?

(A) Primary → Secondary → Tertiary → Quaternary

(B) Primary → Tertiary → Secondary → Quaternary

(C) Secondary → Primary → Quaternary → Tertiary

(D) Tertiary → Primary → Secondary → Quaternary

Answer: (A)

3. निम्नलिखित में से कौन-सी गतिविधि प्राथमिक व्यवसाय की मूल प्रकृति को सर्वाधिक स्पष्ट करती है?

Which activity best represents the basic nature of a primary occupation?

(A) Software development

(B) Banking

(C) Forest resource collection

(D) Retail trade

Answer: (C)

4. प्राथमिक व्यवसायों के संबंध में निम्न में से कौन-सा कथन सही है?

Which statement is correct regarding primary occupations?

(A) वे पूर्णतः प्रकृति से स्वतंत्र होते हैं।

(B) वे मुख्यतः प्रकृति पर आश्रित होते हैं।

(C) उनमें विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता कभी नहीं होती।

(D) वे केवल विकसित देशों में पाए जाते हैं।

Answer: (B)

5. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसायों का समूह है?

Which is a group of primary occupations?

(A) Banking, insurance, trade

(B) Mining, agriculture, fishing

(C) Teaching, research, consulting

(D) Manufacturing, construction, processing

Answer: (B)

6. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय नहीं है?

Which is NOT a primary occupation?

(A) Fishing

(B) Mining

(C) Agriculture

(D) Manufacturing

Answer: (D)

7. प्राथमिक व्यवसायों के लिए अपेक्षाकृत विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकता होने का मुख्य कारण क्या है?

Why do primary occupations generally require relatively extensive areas?

(A) वे सीधे प्राकृतिक संसाधनों एवं भूमि पर निर्भर होते हैं।

(B) उनमें केवल urban population कार्य करती है।

(C) उनमें केवल मशीनों का प्रयोग होता है।

(D) उनका प्राकृतिक पर्यावरण से कोई संबंध नहीं है।

Answer: (A)

8. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक व्यवसाय और उसके पर्यावरण के बीच सही संबंध दर्शाता है?

Which correctly relates a primary occupation to its environment?

(A) घासभूमि — पशुपालन

(B) खनिज क्षेत्र — मत्स्य ग्रहण

(C) नदी — खनन ही केवल

(D) वन — बैंकिंग

Answer: (A)

9. आखेट एवं संग्रहण आधारित अर्थव्यवस्था की सबसे प्रमुख विशेषता क्या है?

What is the major characteristic of hunting and gathering economy?

(A) पूर्णतः स्थायी कृषि

(B) अत्यधिक औद्योगिकीकरण

(C) स्थानीय प्राकृतिक पर्यावरण पर अत्यधिक निर्भरता

(D) बड़े पैमाने का विनिर्माण

Answer: (C)

10. निम्न में से कौन-सा आखेट एवं संग्रहण से संबंधित नहीं है?

Which is NOT associated with hunting and gathering?

(A) फल एवं जड़ें एकत्र करना

(B) पशु-पक्षियों का आखेट

(C) मछली पकड़ना

(D) बड़े पैमाने पर मशीन आधारित उद्योग

Answer: (D)

11. निम्न में से कौन-सा समूह source के अनुसार आखेट-संग्रहण से संबंधित समुदायों का उदाहरण देता है?

Which group represents communities associated with hunting and gathering according to the source?

(A) पिग्मी, सेमांग, बुशमैन

(B) मसाई, फुलानी, बद्दू

(C) गुज्जर, गद्दी, बकरवाल

(D) डेनमार्क के डेयरी किसान

Answer: (A)

12. उष्ण कटिबंधीय वनों में वाणिज्यिक संग्रहण में निम्न में से किसका संग्रह किया जाता है?

Which may be collected commercially in tropical forests?

(A) लाख, गोंद एवं जड़ी-बूटियाँ

(B) केवल गेहूँ

(C) केवल कोयला

(D) केवल लौह-अयस्क

Answer: (A)

13. आखेट-संग्रहण समुदायों की प्राकृतिक पर्यावरण के प्रति गहरी जानकारी का प्रमुख कारण क्या है?

Why do hunting-gathering communities possess detailed knowledge of their natural environment?

(A) उनकी आवश्यकताओं का बड़ा भाग स्थानीय पर्यावरण से पूरा होता है।

(B) वे केवल आधुनिक उद्योगों पर निर्भर होते हैं।

(C) वे स्थायी कृषि करते हैं।

(D) वे केवल आयातित वस्तुओं का उपयोग करते हैं।

Answer: (A)

14. पशुपालन के विकास के संदर्भ में निम्न में से कौन-सा क्रम source की व्याख्या से सर्वाधिक संगत है?

Which sequence is most consistent with the source’s explanation of the development of pastoralism?

(A) व्यापार के बाद संग्रहण का विकास

(B) उद्योग के बाद आखेट का विकास

(C) आखेट-संग्रहण के बाद पशुपालन का विकास

(D) कृषि के बाद ही सभी प्रकार के पशुपालन का विकास

Answer: (C)

15. निम्न में से कौन-सा पशु-पर्यावरण का सही युग्म है?

Which is the correctly matched animal-environment pair?

(A) मरुस्थल — ऊँट

(B) टुण्ड्रा — गाय-बैल

(C) सवाना — याक

(D) तिब्बत — ऊँट

Answer: (A)

16. तिब्बत एवं हिमालय के पर्वतीय प्रदेशों में किस पशु का पालन source में बताया गया है?

Which animal is associated with pastoralism in Tibet and Himalayan mountainous regions?

(A) Camel

(B) Yak

(C) Reindeer

(D) Alpaca

Answer: (B)

17. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन की मूल विशेषता है?

Which is a basic characteristic of nomadic pastoralism?

(A) चारे एवं पानी की खोज में स्थान परिवर्तन

(B) एक ही खेत में स्थायी फसल उत्पादन

(C) केवल urban market services

(D) पूर्णतः factory-based livestock production

Answer: (A)

18. चलवासी पशुपालक अपने स्थान परिवर्तन के दौरान मुख्यतः किन संसाधनों की खोज करते हैं?

Which resources primarily determine the movement of nomadic pastoralists?

(A) चारा और पानी

(B) कोयला और लौह-अयस्क

(C) बाजार और बैंक

(D) कारखाने और बंदरगाह

Answer: (A)

19. निम्न में से कौन-सा चलवासी पशुपालन का क्षेत्र source में उल्लिखित है?

Which is an area of nomadic pastoralism mentioned in the source?

(A) सहारा मरुस्थल

(B) अमेजन का शहरी क्षेत्र

(C) पश्चिमी यूरोप का औद्योगिक क्षेत्र

(D) जापान का महानगरीय क्षेत्र

Answer: (A)

20. निम्न में से कौन-सा समुदाय चलवासी पशुपालन से संबंधित है?

Which community is associated with nomadic pastoralism?

(A) मसाई

(B) डेनिश डेयरी किसान

(C) पम्पास के आधुनिक कृषक

(D) कनाडाई लकड़ी उद्योग कर्मी

Answer: (A)

21. पर्वतीय क्षेत्रों में ग्रीष्म ऋतु में ऊँचाई की ओर और शीत ऋतु में घाटियों की ओर पशुपालकों का जाना कहलाता है—

Seasonal movement of pastoralists to higher elevations in summer and valleys in winter is called:

(A) Transhumance / ऋतु प्रवास

(B) Plantation

(C) Shifting cultivation

(D) Truck farming

Answer: (A)

22. निम्न में से कौन-सा ऋतु प्रवास का सही उदाहरण है?

Which is an example of transhumance?

(A) कनाडा के औद्योगिक श्रमिक

(B) सहारा के स्थायी कृषक

(C) हिमालय के गुज्जर, गद्दी एवं बकरवाल

(D) डेनमार्क के डेयरी किसान

Answer: (C)

23. निम्न में से कौन-सा कथन Transhumance को Nomadic Pastoralism से अलग करता है?

Which distinguishes transhumance from nomadic pastoralism?

(A) Transhumance में seasonal movement एक अपेक्षाकृत निश्चित ऊर्ध्वाधर/क्षेत्रीय pattern का अनुसरण करता है।

(B) Transhumance में पशुपालन नहीं होता।

(C) Nomadic pastoralism में कभी movement नहीं होता।

(D) दोनों में कोई अंतर नहीं है।

Answer: (A)

24. आधुनिक काल में कुछ क्षेत्रों में चलवासी पशुपालन के स्थान पर व्यापारिक पशुपालन आने का एक प्रमुख कारण क्या बताया गया है?

What is one reason for the replacement of nomadic pastoralism by commercial livestock farming in some regions?

(A) कृषि का पूर्ण अंत

(B) प्राकृतिक संसाधनों का पूर्ण अभाव

(C) पशुओं का विलुप्त होना

(D) उद्योगों एवं आधुनिक सुविधाओं का विकास 

Answer: (D)

25. व्यापारिक पशुपालन की कौन-सी विशेषता उसे चलवासी पशुपालन से अलग करती है?

Which feature distinguishes commercial livestock farming from nomadic pastoralism?

(A) पशुपालक एक स्थान पर रहकर वैज्ञानिक एवं व्यापारिक तरीके अपनाते हैं।

(B) वे लगातार नए चरागाह खोजते हैं।

(C) वे केवल प्राकृतिक घास पर निर्भर रहते हैं।

(D) वे बाजार से पूर्णतः कटे रहते हैं।

Answer: (A)

26. व्यापारिक पशुपालन में चारे की फसलों की खेती का क्या महत्व है?

What is the significance of fodder cultivation in commercial livestock farming?

(A) पशुओं के लिए नियंत्रित एवं पौष्टिक चारा उपलब्ध कराना

(B) पशुपालकों को प्रवास के लिए बाध्य करना

(C) प्राकृतिक चरागाह समाप्त करना ही इसका उद्देश्य है।

(D) केवल निर्यात फसल पैदा करना

Answer: (A)

27. निम्न में से कौन-सा व्यापारिक पशुपालन का प्रमुख क्षेत्र source में उल्लिखित है?

Which is a major region of commercial livestock farming mentioned in the source?

(A) उत्तरी अमेरिका का प्रेयरी क्षेत्र

(B) सहारा का केंद्रीय मरुस्थल ही

(C) हिमालय का प्रत्येक भाग

(D) अमेजन का प्रत्येक भाग

Answer: (A)

28. व्यापारिक पशुपालन में नस्ल सुधार एवं रोग नियंत्रण का महत्व किस बात को दर्शाता है?

What does emphasis on breeding and disease control indicate in commercial livestock farming?

(A) इसका वैज्ञानिक एवं बाजारोन्मुख स्वरूप

(B) इसका पूर्णतः निर्वाह स्वरूप

(C) इसका पर्यावरण से पूर्ण विच्छेद

(D) इसका केवल खानाबदोश स्वरूप

Answer: (A)

29. लकड़ी काटने का व्यापारिक विकास विशेष रूप से किस प्रकार के वन प्रदेश में हुआ?

Commercial logging developed particularly in which forest region?

(A) मरुस्थलीय प्रदेश

(B) शंकुधारी वन प्रदेश

(C) टुण्ड्रा का बर्फीला क्षेत्र

(D) घासभूमि

Answer: (B)

30. निम्न में से कौन-सा लकड़ी काटने वाले प्रमुख देशों का समूह है?

Which group represents major commercial logging countries mentioned in the source?

(A) अर्जेंटीना, ब्राजील, वेनेजुएला, उरुग्वे

(B) मिस्र, सऊदी अरब, लीबिया, चाड

(C) भारत, श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया

(D) स्वीडन, फिनलैंड, रूस, कनाडा 

Answer: (D)

31. लकड़ी से लुग्दी एवं कागज बनाने वाले उद्योगों का वनों से संबंध किस प्रकार का है?

What is the relationship between pulp and paper industries and forests?

(A) वन कच्चा माल प्रदान करते हैं।

(B) वन केवल बाजार प्रदान करते हैं।

(C) वन केवल श्रमिक प्रदान करते हैं।

(D) वन का कोई संबंध नहीं है।

Answer: (A)

32. मध्य अक्षांशीय तटीय प्रदेशों में व्यापारिक मत्स्य ग्रहण के विकास में कौन-सा कारक महत्वपूर्ण है?

Which factor is important for commercial fishing in middle-latitude coastal regions?

(A) शक्तिचालित नावों एवं जलपोतों का उपयोग

(B) केवल पारंपरिक भाले

(C) केवल ऊँट परिवहन

(D) केवल वर्षा जल

Answer: (A)

33. बड़े मत्स्य जहाजों में मछलियों को संसाधित एवं पैक करने की सुविधा किस प्रवृत्ति को दर्शाती है?

Processing and packing fish aboard large fishing vessels indicates:

(A) मत्स्य व्यवसाय का औद्योगिक एवं व्यापारिक स्वरूप

(B) केवल निर्वाह मत्स्य ग्रहण

(C) पशुपालन

(D) स्थानान्तरी कृषि

Answer: (A)

34. खनन को प्राथमिक व्यवसाय क्यों माना जाता है?

Why is mining classified as a primary occupation?

(A) इसमें पृथ्वी से प्राकृतिक खनिज संसाधनों का प्रत्यक्ष निष्कर्षण होता है।

(B) इसमें केवल manufactured goods बेचे जाते हैं।

(C) इसमें केवल financial services होती हैं।

(D) इसमें केवल research किया जाता है।

Answer: (A)

35. निम्न में से कौन-सा खनन के व्यापारिक दोहन को प्रभावित करने वाला कारक नहीं है?

Which is NOT a factor affecting commercial exploitation of minerals?

(A) अयस्क की मांग

(B) अयस्क की गुणवत्ता

(C) खान की गहराई एवं सुगम्यता

(D) केवल देश की भाषा

Answer: (D)

36. खनिजों के वितरण के संबंध में कौन-सा कथन सही है?

Which statement is correct regarding mineral distribution?

(A) खनिजों का वितरण असमान है और अधिकांश खनिज non-renewable हैं।

(B) सभी देश खनिजों में आत्मनिर्भर हैं।

(C) सभी खनिज renewable हैं।

(D) खनिज पूरे विश्व में समान रूप से वितरित हैं।

Answer: (A)

37. खनन प्रारम्भ होने के बाद किसी क्षेत्र में परिवहन सुविधाओं के विकास और बस्ती विस्तार का क्या संबंध हो सकता है?

What may be the relationship between mining and transport/settlement development?

(A) खनन के कारण परिवहन सुविधाएँ विकसित हो सकती हैं और लोगों का आगमन बढ़ सकता है।

(B) खनन हमेशा बस्तियों को समाप्त करता है।

(C) खनन का परिवहन से कोई संबंध नहीं है।

(D) खनन केवल समुद्र में होता है।

Answer: (A)

38. पेट्रोलियम शोधनशालाओं के संदर्भ में source में कौन-सा तर्क दिया गया है?

What reasoning is given in the source regarding petroleum refineries?

(A) अशुद्ध पेट्रोलियम का परिवहन कई petroleum products की तुलना में सस्ता हो सकता है।

(B) पेट्रोलियम का परिवहन असंभव है।

(C) सभी refineries केवल खानों के ऊपर स्थापित होती हैं।

(D) पेट्रोलियम का कोई परिवहन नहीं होता।

Answer: (A)

39. कृषि के विकास के संदर्भ में सबसे प्राचीन रूप किसे बताया गया है?

Which is described as the oldest form of agriculture?

(A) स्थानान्तरी कृषि

(B) रोपण कृषि

(C) मिश्रित कृषि

(D) ट्रक फार्मिंग

Answer: (A)

40. स्थानान्तरी कृषि की मूल प्रक्रिया में क्या शामिल है?

What is involved in the basic process of shifting cultivation?

(A) वनस्पति को काटना-जला कर भूमि साफ करना और कुछ वर्षों बाद दूसरी भूमि पर जाना

(B) स्थायी खेतों में लगातार एक ही भूमि पर खेती करना

(C) केवल greenhouse cultivation

(D) केवल commercial dairy farming

Answer: (A)

41. स्थानान्तरी कृषि में भूमि को कुछ वर्षों के बाद छोड़ने का प्रमुख कारण क्या है?

Why is land left fallow after a few years in shifting cultivation?

(A) समुद्री जल का बढ़ना

(B) भूमि की उर्वरता/उत्पादकता में कमी और नए क्षेत्र की आवश्यकता

(C) उद्योगों की अधिकता

(D) बाजार का पूर्ण अभाव

Answer: (B)

42. निम्न में से कौन-सा स्थानान्तरी कृषि का प्रमुख क्षेत्र source में बताया गया है?

Which is a major area of shifting cultivation mentioned in the source?

(A) उष्ण कटिबंधीय वन

(B) शीतोष्ण घासभूमि ही

(C) मरुस्थलीय क्षेत्र ही

(D) ध्रुवीय हिम क्षेत्र

Answer: (A)

43. स्थायी कृषि के विकास का एक प्रमुख सामाजिक-भौगोलिक परिणाम क्या था?

What was a major socio-geographical consequence of permanent agriculture?

(A) अतिरिक्त खाद्यान्न समाप्त हो गया।

(B) मानव पूरी तरह खानाबदोश बन गया।

(C) परिवहन समाप्त हो गया।

(D) स्थायी बस्तियों को प्रोत्साहन मिला।

Answer: (D)

44. व्यापारिक कृषि की प्रमुख विशेषता क्या है?

What is a major characteristic of commercial agriculture?

(A) बाजार/निर्यात के लिए विशेष फसलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन

(B) केवल स्थानीय निर्वाह के लिए उत्पादन

(C) केवल जंगली पौधों का संग्रहण

(D) केवल पशुपालन

Answer: (A)

45. रोपण कृषि को कृषि का विशिष्टीकृत रूप क्यों कहा जाता है?

Why is plantation agriculture considered a specialized form of agriculture?

(A) केवल वन्य उत्पादों का संग्रहण

(B) केवल छोटे घरेलू खेतों में खाद्यान्न उत्पादन

(C) केवल पशुपालन

(D) बड़े क्षेत्र में चाय, कॉफी, रबर आदि विशेष फसलों का मुख्यतः व्यापारिक/निर्यात उद्देश्य से उत्पादन

Answer: (D)

46. निम्न में से कौन-सा रोपण कृषि का सही समूह है?

Which is the correct group of plantation crops?

(A) चाय, कॉफी, रबर

(B) गेहूँ, जौ, बाजरा

(C) चना, मसूर, मटर

(D) केवल घास और चारा

Answer: (A)

47. मिश्रित कृषि की सबसे उपयुक्त पहचान क्या है?

What best identifies mixed farming?

(A) फसल उत्पादन और पशुपालन का एक साथ होना

(B) केवल फल उत्पादन

(C) केवल पशुपालन

(D) केवल वन संग्रहण

Answer: (A)

48. ट्रक फार्मिंग मुख्यतः किससे संबंधित है?

Truck farming is mainly associated with:

(A) मरुस्थल में ऊँट पालन

(B) नगरीय क्षेत्रों के समीप साग-सब्जियों की कृषि

(C) पर्वतीय क्षेत्रों में याक पालन

(D) समुद्र में मत्स्य ग्रहण

Answer: (B)

49. उद्यान कृषि का प्रमुख स्थानिक संबंध किससे है?

What is the major locational association of horticulture mentioned in the source?

(A) केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में कृषि

(B) केवल खनिज क्षेत्रों में कृषि

(C) नगरीय उपभोग केन्द्रों के समीप फल एवं फूलों की कृषि

(D) केवल समुद्र के भीतर कृषि

Answer: (C)

50. निम्न में से कौन-सा प्राथमिक आर्थिक गतिविधियों के बदलते स्वरूप को सबसे अच्छी तरह दर्शाता है?

Which best represents the changing nature of primary economic activities?

(A) प्रकृति से पूर्ण स्वतंत्रता

(B) निर्वाह से व्यापारिक एवं वैज्ञानिक उत्पादन की ओर बढ़ता विशिष्टीकरण

(C) प्राथमिक गतिविधियों का पूर्ण अंत

(D) केवल शिकार पर स्थायी निर्भरता

Answer: (B)

20. Meaning and Scope of Economic Geography (आर्थिक भूगोल का अर्थ एवं विषय-क्षेत्र)

Meaning and Scope of Economic Geography

(आर्थिक भूगोल का अर्थ एवं विषय-क्षेत्र)



प्रश्न प्रारूप

Q. आर्थिक भूगोल को परिभाषित करते हुए इसके विषय-क्षेत्र एवं नूतन प्रवृतियों की विवेचना कीजिए।

Meaning and Scope of Economic

उत्तर- पृथ्वी मानव का घर है और मानव व पृथ्वी तल दोनों ही तथ्य अस्थिर एवं परिवर्तनशील हैं। पृथ्वी की भौतिक परिस्थितियों और मानव के कार्य-कलापों के पारस्परिक सम्बन्धों का अध्ययन मानव भूगोल के अन्तर्गत किया जाता है। आर्थिक भूगोल, मानव भूगोल की एक महत्वपूर्ण शाखा है। इस शाखा के जन्मदाता गोट्ज (1882) थे। इसके अध्ययन में हम मानव की आर्थिक क्रियाओं का ही अध्ययन करते हैं। मानव की आकांक्षाएं एवं आवश्यकताएं अत्यधिक असीमित और विविध हैं। इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मानव अनेक वस्तुओं का उत्पादन करता है तथा जिन वस्तुओं का उत्पादन नहीं कर सकता उनका क्रय करता है तथा अपने द्वारा उत्पादित वस्तुओं से उनका विनिमय करता है।

       प्रो. मेकफरलेन के अनुसार आर्थिक भूगोल के अध्ययन में हम मानव के आर्थिक प्रयत्नों पर भौगोलिक तथा भौतिक पर्यावरण के प्रभाव का अध्ययन करते हैं।

      प्रो. जी. चिशौल्म के अनुसार आर्थिक भूगोल में हम उन भौगोलिक परिस्थितियों का अध्ययन करते हैं जो वस्तुओं के उत्पादन, परिवहन तथा विनिमय को प्रभावित करती हैं।   

        इस अध्ययन के माध्यम से किसी प्रदेश अथवा क्षेत्र के भावी आर्थिक और व्यापारिक क्रियाओं पर पड़ने वाले भौगोलिक प्रभावों के अध्ययन का सम्मिलित प्रभाव भी जाना जाता है।

      सुप्रसिद्ध भूगोलवेत्ता हंटिंगटन जीविकोपार्जन प्रदान करने वाले सभी प्रकार के पदार्थों, साधनों, क्रियाओं, रीति-रिवाजों तथा मानव शक्तियों का अध्ययन आर्थिक भूगोल के क्षेत्र में मानते हैं।

       प्रो. शॉ के अनुसार मानव की आर्थिक क्रियाएं विश्व के उद्योगो, संसाधनों तथा औद्योगिक उत्पादन के अनुरूप होती हैं।

       इसी प्रकार डॉ. एन. जी. जे. पाउण्ड्स के अनुसार आर्थिक भूगोल भू-पृष्ठ पर मानव की उत्पादन क्रियाओं के वितरण का अध्ययन है।

      प्रो. रैयन तथा बैगस्टन के शब्दों में आर्थिक भूगोल के अध्ययन में विश्व के भिन्न-भिन्न भागों में मिलने वाले आधारभूत संसाधन एवं स्रोतों का अध्ययन किया जाता है। इन स्रोतों के शोषण पर पड़ने वाली भौतिक परिस्थितियों के प्रभाव की विवेचना की जाती है। विभिन्न प्रदेशों के आर्थिक विकास के अन्तर की व्याख्या की जाती है।

       भूगोल की अन्य शाखाओं की भांति आर्थिक भूगोल की विषय-वस्तु एवं विषय-क्षेत्र पर भूगोलवेत्ताओं के विचारों में पर्याप्त मतभेद रहा है। कुछ विद्वान मानव के भौतिक तथा सांस्कृतिक पर्यावरण के अध्ययन को अधिक महत्व देते हैं, तो कुछ मानव की आर्थिक क्रियाओं तथा जीविकोपार्जन के अनेकानेक साधनों के अध्ययन को मुख्य मानते हैं। संक्षेप में विश्व के विभिन्न भागों में मिलने वाले खनिज, कृषि, औद्योगिक साधनों का उत्पादन, उपभोग, वितरण, परिवहन तथा व्यापारिक अध्ययन आर्थिक भूगोल के अन्तर्गत किया जाता है।

         वर्तमान में मानव ने विज्ञान और तकनीक की सहायता से आशानुरूप विकास कर लिया है। मानव ने अपने आर्थिक क्षेत्र का विस्तार, समुद्र, भू-गर्भ और अन्तरिक्ष तक कर लिया है। व्यावहारिक जगत में आर्थिक भूगोल के अध्ययन का अत्यधिक महत्व है; इसके अध्ययन के माध्यम से कृषक, श्रमिक, व्यापारी, उद्योगपति तथा राजनीतिज्ञ सव ही लाभान्वित होते हैं।

         विभिन्न देशों को अपनी आर्थिक क्षमता बढ़ाने तथा विकास की भावी योजनाओं के निर्माण में आर्थिक भूगोल के अध्ययन को आधार बनाना पड़ता है। किसी प्रदेश के आर्थिक साधनों का उच्चतम सीमा तक विकास कर वहां की बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए जीविकोपार्जन के साधन सुलभ किए जा सकते हैं। किसी देश की अर्थव्यवस्था को सन्तुलित तथा मानव शक्ति को उत्पादन क्रिया से सम्बद्ध करने में आर्थिक भूगोल का योगदान बड़ा महत्वपूर्ण होता है।

        मानव की आधुनिक अनुसन्धान एवं अन्वेषण की प्रवृत्ति ने मानव के आर्थिक क्रिया-कलापों को और अधिक विस्तृत बना दिया है।

        इस विषय की मुख्य संकल्पनाएँ निम्नलिखित हैं-

(1) आर्थिक भू-दृश्य:-

     इसमें किसी प्रदेश के आर्थिक व्यक्तित्व को अभिव्यक्त किया जाता है। मानव द्वारा प्राकृतिक साधनों के अधिकाधिक उपयोग पर बल दिया जाता है।

(2) गत्यात्मक आर्थिक भू-दृश्य:-

     इस संकल्पना में सदैव परिवर्तन एवं विकास के तत्व को महत्व दिया गया है। जहां आर्थिक भू-दृश्य भूतकाल के आर्थिक कार्यों का परिणाम है, वहां गत्यात्मक आर्थिक भू-दृश्य पुरोगामी और भावी विकास की सम्भावनाओं को व्यक्त करता है।

(3) वर्तमान आर्थिक भू-दृश्य:-

     ये संसाधन, संरचना, आर्थिक विकास एवं आर्थिक प्रक्रिया द्वारा उपलब्धि के परिचायक हैं। वहां की आर्थिक स्थिति को विकासावस्था स्तर भी प्रकट करते हैं। युवावस्था में संसाधनों के शोषण के अवसर उपलब्ध रहते हैं; चरमोत्कर्ष की परिपक्व अवस्था में संसाधनो के उच्चतम उपभोग एवं वृद्धावस्था में विकास की अवरुद्ध एवं धीमी प्रगति के आसार दृष्टिगोचर होते रहते हैं।

(4) आर्थिक क्रिया-कलापों की स्थिति में सिद्धान्तों और नियमों के आधार पर स्थिति-स्थापना तथा वितरण की व्याख्या की जाती है। इसमे विषय-वस्तु उपागम तथा प्रादेशिक उपागम को आधार बना कर अध्ययन किया जाता है।

(5) क्षेत्रीय आर्थिक भिन्नता के साथ-साथ सांस्कृतिक एवं जैविक भिन्नता के अन्तर के परिणामस्वरूप उपलब्धि के स्तर में भी भिन्नता मिलती है।

(6) क्षेत्रीय क्रियात्मक अन्योन्यक्रिया में विभिन्न प्रदेशो में विचित्र-सा पारस्परिक क्रियात्मक अन्तर सम्बन्ध दृष्टिगोचर होता है। यह सम्बन्ध लम्बवत् और क्षैतिज दोनों प्रकार का होता है।

(7) भू-दृश्यों का क्षेत्रीय कार्यात्मक सगठन संकेन्द्रीय और समान दोनों प्रकार का होता है। इसमें पारस्परिक सम्बन्ध कहीं स्पष्ट तो कहीं अस्पष्ट होता है। अस्पष्ट सम्बन्धों को परिवहन और संचारवाहन से सम्बद्ध किया जाता है।

(8) क्षेत्रीय आर्थिक विकास संकल्पना में विकास की तुलना, अन्य प्रदेशों से सांस्कृतिक तथा तकनीकी प्रगति और प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर की जाती है। प्रगति के लिए क्षेत्र विशेष के आर्थिक संसाधनों के विकास पर अधिकाधिक बल दिया जाता है।

आर्थिक भूगोल के अध्ययन उपागम एवं विधियाँ

(APPROACHES AND METHODS OF ECONOMIC GEOGRAPHY)

     आर्थिक भूगोल के सन्तुलित अध्ययन के लिए कई उपागमों व अध्ययन विधियों का प्रयोग किया जाता है, जो कि एक-दूसरे की पूरक हैं। निम्नांकित चार उपागम अध्ययन दृष्टि से महत्वपूर्ण है।

(1) वस्तुगत उपागम (Commodity Approach):-

     इस उपागम के अन्तर्गत विभिन्न वस्तुओं, जैसे- गेहूं, चावल, गन्ना, लोहा, पेट्रोलियम आदि के उत्पादन एवं वितरण का व्यवस्थित अध्ययन किया जाता है। किन्तु कुछ विद्वान इस उपागम में वस्तुओं के उत्पादन एवं वितरण का विश्लेषण न करके व्यवसाय का वितरण और विश्लेषण करते हैं। जैसे- कृषि व्यवसाय, वस्तु संग्रह एवं आखेट व्यवसाय, खनन व्यवसाय, उद्योग आदि। इस कारण इस उपागम को ‘व्यवसाय उपागम’ (Occupational Approach) भी कहा जाता है।

(2) प्रादेशिक उपागम (Regional Approach):-

      इस उपागम के अन्तर्गत सर्वप्रथम विश्व को कुछ बृहत् प्राकृतिक प्रदेशों में विभक्त कर लिया जाता है और प्रत्येक प्रदेश के प्राकृतिक वातावरण तथा विभिन्न वस्तुओं के वितरण प्रतिरूप का अध्ययन एवं विश्लेषण किया जाता है।

(3) सैद्धान्तिक उपागम (Theoretical Approach):-

      इस उपागम के अन्तर्गत किसी भी वस्तु या प्रदेश की विशेषताओं एवं वितरण प्रतिरूप का अध्ययन पूर्व निर्धारित सिद्धान्तों के सन्दर्भ में किया जाता है। इस अध्ययन विधि से मुख्यतः सिद्धांतों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण माना जाता है, न कि वितरण प्रतिरूप का विश्लेषण करना।

(4) क्रमबद्ध उपागम (Systematic Approach):-

     इस उपागम के अन्तर्गत वस्तुओं के वितरण की सामान्य विशेषताओं का क्रमबद्ध विश्लेषण किया जाता है। यह क्रमबद्ध अध्ययन तीन चरणों में सम्पन्न किया जाता है:-

(1) प्रथम चरण में किसी भी वस्तु की स्थिति तथा वितरण के प्रतिरूप का अध्ययन किया जाता है।

(ii) द्वितीय चरण में उस वस्तु विशेष की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।

(iii) तृतीय चण में उस वस्तु का अन्य प्राकृतिक एवं मानवीय तत्वों से सम्बन्ध का विश्लेषण किया जाता है। ये अन्तर्सम्बन्ध ‘कार्यकरण सम्बन्ध’ (Cause and Effect Relationship), ‘क्रियात्मक सम्बन्ध’ (Functional Relationship) तथा ‘क्षेत्रीय सम्बन्ध’ (Areal Relationship) के रूप व्यक्त किए जाते हैं।

3. Water use, Problems and Conservation in India (भारत में जल उपयोग, समस्या तथा संरक्षण)

Water use, Problems and Conservation in India

(भारत में जल उपयोग, समस्या तथा संरक्षण)



Q. भारत में जल संसाधनों के संरक्षण की आवश्यकता एवं उपयोगिता पर चर्चा कीजिए। 

       जल प्राकृ‌तिक संसाधन है। मानव सहित जैविक संसार के जीव-जंतुओं के लिए जल अनिवार्य है। यही कारण है कि जल को जीवन से तुलना की जाती है। जल को लेकर यहाँ तक कहा जाने लगा है कि अगला विश्वयुद्ध जल के कारण ही लड़ा जायेगा। पूरे विश्व के 71% भाग पर समुद्री जल का विस्तार हुआ है। कुल स्वच्छ जल की 97% भाग अण्टार्कटिका या ध्रुवीय क्षेत्र में अवस्थित है। शेष तीन 3% जल स्थल पर जलाशयों और भूमिगत जल के रूप में अवस्थित है।

Water use

      हमारी पृथ्वी के ऊपर 480 लाख घन किमी० जल उपलब्ध है। उनमें से कुछ जल वायुमण्डल में कुछ जल भूमिगत जल के रूप में और शेष जल महाद्वीप और महासागर के रूप में अवस्थित है। भारत जल संसाधन के मामले में एक धनी राष्ट्र है। जल रूपी प्राकृतिक संसाधन का भारत में कई तरह से उपयोग में लाये जाते हैं। जैसे:-

(1) सिंचाई के रूप में:-

     जल का उपयोग किसानों के द्वारा कसल के उत्पादन हेतु सदियों से किया जाता रहा है। इसके लिए किसान नहर, नलकूप, कुंआ, तालाब और परम्परागत संसाधनों का उपयोग करते हैं। किसान इन जलाशयों से जल का दोहन कर फसल को शुष्क मौसम में सिंचाई कर बचाने का प्रयास करते हैं। हरित क्रांति ने यह साबित कर दिया है कि सिंचाई, फसलों के उत्पादन और उत्पादकता के बीच सह संबंध पायी जाती है अर्थात् जितना अधिक सिंचाई होगा उतना ही अधिक फसल उत्पादन होने की संभावना होती है।

(2) जलविद्युत के उत्पादन में:-

      तापीय ऊर्जा के उत्पादन से कई पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होने लगी है। अत: इसके विकल्प के रूप में नदियों पर बड़े-2 बाँधों का निर्माण कर जलविद्युत का उत्पादन किया जा रहा है। भारत का पहला जलविद्युत केन्द्र शिवसमुद्रम (1902 ई०) है। भारत में सबसे बड़ा जल-विद्युत केन्द्र भाखड़ा-नांगल टेहरी है।

       भारत जलविद्युत उत्पादन हेतु लगभग सभी बड़े-बड़े नदियों पर बाँधों का निर्माण कर चुका है और जिन पर नहीं हुआ है उस पर बाँध बनाने की योजना प्रस्तावित है। भारत की नदियों से 8400 मेगावाट, जलविद्युत का उत्पादन किया जा सकता है। वर्तमान समय में भारत के कुल विद्युत उत्पादन में 24-27% योगदान जलविद्युत का है।

(3) पेयजल के रूप में:-

      प्रत्येक जीव अपना प्यास जल का सेवन कर बुझाते हैं। इस तरह जल प्रमुख पोषक तत्त्व के रूप में शामिल हो जाता है। पेयजल की आवश्यकता ग्रामीण एवं नगरीय दोनों क्षेत्रों में है। एक अनुमानित आंकड़ा के अनुसार भारत के मात्र 63% घरों में ही पेयजल की सुविधा उपलब्ध है। इनमें भी मात्र 56% ग्रामीण क्षेत्र में 81.5% नगरी क्षेत्र में पेयजल की सुविधा उपलब्ध है।

    ग्रामीण क्षेत्र में पेयजल भूमिगत जल से पूर्ति की जाती है। वहीं नगरीय क्षेत्रों में पास में अवस्थित जलशयों से की जाती है।

(4) घरेलू कार्य के रूप में:-

       भारत में जल का प्रयोग घरेलू कार्यों के रूप में भी बड़े पैमाने पर की जाती है। जैसे- स्नान करने में, सफाई कार्य में, खाना बनाने में इत्यादि में।

(5) सौद्योगिक उपयोग में:-

      औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त जल की आपूर्ति आवश्यक है। 1972 ई० में स्थापित “सिंचाई आयोग” के अनुसार 50 अरब घन मी० उद्योगों के लिए आवश्यक है लेकिन मात्र 30 अरब घन मी० जल 2000 ई० में उपलब्ध था। 2025 ई0 तक 120 अरब घन मी० औद्योगिक जल की माँग बढ़ने की संभावना है।

(6) परिवहन के रूप में:-

     जल का प्रयोग समुद्री एवं आन्तरिक जल परिवहन के रूप में किया जाता है। आज भारत के 95% अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार समुद्र के माध्यम से होता है। भारत में आन्तरिक परिवहन का विकास पर्याप्त मात्रा में नहीं हुआ है फिर भी हल्दिया से प्रयागराज तक गंगा नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या-1, सदया से दुबरी तक ब्रह्मपुत्र नदी में राष्ट्रीय जलमार्ग संख्या WNH-2, तथा केरल के पास कोवलम को WNH-3 घोषित किया गया है। भारत के डेल्टाई क्षेत्रों में स्थानीय लोग जल का प्रयोग परिवहन के रूप में करते हैं।

(7) जलचक्र के रूप में:-

      जलचक्र हमारे पारिस्थैतिक तंत्र का एक प्रमुख प्रक्रिया है जिसके तहत समुद्री जल वाष्पीकृत होकर आकाश में पहुंचता है जिससे वायुमंडल की आर्द्रता बनी रहती है। पुनः ऊँचाई पर जाकर जलवाष्प संघनित होकर बादलों का निर्माण करती है जिससे वर्षण का कार्य होता है।

      वर्षा जल भारत के विभिन्न जलाशयों में जल की आपूर्ति करती हैं। जलाधिक्य वाले क्षेत्रों से जल नदियों के माध्यम से समुद्र तक पुनः पहुँच जाते हैं। इस संपूर्ण जलचक्र के दौरान अनेक जीव-जन्तु जल ग्रहण करते हैं जिससे हमारे देश की जैविक विविधता और पर्यावरण सुरक्षित रहती है।

(8) पर्यटन के विकास में:-

      जल संघनित होकर बर्फ का निर्माण करती है। पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फ-बारी के कारण पर्यटन उद्योग का विकास बड़े पैमाने पर होता है। बड़े-2 बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजनाएँ इंदिरा गाँधी कमांड कैनाल क्षेत्र भाखड़ा-नांगल बहुद्देशीय नदी घाटी परियोजना की ओर जल के कारण ही आकर्षित होते हैं। वर्तमान समय में हाइड्रोनिकल पार्क जल की महता को और रेखांकित किया है।

(9) मत्स्य पालन के रूप में:-

      इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में जल का प्रयोग कई प्रकार से किया जा रहा है। जब संसाधनों के अत्याधिक दोहन के कारण यह एक विरल प्राकृतिक संसाधन बन चुका है। अतः जल से संबंधित समस्याओं की पहचान कर उनका संरक्षण आवश्यक है।

जल संसाधन से संबंधित समस्याएँ

       भारत में जल संसाधनों से संबंधित समस्याओं को चार शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन कर सकते हैं:-

(1) जल उपलब्धता की समस्या:-

     भारत में सतही जल का अनुमानित भण्डार 1869 अरब घन मी० है। इनमें से मात्र 690 अरब घन मी० जल उपयोग के लिए उपलब्ध है। भारत के कुल भूमिगत जल का मात्र 450 अरब घन मी० जल उपयोग के लिए उपलब्ध है। 2025 ई० तक भारत में 1050 अरब घन मी० जल की आवश्यकता होगी। ये आँकड़े बताते हैं कि 2025 ई० तक जल की कमी नहीं होगी, लेकिन उसके बाद जल की जबड़दस्त कमी की समस्या उत्पन्न होगी।

     भारत में प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता में कमी आ रही है। 1951 ई० में प्रति व्यक्ति 5514 घन मी० जल उपलब्ध था जो 2001 ई० में घटकर 1869 घन मी० जल रह गई जो घटते हुए जल उपलब्धता स्पष्ट संकेत है।

    प्रादेशिक स्तर पर भी जल संसाधन के वितरण में काफी विषमता है। जैसे-सम्पूर्ण उत्तर भारत का मैदानी क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में भूमिगत जल उपलब्ध है। वहीं दक्षिण भारत में भूमिगत जल का घोर अभाव है। भारत का उ०-पूर्वी क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में वर्षा (2000 सेमी० से अधिक) होती है। जबकि उ०-प० भारत और वृष्टिछाया प्रदेशों में 100 सेमी० से भी कम वर्षा होती है।

     भारत में जल की उपलब्धता में मौसम के अनुसार भी विविधता देखी जाती है। जैसे- वर्षा ऋतु में भारत की 90% वर्षा हो जाती है। जबकि शेष ऋतुएं जलाभाव की समस्या से जुझते रहती है।

(2) उपयोग से संबंधित समस्याएँ:-

     सभी के लिए स्वास्थ की सुविधा उपलब्ध करवाना भारत सरकार एवं राज्य सरकारों का मौलिक कर्तव्य है लेकिन लोगों को जो जल पीने के लिए मिल रहा है। वह जल 90% तक प्रदू‌षित हो चुका है। राजस्थान, गुजरात, प० मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में पेयजल की गंभीर समस्या है। “राष्ट्रीय प्रायोगिक आर्थिक शोध परिषद” के रिपोर्टानुसार भारत के आधे से अधिक ग्रामीण घरों में पेयजल का कोई भी साधन मौजूद नहीं है।

     भारत में सिंचाई साधनों का विकास बड़े पैमाने पर हुआ है, लेकिन इसके बावजूद भारत के 2/3 कृषि भूमि वर्षा पर ही निर्भर है। पुनः इसमें क्षेत्रीय विषमताएँ भी देखी जा सकती है।

      भूमिगत जल संसाधन के अत्याधिक दोहन के कारण भूमिगत जल स्तर में भारी गिरावट आ रही है। भारत के 10 राज्यों के 114 जिलों में मई-जून में जिलाधिकारियों को सिंचाई कार्य पर रोक लगानी पड़ती है।

      भारत में सिंचाई के लिए जो जल उपलब्ध है उसका भी मात्र 40% जल का ही प्रयोग हो पाता है। शेष जल बेकार चले जाते हैं। नदियों पर छोटे-2 बाँध के अभाव में वर्षा जल प्रवाहित होकर समुद्र तक पहुंच जाते हैं।

(3) गुणवता की समस्या:-

      भारत में जल प्रदूषण की गंभीर समस्या है। इसका प्रमुख कारण उद्योगों, नगरो, घरेलू अवशिष्ट पदार्थों को जल में प्रवाहित किया जाना है। इसके अलावे कृषि कार्यों में प्रयोग किये जाने वाले रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक है। लोगों की गलत जीवन शैली और धार्मिक रुढ़ि‌वादिता भी जल के प्रदूषित कर रही है।

      जिन क्षेत्रों में बड़े-2 बांधों के निर्माण किया गया है उन क्षेत्रों में नीचले स्तर के घुलनशील रासायनिक पदार्थ के ऊपर आ जाने से जल की गुणवत्ता में कमी आ रही है।

(4) प्रबंधन से संबंधित समस्या:-

        भारत में पर्याप्त मात्रा में जल की मात्रा उपलब्ध है लेकिन उचित प्रबंधन के अभाव में जल बेकार हो रहे हैं। राजनैतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता में कमी आम व्यक्ति में जागरूकता के अभाव जल संसाधन के समक्ष और जटिल समस्याएं उत्पन्न कर रही है। अत: इनका संरक्षण अति आवश्यक है।

जल संरक्षण के उपाय

     जल एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन है जिसका संरक्षण अति आवश्यक है। भारत में जल संरक्षण के लिए जा रहे उपायों को चार शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन करते हैं।

(1) वर्षा जल संग्रहण:-

    भारत में पर्याप्त मात्रा में वर्षा होती है, लेकिन नदियों के माध्यम से जल प्रवाहित होकर समुद्र में चले जाते हैं। अतः वर्षा जल का संग्रहण अनिवार्य है। इसके लिए कई कार्य अपेक्षित है। जैसे- ग्रामीण क्षेत्रों में भूमिगत जल स्तर से बनाये रखने के परम्परागत सिंचाई साधनों को विकसित किया जा रहा है। जैसे- आहर, तालाब, जोहर इत्यादि का पुनर्निर्माण करवाया जा रहा है।

       नगरीय क्षेत्रों में लोगों को नवीन तकनीक पर आधारित जल संग्रहण की हारवेस्टिंग (कटाई/दोहन) के लिए प्रेरित किया जा रहा है। जैसे- नगरीय लोगों के लिए वाटर प्रूफ छत का निर्माण करना अनिवार्य बनाया जा रहा है। इसके तहत छत पर इकट्टा किये गये वर्षा जल को बोरिंग के माध्यम से भूमिगत करने की सलाह दी जाती है। घरों से निकलने वाले अपशिष्ट जल को घर के बाहर गड्डा/गर्त का निर्माण कर जल संग्रहण निर्माण करने की सलाह दी जाती है।

    पर्वतीय एवं पठारीय क्षेत्रों में वर्षा जल का संग्रहण तालाबों एवं झीलों में किया जाता रहा है। उसे पुर्नुद्धार की योजना सरकार की है। भारत के उन जिलों में जहाँ पेय जल की गंभीर समस्या मौजूद है उन जिलों में भूमिगत जल दोहन करने के लिए किसानों को लाइसेन्स दिया जा रहा है ताकि मनमानी तरीके से का दोहन आप नहीं कर सके। मनमाने जल दोहन पर रोक लगाने के लिए सरकार नगरीय क्षेत्रों में टैक्स (कर) वसूला करती है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के किसान आज भी इस दायरे से बाहर है। सरकार की योजना है कि भूमिगत जल दोहन करने वाले किसान से टैक्स वसूला जाय।

      वर्षा जल के संग्रहण हेतु नदियों पर छोटे-2 बाँधों का निर्माण किया जा रहा है तथा उत्तर भारत की नदियों को दक्षिण भारत की नदियों से जोड़ने की एक योजना चल रही है जिसे “राष्ट्रीय जल ग्रीड योजना” के नाम से भी जानते हैं। इसके द्वारा उतर भारत के बाढ़‌ वालें पानी को द० भारत के शुष्क प्रदेश में पहुंचाया जा सकेगा।

(2) जल संभर प्रबंधन / जल संभर विकास योजना:-

    भारत में जल के संरक्षण हेतु जल संभर प्रबंधन योजना (Water Shade Management Porogramme) चलाया जा रहा है। जल विभाजक एक ऐसा उत्थित भूभाग है जहाँ से वर्षा जल दो विपरीत दिशाओं में बहना प्रारंभ करता है। इसके तहत योजना निर्माणकर्ताओं ने कृषि विकास, वन प्रबंधन और जल संरक्षण का उद्देश्य रखा है। हरियाणा के चंडीगढ़ के पास सूखा माजरी गाँव तथा MP के मकगाँवा गाँव के लोगों ने जल सम्भर विकास योजना का लाभ उठाते हुए जल संरक्षण का अभूतपूर्व प्रयास किया है।

(3) जल को अप्रदूषित रखना:-

     जल प्रदूषण का सबसे प्रमुख कारण औद्योगिक कचड़े, नालियों के पानी लौर शौच की जलशयों के किनारे किया जाना इत्यादि है। औद्योगिक इकाईयों को वन एवं पर्यावरण मंत्रालय सख्त निर्देश दे चुका है कि आप जल को उपचारित करने के बाद ही जल को जलाशयों में छोड़े। नगरों से निकलने वाले जल को उपचारित करने के लिए मैला टंकी की स्थापना की गई है। किसानों को रासायनिक उर्वरक के स्थान पर जैव उर्वरक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। 

    जल को सुरक्षित रखने के लिए “विद्युत शवदाह गृह” का निर्माण किया जा रहा है। लोग खुले में शौच परित्याग न कर सके, इसलिए जगह पर “सामुदायिक शौचालय” का निर्माण किया जा रहा है। इस क्षेत्र में विन्देश्वरी पाठक की संस्था “सुलभ इंटरनेशनल” सराहनीय कार्य कर रही है।

अन्य उपाय:-

     जल संसाधन के संरक्षण एवं संवर्धन की दिशा में आधुनिक तकनीक भी कारगर साबित हो रही है। जैसे- वाशिंग मशीन के प्रयोग को बढ़ावा देकर जल की खपत को कम किया जा सकता है। जल संरक्षण पर आधारित विज्ञापन का प्रसारण कर जन जागृति लायी जा सकती है। बढ़ती हुई जनसंख्या और पशुओं की संख्या के कारण जल का निरंतर माँग बढ़ता ही जा रहा है। ऐसे में इनकी संख्या को रोकने वाले कार्यक्रम को त्वरित लागू किया जा रहा है। वन प्रबंधन कर वनों का विस्तार किया जा रहा है ताकि जलचक्र सुचारू रूप से संचालित हो सहे।

निष्कर्ष

       इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में जल संसाधन के संरक्षण एवं संवर्द्धन की दिशा में कई महत्वपूर्ण कार्य किये जा रहे हैं, लेकिन पूर्ण राजनैतिक एवं प्रशासनिक प्रतिबद्धता के अभाव में ये सभी कार्यक्रम अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं।

    अतः इस क्षेत्र में जन जागृति प्रशासनिक एवं राजनैतिक प्रतिबद्धता, जल संरक्षण कार्यक्रम को रोजगार से जोड़‌कर इस कार्यक्रम को त्वरित किया जा सकता है। राजस्थान के अल्वर क्षेत्र में राजेन्द्र सिंह के द्वारा जल संरक्षण का कार्य बड़े पैमाने प किया जा रहा है। अतः उनके ही समान बुद्धिजीवी वर्ग को आगे आकर कार्य कने की आवश्यकता है तभी जल संरक्षण के पूरे लक्ष्य को प्राप्त किया जा सका है।

2. Distribution, use, related prmobles and conservation of land resources in India. (भारत में भूमि संसाधन के वितरण, उपयोग, संबंधित समस्या तथा संरक्षण)

 Distribution, use, related problems and conservation of land resources in India.

(भारत में भूमि संसाधन के वितरण, उपयोग, संबंधित समस्या तथा संरक्षण)



             भूमि एक प्राकृतिक संसाधन है। धरातल के सबसे ऊपरी सतह में मिलने वाला असंगठित पदार्थ को मृदा कहते हैं। चूंकि मृदा में आर्थिक लगान देने की क्षमता होती है। इसलिए इसे संसाधन की श्रेणी में रखते हैं।

     भारत मृदा संसाधन के मामले में एक समृद्ध राष्ट्र है। क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत विश्व का 7वाँ सबसे बड़ा देश है। विश्व के कुल क्षेत्रफल का 2.4% भूभाग भारत के पास उपलब्ध है। इसका क्षेत्रफल 32,87,263 वर्ग किमी० है।

     मुख्य भूमि का विस्तार 8°4′ N से 37°6’N अक्षांश है। जबकि देशान्तरीय विस्तार 687′ से 97°25′ तक है। इसके सीमा का विस्तार 15200 किमी० है। भारत के कुल क्षेत्रफल का 58% भूभाग कृषि योग्य भूमि के अन्तर्गत आता है। यह विश्व के कुल कृषि योग्य भूमि का 11% है।

Distribution

     विशालकाय भूभाग होने के कारण मृदा के ऊपर अनेक प्रकार के भौतिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक कारकों का प्रभाव पड़ता है। इन कारकों के कारण ही अलग-2 क्षेत्र में अलग-2 प्रकार से भूमिका उपयोग किया जाता है।

     भारतीय मृदा संसाधन उपयोग को चार शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन करते हैं:-

(1) वनीय भूमि के रूप में

(2) कृषि कार्य के रूप में

(3) निर्मित भूमि के रूप में

(4) अप्रत्यक्ष एवं प्रत्यक्ष आर्थिक लगान न देने वाली भूमि।

(1) वनीय भूमि के रूप में:-

     पर्यावरण के दृष्टिकोण से भारत में कम से कम 33% भूभाग पर वन होना चाहिए। इसमें भी मैदानी भारत में 20% और पठारी भाग में 60% भूभाग पर वन होना चाहिए। लेकिन भारत के कुल क्षेत्र के मात्र 22.1% भारत पर वन उपलब्ध है। इसमें पंजाब एवं हरियाणा ऐसे राज्य हैं जो वन विहीन है। पूर्वोत्तर, छतीसगढ़, MP, ओडिशा इत्यादि ऐसे राज्य है जहाँ के भूमि पर वन का विस्तार अधिक है।

(2) कृषि वर्ष के रूप में:-

     कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी देश के कुल क्षेत्रफल का 40% भूभाग को ही कृषि कार्य में लगाया जाना चाहिए। लेकिन भारत अपने कुल क्षेत्रफल का 58% भूमि का प्रयोग कृषि क्षेत्र में कर रहा है। इसमें 47% भूभाग प्रत्यक्ष कृषि के रूप में, 7.5% परती भूमि के रूप में, 25% चारे भूमि के रूप में उपयोग किया जा रहा है।

      भारत में सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि मैदानी क्षेत्र में उपलब्ध है। भारतीय मृदा पर अनेक प्रकार के फसलों की कृषि की जाती है जिनमें खाद्यान्न फसल, तेलहन, दलहन एवं नगदी फसल प्रमुख है।

(3) निर्मित क्षेत्र के रूप में:-

      इसके अन्तर्गत भूमि का प्रयोग अधिवासीय माकान के रूप में परिवहन मार्ग में खनन भूमि के रूप में, नगर एवं औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में किया जा रहा है। भूगोलवेत्ताओं के अनुसार किसी भी देश के कुल क्षेत्रफल का 14% भूभाग का प्रयोग निर्मित क्षेत्र के रूप में किया जाना चाहिए। लेकिन वर्तमान समय में 13.5% भूमि प्रयोग इस रूप में कर रहा है।

(4) प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लगान न देने वाली भूमि के रूप में:-

      इसके अन्तर्गत हिमाच्छादित भूमि, चट्टानी भूमि, मरुस्थलीय भूमि, दलदली भूमि में शामिल करते है। पर्यावरणवादियों के अनुसार किसी भी देश में 13% भूभाग पर ऐसी भूमि होनी चाहिए। वर्तमान समय में भारत के पास 13% ऐसे भूमि उपलब्ध है।

     भारत के भूमि प्रयोग प्रतिरूप से स्पष्ट है कि भारत में भू-उपयोग काफी असंतुलित है जिसके कई कारण है। जैसे-

(i) भारत की लगातार बढ़ती हुई जनसंख्या,

(ii) प्रति इकाई भूमि पर बढ़ता हुआ जनसंख्या दबाव,

(iii) कृषि योग्य भूमि में लगातार कमी,

(iv) प्रति वर्ष बड़े पैमाने पर वनों की कटाई,

(v) अवैज्ञानिक कृषि पद्धति, जैस- झूम कृषि, सीढ़ीनुमा कृषि।

(vi) अत्याधिक पशुचारण,

(vii) बड़े पैमाने पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग,

(viii) किसानों के द्वारा फसल चक्र को अपनाया नहीं जाना,

(ix) तीव्र औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण,

(x) बाढ़, सूखाड़, मरुस्थलीकरण, हिमस्खलन, भूस्खलन जैसे प्राकृतिक कारण।

भारतीय मृदाओं की समस्याएँ

      भारतीय मृदा कई मानवीय कारक प्राकृतिक कारक से प्रभावित होती रही है जिसके कारण भारतीय मृदा के समक्ष निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न हुई है-

(1) मृदा अपरदन की समस्या,

(2) घटती मृदा उर्वरता,

(3) जल जमाव की समस्या

(4) भूमि लवणीकरण की समस्या

(5) मरुस्थलीयकरण की समस्या

(1) मृदा अपरदन की समस्या:-

     मृदा के ऊपरी सतह के हटने की क्रिया ‘मृदा अपरदन’ कहलाता है। जब मृदा का ऊपरी भाग एक चादर रूप में फटता है तो उसे ‘परत अपरदन’ या ‘चादर अपरदन’ कहते हैं। अगर जल बहाव के कारण छोटे-बड़े नाली के रूप में मृदा अपरदन होता है, तो उसे गली एवं अवनालिका अपरदन कहते है। चम्बल नदी घाटी क्षेत्र इसके लिए विश्व प्रसिद्ध है।

        भारत में मृदा अपरदन के कई कारक सक्रिय है। जैसे- मरुस्थलीय क्षेत्र में शुष्क वायु और आकस्मिक वर्षा, तटीय क्षेत्र में समुद्री तरंग पर्वतीय क्षेत्र में हिमानी और झूम कृषि मैदानी क्षेत्र में बाढ़ एवं अवैज्ञानिक कृषि पद्धति, पठारी क्षेत्र में खनन कार्य इत्यादि प्रमुख है। अत्याधिक चराई के कारण भारत में सबसे अधिक मृदा का अपरदन शिवालिक क्षेत्र में उत्पन्न हुआ है।

(2) घटती मृदा उर्वरता:-

      भारतीय भूमि पर सैकड़ों वर्षों से कृषि कार्य किया जा रहा है। पुन: हरित क्रांति के दौरान बड़े पैमाने पर रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग किये जाने के  कारण एवं वनीय ह्रास के कारण मृदा के उर्वरता में लगातार कमी आ रही है। किसानों के द्वारा अवैज्ञानिक कृषि पद्धति अपनाये जाने के कारण भी यह समस्या गंभीर होती जा रही है।

      रासायनिक उर्वरक के  प्रयोग किये जाने से मृदा के उर्वरता में सर्वाधिक कमी पंजाब, हरियाणा, प० उत्तर प्रदेश तथा कमाण्ड एरिया प्रोजेक्ट वाले क्षेत्र में उत्पन्न हुई है। अत्यधिक भूमिगत जल संसाधन के दोहन से मृदा में नमी की कमी होने लगती है। कृषि अर्थ में पशुओं के स्थान पर यंत्रों के प्रयोग से भूमि तथा पशु के बीच के सहचर्य में कमी आयी है जिसके चलते भूमि की उर्वरता में लगातार कमी हो रही है।

नोट: भारत में कमांड एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (सीएडीपी) 1974 में भूमि और जल प्रबंधन में सुधार के लिए व्यापक कार्यक्रम के हिस्से के रूप में शुरू किया गया था। इसका प्राथमिक उद्देश्य प्रमुख और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं के कमांड क्षेत्रों में पानी के उपयोग की दक्षता में सुधार करके कृषि उत्पादकता को बढ़ाना था।

(3) जल जमाव के समस्या:-

         भारत में कई क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ पर जल जमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हुई है। जैसे- इंदिरा गाँधी नहर के अतिरिक्त जल को जैसलमेर और बाडमेर को छोड़ दिया जाता है जिसके कारण वहाँ जल जमाव की समस्या उत्पन्न हो गई है। इसी तरह से बहुदेशीय नदी घाटी परियोजना के तहत बड़े-बड़े बाँधों का निर्माण किया जाता है और बाँधों के पीछे बड़ी मात्रा में जल का भण्डारण किया जाता है जिसके कारण उसके इर्द-गिर्द के क्षेत्र में भूमिगत जल ऊपर उठ जाते हैं और जल-जमाव की समस्या उत्पन्न करते है।

(4) भूमि लवणीकरण के समस्या:-

     मृदा में लवण बढ़ने की क्रिया को लवणीकरण कहते हैं। भारत में यह समस्या उन क्षेत्रों में उत्पन्न हुई है जहाँ वर्षा कम और वाष्पीकरण अधिक होती है। पुनः नहरी जल से सिंचाई का कार्य होता है। हरित क्रांति वाले क्षेत्रों में यह एक गंभीर समस्या है।

(5) मरुस्थलीकाण की समस्या:-

      मरुस्थल का विस्तार मरुस्थलीकरण कहलाता है। थार मरुस्थल के पूर्वी उतरी सीमावर्ती क्षेत्रों में यह एक गंभीर समस्या है।

      इस तरह ऊपर के तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत की मृदा कई समस्याओं से ग्रसित है। 

मृदा संरक्षण

     भारत की एक अरब से भी अधिक जनसँख्या के सुपोषण को ध्यान में रखते हुए मृदा संसाधनों के उचित उपयोग तथा संरक्षण पर ध्यान देने की आवश्यक है। मृदा संरक्षण के दिशा में कई उपाय किये जा रहे हैं। जैसे-

(1) वृक्षों  के कटाई पर प्रतिबंध:-

      वृक्षों की कटाई रोकने हेतु कई प्रकार के कानून का निर्माण किया गया है। इस कानून उल्लंघन करने वाले व्यक्ति को दण्ड देने के प्रावधान है। ‘चिपको आंदोलन’ इस दिशा में उल्लेखनीय कार्य कर रहा।

(2) वृक्षारोपण:-

     गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, प० मध्य प्रदेश के किसानों के द्वारा तेज हवाओं से होने वाला मृदा अपरदन को रोकने के लिए मेढ़ वानिकी, कृषि वानिकी का सफल प्रयोग किया गया है। मृदा अपरदन को रोकने हेतु वृक्षारोपण सबसे उपयुक्त उपाय है। अतः इस कार्य के लिए सामजिक वानिकी कार्क्रम को चलाकर वनीय भूमि को बढ़ाया जा रहा है।

(3) स्थानान्तरित कृषि पर प्रतिबंध:-

     इस कृषि के अन्तर्गत नाजूक पर्यावरण में निवास करने वाले आदिवासी समाज जंगलों को काटकर जलाता है और उस पर कृषि का कार्य करता है जिसके कारण बड़े पैमाने पर भूमि की सक्षमता में कमी आती है। अत: भारत सरकार ने 1976 ई० में ही झूम कृषि निषेध कानून बनाकर इस पर निषेध लगाती है।

(4) समोच्च रेखीय जुलाई:-

     पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को समोच्च के अनुरूप हल जुताई के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

(5) बाढ़ नियंत्रण:-

     मृदा ह्रास तथा बाढ़ के बीच में गहरा सह-संबंध है। अतः बाढ़ नियंत्रण हेतु बहुद्देश्यीय नदी घाटी परियोजना, उचित जल प्रबंधन, नदी जोड़ों कार्यक्रम को लागू किया जा रहा है।

(6) परती भूमि पुर्नोद्वार:-

     भारत में लगभग 96 लाख हेक्टेयर भूमि परती भूमि के अन्तर्गत आता है। भारत में सबसे ज्यादा परती भूमि आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और कर्नाटक में उपलब्ध है। परती भूमि पर चारागाह फलोद्यान में विकास दर उसे उपयोग में लाया जा सकता है। बंजर भूमि पर जल भण्डारण कर उर्वर भूमि के रूप में रखा जा सकता है। चम्बल नदी घाटी क्षेत्र में भूमि के समतलीकरण कर अवनलिका अपरदन से निपटा जा रहा है।

(7) लवणीय मृदा उद्धार:-

      भारत में सर्वाधिक लवणीय मृदा UP, पंजाब तथा पश्चिम बंगाल में है। भारत में 80 लाख हेक्टेयर भूमि पर लवणीय मिट्टी के विस्तार हुआ है। लवणीय भूमि पर जिप्सम का प्रयोग कर, गोबर एवं जैविक उर्वरक प्रयोग कर उर्वर भूमि बदला जा सकता है।

(8) अन्य उपाय:-

    मृदा संरक्षण के कई अन्य उपाय भी लाये जा रहे है या लाये जा सकते हैं। जैसे- 

(i) सहायक नदियों पर छोटे-2 बाँधों का निर्माण करना।

(ii) मरुस्थलीय क्षेत्रों में ग्रीन बोल्ट तथा बाड़ का निर्माण करना।

(iii) पशुओं तथा मृदा के बीच में सहचर्य को बढ़ाना।

(iv) जैविक उर्वरक का ज्यादा से ज्यादा प्रयोग करना।

(v) फसल चक्र के उपयोग को बढ़ावा देना।

(vi) सतत् कृषि विकास को बढ़ावा देना।

(vii) Soil Clinic का निर्माण करना।

(viii) USA के तर्ज पर भारत में भी मृदा सेवा केन्द्र तथा मृदा सेवा आन्दोलन को चालाया जाना।

निष्कर्ष:

    इस तरह ऊप के तथ्यों से स्पष्ट‌ है कि भात में मृदा से संबंधित जहाँ कई समस्याएँ उत्पन्न हुई है वहीं उससे निपटने के दिशा में कई संस्थागत एवं संरचनात्मक प्रयास भी किये जा रहे है।

1. Land Resources (भूमि संसाधन)

Land Resources

(भूमि संसाधन)



Q1. भारत में भूमि संसाधन के उपयोग एवं संरक्षण का वर्णन कीजिए।

Q2. भारत में बंजर भूमि प्रबंधन

       भारत प्राकृतिक संसाधनों के मामले में एक धनी राष्ट्र है। भूगोलवेताओं ने संसाधन को परिभाषित करते हुए कहा है कि वह कोई भी वस्तु जो मानव में संतुष्टि प्रदान करता है, उसे संसाधन कहते हैं।” इस परिभाषा के मद्देनजर भूमि भी एक प्राकृतिक संसाधन का ही उदा० बन जाता है। मृदा या भूमि धरातल के सबसे ऊपरी भाग में पायी जाती है जिसका निर्माण जैविक एवं अजैविक तत्वों के ऋतुक्षरण से होता है। मृदा एक प्राकृतिक संसाधन है क्योंकि यह न केवल मानव को संतुष्टि प्रदान करता है बल्कि इससे आर्थिक लगान भी प्राप्त होती है तथा यह अन्य सभी प्राकृतिक संसाधनों का आधार होता है।

Land Resources

     भारत भूमि संसाधन के मामले में एक समृद्ध राष्ट्र है। जैसे क्षेत्रफल के दृष्टिकोण से भारत विश्व का सातवाँ सबसे बड़ा देश है जिसका क्षेत्रफल 32.8 लाख वर्ग किमी० है। पूरे विश्व के क्षेत्रफल का 2.4% भूभाग हमोर देश के पास है। पूरे विश्व के 11% कृषि योग्य भूमि भारत के पास है। भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 58% भूभाग कृषि कार्य के अंतर्गत आते हैं। भारत के पास जितनी भूमि उपलब्ध है उसका उपयोग भिन्न-2 प्रकार से किया जाता है। मोटे तौर पर भारतीय भूमि संसाधन के उपयोग को चार शीर्षकों में बाँटकर अध्ययन करते हैं:-

(1) वनीय क्षेत्र के रूप में:

     पर्यावरण के दृष्टिकोण से भारत के कुल क्षेत्रफल का 33% भूभाग पर वन होना चाहिए था लेकिन भारत के मात्र 22.1% भूभाग पर ही वन उपलब्ध है। इसमें भी मैदानी क्षेत्र में 20% भूभाग पर और पठारी क्षेत्र में 60% भूभाग पर वन होना चाहिए था। लेकिन पंजाब, हरियाणा, दिल्ली इत्यादि ऐसे क्षेत्र हैं जो पूर्णतः वन विहीन हो चुके हैं। भारत में जो वन बचे हुए हैं वो द० भारत, मध्य भारत तथा पर्वतीय ढलानों पर उलब्ध है। बढ़ती हुई जनसंख्या, जनजातीय क्रियाविधि और विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्य के कारण वनों का तेजी से ह्रास हो रहा है। वनीय ह्रास के कारण मृदा में भूमि तापन, आर्द्रता ह्रास एवं अपरदन की समस्या उत्पन्न हो रही है।

(2) कृषि के रूप में:-

     कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी देश के कुल क्षेत्रफल का 40% भूभाग पर ही कृषि कार्य किए जाना चाहिए लेकिन वर्तमान समय में इससे अधिक भूमि पर कृषि कार्य किया जा रहा है। जैसे- 47% भूभाग पर प्रत्यक्ष रूप से कृषि किया जा रहा है। 7.5% परती भूमि के अन्तर्गत शामिल है। 2.5% भूभाग पर पशुचारण किया जा रहा है। इस तरह स्पष्ट है कि अत्याधिक कृषि कार्य एवं पशुपालन के कारण भूमि उपयोग का प्रारूप असंतुलित हो चुका है।

(3) निर्मित क्षेत्र के रूप में:-

     इसके अन्तर्गत अधिवासीय क्षेत्र, परिवहन मार्ग, खनन भूमि, औद्योगिक क्षेत्र, नगरीय क्षेत्र इत्यादि को शामिल करते हैं। भूगोलवेताओं के अनुसार 14% भूभाग पर ही निर्माण का कार्य होना चाहिए लेकिन वर्तमान समय में 13.5% भूभाग पर निर्माण का कार्य हो रहा है।

(4) प्रत्यक्ष आर्थिक लगान न देने वाले भूमि के रूप में:-

     इसके अंतर्गत हिमाच्छादित भूमि, दलदली क्षेत्र, मरुस्थलीय क्षेत्र एवं चट्टानी भूमि को शामिल करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार किसी भी देश में 13% भूभाग ऐसे उपयोग के क्षेत्र में होना चाहिए। हलांकि वर्तमान समय में भारत के पास 13% ऐसे भूमि उपलब्ध है। लेकिन भारत में अप्रत्यक्ष आर्थिक लगान देने वाले भूमि को धीरे-2 प्रत्यक्ष आर्थिक लगान वाले क्षेत्र में शामिल किया जा रहा है।

       इस तरह उपर्युक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में मृदा संसाधन का उपयोग कई प्रकार से किया जा रहा है।

मृदा की समस्यायें

     मृदा संसाधन के अत्याधिक दोहन के कारण कई प्रकार के समस्याओं का अभ्युदय हुआ है। जैसे-

(i) बंजर भूमि का तेजी से विकास हो रहा है। “राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड के अनुसार 175 मिलियन हेक्टयर भूमि बंजर भूमि के रूप में बदल चुका है।

(ii) “भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद” के अनुसार भारत के 60% भूमि के स्वास्थ्य में तेजी से गिरावट आयी है। स्वास्थ्य में गिरावट का तात्पर्य मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीवाणु तथा ह्यूमस में तेजी से ह्रास है। मृदा में उपस्थित आर्द्रता ह्रास की समस्या उत्पन्न हो रही है। भूमि के नंगा होने के कारण मिट्टी का तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। उपरोक्त स्वास्थ्य में गिरावट का प्रमुख कारण अवैज्ञानिक कृषि पद्धति है। पुनः वैज्ञानिक कृषि पद्धति के तहत उर्वरक, कीटनाशक, ट्रैक्टर इत्यादि का प्रयोग किया जाना है।

(iii) भूमि अपरदन की समस्या-

     अपरदन के मूलतः 5 दूत होते हैं जिसके कारण अलग-2 क्षेत्रों में मृदा अपरदन की समस्या उत्पन्न हुई है। जैसे- बढ़ता हुआ जल के कारण नदी घाटी क्षेत्र में, हिमानी के कारण पर्वतीय क्षेत्र में, शुष्क वालु के कारण थार मरुस्थलीय क्षेत्र में, समुद्री तरंग के कारण तटवर्ती क्षेत्र में, भूमिगत जल के कारण मेघालय के गारों-खासी क्षेत्र, बिहार कैमूर क्षेत्र तथा उत्तराखण्ड के देहरादून क्षेत्र में यह समस्या उत्पन्न हो रही है।

(iv) मृदा प्रदूषण

    उर्वरकों, कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग तथा औद्योगिक कचड़ों को खुले क्षेत्र में फैला दिये जाने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है।

(v) खनन एवं परित्यक्त भूमि के विस्तार की समस्या-

      जिन क्षेत्रों में खनन के कार्य सम्पन्न हो जाता है। उन खनन क्षेत्रों को परित्यक्त भूमि के रूप में छोड़ दिया जाता है। ऐसे भूमि का भारत में लगातार विस्तार हो रहा है।

      उपरोक्त समस्याओं को देखते हुए मृदा संरक्षण का कार्य अनिवार्य है। मृदा के संरक्षण हेतु 6वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान केन्द्र सरकार ने तीन बोर्ड का गठन किया था-

1. राष्ट्रीय बंजर भूमि विकास बोर्ड

2. राष्ट्रीय भूमि उपयोग एवं संरक्षण बोर्ड

3. राष्ट्रीय बंजर भूमि एवं भू उपयोग परिषद

      प्रथम बोर्ड के गठन का मुख्य उद्देश्य संसाधनात्मक दृष्टि से जिस भूमि का पतन हो चुका है उनके संरक्षण एवं विकास हेतु कार्यक्रम का निर्माण करना है। दूसरे बोर्ड के गठन के मुख्य उद्देश्य प्रत्येक राज्यों में भूमि उपयोग प्रतिरूप का निर्धारण करना है। तीसरे बोर्ड के गठन के मुख्य उद्देश्य “मृदा संरक्षण के संबंध में विभिन्न प्रकार के नीतियों का निर्धारण करना है।”

     भारत में भौगोलिक सूचना तंत्र (GIS) को विकसित किया गया है जो कृत्रिम उपग्रह इंटरनेट तथा कम्प्यूटर के माध्यम से सूखा, बाढ़, बंजर भूमि इत्यादि के संबंध में विभिन्न प्रकार के आँकड़ों को इकठ्ठा करता है तथा उनके संरक्षण हेतु तार्किक उपाय भी बताता है। भारतीय GIS को ऊपर में बताये गये तीनों बोर्ड से जोड़ दिया गया है।

     भारत में भूमि विकास कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है। जैसे- 8वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान भारतीय बंजर भूमि को दो भागों में बाँटकर अध्ययन किया गया है-

(i) वनीय बंजर भूमि

(ii) गैर वनीय बंजर भूमि-

      वनीय बंजर भूमि पर सामाजिक वानिकी कार्यक्रम चलाकर बनीय बंजर भूमि विकास किया जा रहा है। दूसरी ओर गैर वनीय बंजर भूमि को कृषि क्षेत्र में लाने के प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को खेती में जिप्सम का प्रयोग करने की सलाह दी जाती है। इस तकनीक का प्रयोग प्राय: उन क्षेत्रों में किया जाता है जहाँ पर अत्यधिक सिंचाई के कारण लवणीय मृदा का विकास हुआ है। पुन: कंकड-पत्थर से युक्त बंजर भूमि की जलग्रहण विधि के द्वारा मिट्टी के उर्वर बनाने प्रयास किया जाता है।

     उपरोक्त कार्यक्रमों के अलावे योजना आयोग ने भारत को 15 कृषि जलवायु क्षेत्र में विभक्त कर कृषि कार्य करने की सलाह दिया है ताकि किसान मृदा की क्षमता या पर्यावरण के अनुकूल कृषि कार्य कर सके।

     केन्द्र सरकार ने राज्यों को यह सलाह दिया है कि आप समन्वय के आधार पर मृदा संरक्षण का उपाय करें। इसके तहत छोटे क्षेत्र बंधों का निर्माण कर मरुस्थलीय क्षेत्र में बाड़ों का विकास कर यह कार्य करने की सलाह दी गई है।

      चम्बल नदी घाटी क्षेत्र में उबड़-खाबड़ भूमि क्षेत्र को समतल भूमि के क्षेत्र में बदला जा रहा है। पर्वतीय क्षेत्रों में मृदा अपरदन नहीं हो इसके लिए 1976 ई० में झूम कृषि पर रोक लगा दी गई थी और उसके स्थान पर कंटूर फार्मिंग या “सीढ़ीनुमा कृषि” करने की सलाह दी गई है।

     किसानों को फसल चक्र अपनाने की सलाह दी गई है। रासायनिक उर्वरक की जगह पर जैविक उर्वरक प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। भू-उपयोग के प्रतिरूप में आये परिवर्तन को पुनर्स्थापित किया जा रहा है। मिट्टी की स्वास्थ्य की जाँच हेतु “Soil Clinic” की स्थापना की जा रही है।

निष्कर्ष:

     उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि भारत में मृदा सरक्षण हेतु कई प्रकार के उपाय किये जा रहे हैं। इन उपायों के बावजूद USA के तर्ज पर “एकीकृत मृदा सेवा केन्द्र” की स्थापना किया जाय तथा गंभीर मृदा अपरदन एवं मृदा स्वास्थ ह्रास वाले क्षेत्रों में त्वरित कार्यवाही कने हेतु उचित संस्थागत एवं संचनात्मक सुविधाओं का विकास किया जाय।

16. Major Industries of India (भारत के प्रमुख उद्योग)

16. Major Industries of India

(भारत के प्रमुख उद्योग)



Major Industries of India

1. भारत में निम्नलिखित उद्योगों में से किस उद्योग में सार्वजनिक क्षेत्र में सबसे अधिक पूँजी निवेश हुआ है?

(a) उर्वरक उद्योग

(b) लौह-इस्पात उद्योग

(c) दवा व रसायन उद्योग

(d) रंग-रोगन उद्योग

[read more] (b) लौह-इस्पात उद्योग [/read]

2. आधुनिक लौह-इस्पात उद्योग का वास्तविक प्रारम्भ किस स्थान पर स्थापित कारखाने के साथ हुआ?

(a) कुल्टी

(b) बर्नपुर

(c) जमशेदपुर

(d) गोपालपुर

[read more] (b) बर्नपुर [/read]

3. निजी क्षेत्र में भारत का प्रथम लौह-इस्पात कारखाना कहाँ पर स्थापित हुआ?

(a) भिलाई

(b) दुर्गापुर

(c) जमेशदपुर

(d) राउरकेला

[read more] (c) जमेशदपुर [/read]

4. दुर्गापुर लौह-इस्पात संयंत्र किस देश के सहयोग से स्थापित किया गया?

(a) ब्रिटेन

(b) जर्मनी

(c) फ्रांस

(d) रूस

[read more] (a) ब्रिटेन [/read]

5 . राउरकेला में लौह-इस्पात संयंत्र की स्थापना किस देश के सहयोग से की गई है?

(a) जर्मनी

(b) ब्रिटेन

(c) रूस

(d) जापान

[read more] (a) जर्मनी [/read]

6. भिलाई लौह-इस्पात संयंत्र की स्थापना किस देश के सहयोग से की गई है?

(a) ब्रिटेन

(b) जर्मनी

(c) रूस

(d) सं०रा०अ०

[read more] (c) रूस [/read]

7. रूस की सहायता से स्थापित लौह-इस्पात संयंत्र है-

(a) बोकारो

(c) विशाखापतनम

(b) भिलाई

(d) इनमें से सभी

[read more] (d) इनमें से सभी [/read]

8. भिलाई, दुर्गापुर और राउरकेला में लौह-इस्पात संयंत्र की स्थापना किस पंचवर्षीय योजना के दौरान की गई?

(a) प्रथम

(b) द्वितीय

(c) तृतीय

(d) चतुर्थ

[read more] (b) द्वितीय [/read]

9. भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (SAIL) की स्थापना कब की गई थी?

(a) 1964 ई०

(b) 1869 ई०

(c) 1974 ई०

(d) 1984 ई०

[read more] (c) 1974 ई० [/read]

10. कोयले की स्थानीय आपूर्ति उपलब्ध नहीं है?

(a) TISCO-जमशेदपुर को

(b) VISL-भद्रावती को

(c) HSL-दुर्गापुर को

(d) HSL-भिलाई को

[read more] (b) VISL-भद्रावती को [/read]

11. वह कौन-सा रेलमार्ग है जिस पर सर्वाधिक इस्पात कारखाने स्थित हैं?

(a) दिल्ली-चेन्नई वाया भोपाल

(b) मुम्बई-हावड़ा वाया रायपुर

(c) मुम्बई-हावड़ा वाया जबलपुर

(d) दिल्ली-एर्नाकुलम वाया गुंटूर-रेनीगंटा

[read more] (b) मुम्बई-हावड़ा वाया रायपुर [/read]

12. निम्नलिखित में कौन-सा विनिर्माण उद्योग सर्वाधिक रोजगार प्रदान करता है?

(a) लौह-इस्पात उद्योग

(b) सूती वस्त्र उद्योग

(c) चीनी उद्योग

(d) सीमेण्ट उद्योग

[read more] (b) सूती वस्त्र उद्योग [/read]

13. भारत में किस उद्योग में सर्वाधिक लोग कार्यरत हैं?

(a) जूट उद्योग में

(b) लौह-इस्पात उद्योग में

(c) कपड़ा उद्योग में

(d) चीनी उद्योग में

[read more] (c) कपड़ा उद्योग में [/read]

14. विभाजन के कारण भारत का कौन-सा उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ?

(a) रूई तथा शक्कर उद्योग

(b) इजीनियरिंग तया सीमेण्ट उद्योग

(c) जूट तथा रूई उद्योग

(d) कागज तथा लोहा उद्योग

[read more] (c) जूट तथा रूई उद्योग [/read]

15. देश में आधुनिक तकनीक पर आधारित ऊनी कपड़े का प्रथम कारखाना कानपुर में लाल इमली के नाम से स्थापित किया गया था। इसकी स्थापना कब हुई थी?

(a) 1776 ई०

(b) 1876 ई०

(c) 1926 ई०

(d) 1962 ई०

[read more] (b) 1876 ई० [/read]

16. पंजाब में कौन-सा स्थान हौजरी उद्योग के लिए प्रसिद्ध है?

(a) गुरुदासपुर

(b) अमृतसर

(c) जालन्धर

(d) लुधियाना

[read more] (d) लुधियाना [/read]

17. सुमेलित कीजिए-

सूची-I             सूची-II

A. पूर्व का बोस्टन 1.कोयम्बटूर

B. सूती वस्त्रों की राजधानी 2.अहमदाबाद

C. उत्तर भारत का मैनचेस्टर 3.कानपुर

D. दक्षिण भारत का मैनचेस्टर 4.मुम्बई

कूट: A B C D

(a) 2 4 3 1

(b) 3 2 4 1

(c) 1 3 2 4

(d) 1 2 3 4

[read more] (a) 2 4 3 1 [/read]

18. देश में रेशम उद्योग का सर्वाधिक स्थानीयकरण किस राज्य में हुआ है?

(a) मणिपुर

(b) कर्नाटक

(c) केरल

(d) जम्मू-कश्मीर

[read more] (b) कर्नाटक [/read]

19. भारत में सीमेण्ट उत्पादन में अग्रणी राज्य है-

(a) आ० प्र०

(b) राजस्थान

(c) मध्य प्रदेश

(d) तमिलनाडु

[read more] (b) राजस्थान [/read]

20. निम्न में से कौन वन आधारित उद्योग नहीं है?

(a) सीमेण्ट उद्योग

(b) लाह उद्योग

(c) कागज उद्योग

(d) खेल सामग्री उद्योग

[read more] (a) सीमेण्ट उद्योग [/read]

21. कटनी में स्थित है-

(a) सीमेण्ट कारखाना

(b) उर्वरक कारखाना

(c) स्कूटर कारखाना

(d) साइकिल कारखाना

[read more] (a) सीमेण्ट कारखाना [/read]

22. निम्नलिखित में कौन सीमेण्ट कारखाना हरियाणा राज्य में स्थित है?

(a) डालमियानगर

(b) डालमियापुरम

(c) डालमियादाद्री

(d) मछरेला

[read more] (c) डालमियादाद्री [/read]

23. सीमेण्ट उद्योग की स्थापना के लिए निम्न में से किसकी उपस्थिति अधिक प्रभावी होती है?

(a) कोयला तथा जिप्सम

(c) चूना-पत्यर तथा जिप्सम

(b) कोयला तथा तौह अयस्क

(d) चूना पत्थर तथा मैगनीज

[read more] (a) कोयला तथा जिप्सम [/read]

24. सीमेण्ट उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

(a) पहला

(b) दूसरा

(c) तीसरा

(d) चौथा

[read more] (b) दूसरा [/read]

25. भारत में प्रथम सीमेण्ट संयंत्र 1904 ई० में कहाँ स्थापित किया गया था।

(a) चेन्नई

(b) रानीपेट

(c) झींकपानी

(d) पोर्टोनोवा

[read more] (a) चेन्नई [/read]

26. भारत में प्रथम उर्वरक संयंत्र 1906 ई० में कहाँ स्थापित किया गया था

(a) चेन्नई

(b) सिन्दरी

(c) रानीपेट

(d) पोरबन्दर

[read more] (c) रानीपेट [/read]

27. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के अन्तर्गत सर्वप्रथम उर्वरक संयंत्र स्थापित किया गया था-

(a) नांगल में

(b) ट्राम्बे में

(c) सिन्दरी में

(d) आल्वाये में

[read more] (c) सिन्दरी में [/read]

28. भारत में कागज उद्योग का प्रथम सफल कारखाना सन् 1870 में निम्न में से किस स्थान पर लगाया गया?

(a) ट्रांकुवार

(b) बालीगंज

(c) लखनऊ

(d) सीरामपुर

[read more] (b) बालीगंज [/read]

29. भारत में अधिकांश कागज कारखानें पश्चिम बंगाल राज्य में स्थित होने का कारण है-

(a) कच्चे माल की पर्याप्त मात्रा में प्राप्ति

(b) कोलकाता की विशाल जनसंख्या द्वारा देश के सबसे बड़े कागज बाजार की उपलब्धता

(c) रानीगंज एवं झरिया से शक्ति के साधन के रूप में कोयले की प्राप्ति

(d) उपर्युक्त सभी

[read more] (d) उपर्युक्त सभी [/read]

30. नेपानगर में स्थित सबसे महत्वपूर्ण उद्योग है-

(a) मशीनी औजार

(b) सीमेण्ट उद्योग

(c) चीनी उद्योग

(d) अखबारी कागज

[read more] (d) अखबारी कागज [/read]

31. भारी मशीन प्लाण्ट कहाँ स्थित है?

(a) बरौनी

(b) धनबाद

(c) जमशेदपुर

(d) राँची

[read more] (d) राँची [/read]

32. बरौनी निम्न में से किस उद्योग के लिए प्रसिद्ध है?

(a) तेलशोधन उद्योग

(b) चमड़ा उद्योग

(c) लौह-इस्पात उद्योग

(d) कागज उद्योग

[read more] (a) तेलशोधन उद्योग [/read]

33. डीजल लोकोमोटिव कारखाना कहाँ स्थित है?

(a) चित्तरंजन

(b) पेरम्बूर

(c) वाराणसी

(d) कपूरथला

[read more] (c) वाराणसी [/read]

34. कानपुर किसलिए प्रसिद्ध है?

(a) कोयला खान

(b) चमड़ा उद्योग

(c) चीनी उद्योग

(d) लौह-इस्पात उद्योग

[read more] (b) चमड़ा उद्योग [/read]

35. महाराष्ट्र स्थित पिम्परी किसलिए प्रसिद्ध है?

(a) घड़ी निर्माण के लिए

(b) कागज उद्योग के लिए

(c) सीमेण्ट उद्योग के लिए

(d) एण्टीबायोटिक उद्योग के लिए

[read more] (d) एण्टीबायोटिक उद्योग के  लिए [/read]

36. देश की प्रमुख मोटर निर्माता कम्पनी मारूति उद्योग लिमिटेड कहाँ स्थापित है?

(a) चेन्नई

(b) गुड़गाँव

(c) कोलकाता

(d) पुणे

[read more] (b) गुड़गाँव [/read]

37. देश की प्रमुख जीप निर्माता कम्पनी महिन्द्रा एण्ड महिन्द्रा कम्पनी लिमिटेड किस स्थान पर स्थित है?

(a) जमशेदपुर

(b) गुडगाँव

(c) पुणे

(d) चेन्नई

[read more] (c) पुणे [/read]

38 . भारत का सबसे महत्वपूर्ण लघु उद्योग है-

(a) गुड़ एवं खांडसारी

(b) बर्तन निर्माण

(c) हथकरघा उद्योग

(d) चमड़ा उद्योग

[read more] (c) हथकरघा उद्योग [/read]

39. भारत के किस नगर को ‘इलेक्ट्रानिक उद्योग की राजधानी’ कहा जाता है?

(a) चेन्नई

(b) बेंगलूरु 

(c) कानपुर

(d) कोयम्बटूर

[read more] (b) बेंगलूरु [/read]

40. निम्नलिखित में से किस उद्योग में सर्वाधिक संख्या में महिलाएँ कार्यरत है?

(a) चाय उद्योग

(b) जूट उद्योग

(c) वस्त्र उद्योग

(d) रबड़ उद्योग

[read more] (a) चाय उद्योग [/read]

41. निम्न में से कौन-सा तेलशोधनशाला खनिज तेल क्षेत्र के समीप ही स्थापित की गई है?

(a) विशाखापत्तनम

(b) नूनमाटी

(c) बरौनी

(d) मथुरा

[read more] (b) नूनमाटी [/read]

42. बरौनी तेल शोधन कारखाने की स्थापना किस देश के सहयोग से की गई है?

(a) जर्मनी

(b) इंग्लैंड

(c) फ्रांस

(d) पूर्व सोवियत संघ

[read more] (d) पूर्व सोवियत संघ [/read]

43. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (उद्योग)    सूची-II (स्थान)

A. कांच उद्योग 1. मुरादाबाद

B. पीतल उद्योग 2. मरकपुर

C. स्लेट उद्योग 3. फिरोजाबाद

D. हस्त निर्मित कालीन उद्योग 4. मिर्जापुर

कूट: A B C D

(a) 3 1 2 4

(b) 1 3 4 2

(c) 3 1 4 2

(d) 1 3 2 4

[read more] (a) 3 1 2 4 [/read]

44. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (स्थान)   सूची-II (उद्योग)

A. जामनगर 1. ऐलुमिनियम

B. हास्पेट 2. ऊनी वस्त्र

C. कोरबा 3. उर्वरक

D. हल्दिया 4. लोहा एवं इस्पात

कूट: A B C D

(a) 4 3 1 2

(b) 2 4 1 3

(c) 4 3 2 1

(d) 2 1 4 3

[read more] (b) 2 4 1 3 [/read]

45. निम्नलिखित में से कौन-से स्थान कागज उद्योग के लिए प्रसिद्ध हैं?

1. यमुना नगर  2. गुवाहाटी  3. शाहाबाद  4. बल्लारपुर

    उपर्युक्त दिये गये कूटों का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

(a) 1, 2 और 3

(b) 1, 2 और 4

(c) 1, 3 और 4

(d) 2, 3 और 4

[read more] (b) 1, 2 और 4 [/read]

46. नेपानगर किस उद्योग के लिए जाना जाता है? 

(a) सीमेण्ट

(c) हथकरघा

(b) उर्वरक

(d) अखबारी कागज

[read more] (d) अखबारी कागज [/read]

47. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (उद्योग)  सूची-II (उत्पादन केन्द्र)

A. जूट का सामान 1.भदोही

B. रेशमी वस्त्र 2.लुधियाना

C. ऊनी वस्त्र 3.बंगलौर

D. ऊनी कालीन 4.टीटागढ़
कूट: A B C D

(a) 3 4 2 1

(b) 4 3 2 1

(c) 1 3 4 2

(d) 4 1 3 2

[read more] (b) 4 3 2 1 [/read]

48. निम्नलिखित में से किस राज्य में पेट्रो रसायन उद्योग के लिए आदर्श दशायें पायी जाती है?

(a) गुजरात

(b) महाराष्ट्र

(c) तमिलनाडु

(d) उ० प्र०

[read more] (a) गुजरात [/read]

49. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (केन्द्र)    सूची-II (उद्योग)

A. आंवला 1. पॉली फाइबर

B. मोदी नगर 2. उर्वरक

C. बाराबंकी 3. रबड़

D. कानपुर  4. विस्फोटक

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 3 1 4

(c) 3 2 4 1

(d) 4 3 2 1

[read more] (b) 2 3 1 4 [/read]

50. सूची-1 को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (स्थान)       सूची-II (उद्योग)

A. विशाखापतनम 1. मोटर गाड़ियों

B. मुरी 2. पोत निर्माण

C. गुडगांव 3. उर्वरक

D. पनकी 4. ऐलुमिनियम

कूट: A B C D

(a) 2 3 4 1

(b) 1 2 3 4

(c) 2 4 3 1

(d) 2 4 1 3

[read more] (d) 2 4 1 3 [/read]

51. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए

सूची-I (उद्योग)     सूची-II (स्थान)

A. भारी इंजीनियरिंग उद्योग  1.सिन्दरी

B. मशीन औजार उद्योग 2. रेणुकूट

C. ऐलुमिनियम उद्योग 3. राँची

D. उर्वरक उद्योग 4. पिंजौर

कूट: A B C D

(a) 3 4 2 1

(b) 4 3 1 2

(c) 4 3 2 1

(d) 1 2 3 4

[read more] (a) 3 4 2 1 [/read]

52. भारत में सबसे बड़ी तेलशोधनशाला कहाँ स्थित है?

(a) बरौनी

(b) कोयली

(c) मुम्बई

(d) जामनगर

[read more] (d) जामनगर [/read]

53. भारत में तेलशोधक कारखाने बहुधा वृहद् बंदरगाहों के समीप संस्थापित हैं, क्योंकि-

(a) तेल क्षेत्र अधिकतर तट के समीप स्थित हैं।

(b) आयातित कच्चे माल पर निर्भरता है।

(c) शोधित उत्पाद बाजार से सरलता से जुड़े हैं।

(d) तकनीकी क्षमता सुलभ है।

[read more] (b) आयातित कच्चे माल पर निर्भरता है [/read]

54. जॉर्ज आकलैंड ने सर्वप्रथम भारत में 1855 ई० में किस स्थान पर जूट मिल की स्थापना की थी?

(a) रिसरा में

(b) बजबज में

(c) टीटागढ़ में

(d) शिवपुर में

[read more] (a) रिसरा में [/read]

55. देश के विभाजन के फलस्वरूप जूट उद्योग का ह्रास हुआ, क्योंकि

(a) अनेक जूट मिलें बांग्लादेश में चली गयी थी।

(b) भारत में पूँजी का अभाव था।

(c) अंग्रेजों की दोषपूर्ण नीति का प्रभाव पड़ा था।

(d) कुशल श्रम तथा जूट उत्पादन क्षेत्र का अधिकांश भाग वर्तमान बांग्लादेश में चला गया था।

[read more] (d) कुशल श्रम तथा जूट उत्पादन क्षेत्र का अधिकांश भाग वर्तमान बांग्लादेश में चला गया था [/read]

56. इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का निर्माण किया जाता है-

(a) जमशेदपुर में

(b) वाराणसी में

(c) चित्तरंजन में

(d) गोरखपुर में

[read more] (c) चित्तरंजन में [/read]

57. बिहार में पहली चीनी मिल स्थापित हुई- 

(a) मरहौरा में

(b) बेतिया में

(c) मोतिहारी में

(d) पटना में

[read more] (a) मरहौरा में, बिहार में पहली चीनी मिल मरहौरा / मढ़ौरा (Marhaura) में स्थापित हुई थी। इसका स्थापना वर्ष 1904 में हुआ था और यह सिर्फ बिहार की पहली नहीं बल्कि भारत की सबसे पहली चीनी मिलों में से एक भी थी। [/read]

58. कपास उद्योग जिन कच्चे माल पर आश्रित हैं, वे हैं-

(a) भार ह्रास मूलक

(b) भार वृद्धि मूलक

(c) भार सम मूलक

(d) इनमें से कोई नहीं

[read more] (a) भार ह्रास मूलक [/read]

59. बिहार में तेलशोधक कारखाना है-

(a) सिंहभूम में

(b) रूद्रसागर में

(c) बरौनी में

(d) राँची में

[read more] (c) बरौनी में [/read]

60. कौन-सा प्रमुख उद्योग मुरी में स्थापित है?

(a) ऐलुमिनियम उद्योग

(b) ताँबा उद्योग

(c) इस्पात उद्योग

(d) रसायन उद्योग

[read more] (a) ऐलुमिनियम उद्योग [/read]

61. बिहार में सूची-I (उद्योगों) को सूची-II (नगरी) से सह-सम्बन्धित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (उद्योग)    सूची-II (नगर)

A. कागज एवं लुग्दी  1. डालमियानगर

B. सिगरेट  2. दिलवारपुर

C. प्लाइवुड 3. हाजीपुर

D. जूट 4. पूर्णियाँ

कूट: A C D

(a) 3 4 1 2

(b) 1 2 3 4

(c) 2 1 4 3

(d) 4 3 2 1

[read more] (b) 1 2 3 4 [/read]

62. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये के कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (कुटीर उद्योग उत्पाद) सूची-II (उत्पादन केन्द्र)

A. सिल्क साड़ियाँ 1. मुरादाबाद

B. चिकन 2. गोरखपुर

C. टेराकोटा 3. वाराणसी

D. पीतल 4. लखनऊ

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 3 4 2 1

(c) 4 3 1 2

(d) 2 1 4 3

[read more] (b) 3 4 2 1 [/read]

63. भारत में प्रथम सूती कपड़े का कारखाना कहाँ स्थापित हुआ था?

(a) सूरत

(b) मुंबई

(c) अहमदाबाद

(d) कोयम्बटूर

[read more] (b) मुंबई [/read]

64. प्रथम तेल परिष्करण संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया?

(a) बरौनी में

(b) डिग्बोई में

(c) विशाखापतनम में

(d) मुम्बई में

[read more] (b) डिग्बोई में [/read]

65. सबसे बड़ा तेलशोधक कारखाना पाया जाता है-

(a) पोरबन्दर

(b) जामनगर

(c) अहमदाबाद

(d) सूरत

[read more] (b) जामनग [/read]

66. भारत का प्रथम स्टील प्रोजेक्ट शहर स्थापित किया गया-

(a) भिलाई

(b) कोलकाता

(c) जमशेदपुर

(d) बोकारो

[read more] (c) जमशेदपु [/read]

67. पिम्परी सम्बन्धित है- 

(a) इस्पात उद्योग

(c) खाद उद्योग

(b) कागज उद्योग

(d) पेन्सिलीन उद्योग

[read more] (d) पेन्सिलीन उद्योग [/read]

68. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए-

सूची-I       सूची-II

A. नेपानगर 1. तेलशोधन

B. झरिया 2. अखबारी कागज

C. मथुरा 3. परमाणु ऊर्जा संयंत्र

D. कलपक्कम 4. कोयला उत्खनन

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 4 1 3

(c) 4 2 3 1

(d) 2 3 4 1

[read more] (b) 2 4 1 3 [/read]

1. Major Course (Climatology and Oceanography) / MJC-2 Questions Paper 2024

Major Course or MJC-2

Climatology and Oceanography (Theory)

Solved Questions Paper 2024



(Patliputra University Patna)

Major Course

UG (Regular) (Sem.-II) Examination, 2024

(Session: 2023-27)

(MJC-2: MAJOR CORE COURSE)

GEOGRAPHY

(Climatology and Oceanography)

Time: Three Hours

Maximum Marks: 70

Note: Candiates are required to give their answers in their own words as far as practicable. The figures in the margin indicate full marks. Answer from all the parts as directed.

परीक्षार्थी यथासंभव अपने शब्दों में ही उत्तर दें। उपांत के अंक पूर्णांक के द्योतक हैं। निर्देशानुसार सभी भागों से प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

PART-A/भाग-अ

(Objective Type Questions)

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)

Note: Select the correct option from each question. Each question carries 2 marks. [10×2=20]

प्रत्येक प्रश्न से सही विकल्प का चयन कीजिए। प्रत्येक प्रश्न 2 अंकों का है।

1. (i) What are two forms of oxygen found in the atmosphere?

(a) Water and Oxygen

(b) Water and Ozone

(c) Ozone and Oxygen

(d) None of the above

वायुमण्डल में पाये जाने वाले ऑक्सीजन के दो रूप क्या हैं?

(a) जल एवं ऑक्सीजन

(b) जल एवं ओजोन

(c) ओजोन एवं ऑक्सीजन

(d) उपरोक्त से कोई नहीं

उत्तर- (b) जल एवं ओजोन

(ii) The transfer of heat energy through the movement of a mass of substance from one place to another place is called:

(a) Conduction

(b) Convection

(c) Condensation

(d) Radiation

किसी पदार्थ के द्रव्यमान के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने से ऊष्मा ऊर्जा का स्थानान्तरण कहलाता हैः

(a) चालन

(b) संवहन

((c) संघनन

(d) विकिरण

उत्तर- (b) संवहन

(iii) When two different air masses meet, the boundary zone between them is a:

(a) Front

(b) Fault

(c) Current

(d) Cyclone

जब दो अलग-अलग वायु राशियां मिलती हैं, तो उनके मध्य का सीमा क्षेत्र एक…… होता है।

(a) वाताग्र

(b) अंश

(c) धारा

(d) चक्रवात

उत्तर- (a) वाताग्र

(iv) The centre of a cyclone is a calm area. It is called ….of the storm.

(a) arm

(b) head

(c) heart

(d) eye

चक्रवात का केन्द्र एक शांत क्षेत्र है। इसे तूफान का…… कहा जाता है।

(a) भुजा

(b) सिर

(c) हृदय

(d) नेत्र

उत्तर- (d) नेत्र

(v) Which of the following codes signify the cold climate with dry winters acording to Koppen?

(a) EF

(b) Df

(c) ET

(d) Dw

कोपेन के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा संकेत शीत जलवायु के साथ शुष्क शीत ऋतु को दर्शाता है?

(a) EF

(b) Df

(c) ET

(d) Dw

उत्तर- (d) Dw

(vi) Which of the following gases has the maximum contribution to global warming?

(a) Chlorofluorocarbons (CFCs)

(b) Methane (CH4)

(c) Sulfur Hexafluoride (SF6)

(d) Carbon dioxide (CO)

निम्नलिखित में से किस गैस का भूमण्डलीय तापन में सर्वाधिक योगदान है?

(a) क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs)

(b) मीथेन (CH4)

(c) सल्फर हेक्साफ्लोराइड (SF)

(d) कार्बन डाइऑक्साइड (CO)

उत्तर- (d) कार्बन डाइऑक्साइड (CO)
(vii) A mid-ocean ridge is an underwater mountain system formed by:

(a) Plate tectonics

(b) Earthquake

(c) Ocean currents

(d) Submarine landslides

मध्य महासागरीय कटक एक जलमग्न पर्वतीय प्रणाली है, जिसका निर्माण होता है :

(a) प्लेट विवर्तनिकी से

(b) भूकम्प से

(c) महासागरीय धाराओं से

(d) अन्तः सागरीय भूस्खलन से

उत्तर- (a) प्लेट विवर्तनिकी से

(viii) Which of the following oceans has the shape of the english alphabet ‘S’?

(a) Atlantic ocean

(b) Arctic ocean

(c) Pacific ocean

(d) Indian ocean

निम्नलिखित में से किस महासागर का आकार अंग्रेजी वर्णमाला के ‘S’ के समान है?

(a) अटलांटिक महासागर

(b) आर्कटिक महासागर

(c) प्रशान्त महासागर

(d) हिन्द महासागर

उत्तर- (a) अटलांटिक महासागर

(ix) The deepest part of the Indian Ocean is:

(a) Mariana Trench

(b) Sunda Trench

(c) Tonga Trench

(d) Bonin Trench

हिन्द महासागर का सबसे गहरा भाग है:

(a) मेरियाना गर्त

(b) सुण्डा गर्त

(c) टोन्गा गर्त

(d) बोनिन गर्त

उत्तर- (b) सुण्डा गर्त

(x) The salinity of ocean water is calculated as the amount of salt (in gm) dissolved in——gm of seawater.

(a) 10,000

(b) 100

(c) 1000

(d) More than one of the above

महासागरीय जल की लवणता की गणना….. ग्राम सागरीय जल में घुले लवण की मात्रा (ग्राम में) के रूप में की जाती है?

(a) 10,000

(b) 100

(c) 1000

(d) उपरोक्त में से एक से अधिक

उत्तर- (c) 1000

 

PART-B/ भाग-ब

(Short Answer Type Questions)

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any four questions of the following. Each question carries four marks.    [4×5=20]

निम्नलिखित में से किन्हीं चार प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न चार अंकों का है। [4×5=20]

2. What do you understand by heat budget of the Earth? Explain in detail.

पृथ्वी के ताप बजट से आप क्या समझते हैं? विस्तार से समझाइये।

3. What is an Air Mass? Write the name of different types of air masses.

वायुराशि क्या है? वायुराशियों के विभिन्न प्रकारों के नाम लिखिए।

4. What is Tropical Cyclone? What is the name given to tropical cyclone in China and Japan?

उष्णकटिबन्धीय चक्रवात क्या है? चीन और जापान में उष्णकटिन्धीय चक्रवात को क्या नाम दिया गया है?

5. What are the indicators of climate change?

जलवायु परिवर्तन के संकेतक क्या हैं?

6. How many types of ocean relief are there? Which is the largest relief in ocean?

महासागरीय उच्चावच के कितने प्रकार होते हैं? महासागर में सबसे बड़ा उच्चावच कौन-सा है?

7. What do you mean by salinity of ocean water? What is the average salinity of ocean water?

महासागरीय जल की लवणता से आप क्या समझते हैं? महासागरीय जल की औसत लवणता क्या है?

PART-C/ भाग-स

(Long Answer Type Questions)

(दीर्घ उत्तरीय प्रश्न)

Note: Answer any three questions of the following. Each question carries three marks.

[3×10=30]

निम्नलिखित में से किन्हीं तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए। प्रत्येक प्रश्न तीन अंकों का है।

Present an account of the composition and structure of atmosthere.

वायुमण्डल के संघटन एवं संरचना का विवरण प्रस्तुत कीजिए।

9. What is front? Explain various types of fronts with diagrams.

वाताग्र क्या है? वाताग्र के विभिन्न प्रकारों की व्याख्या रेखाचित्रों के साथ कीजिए।

10. Critically examine the classification of climate as given by Koppen.

कोपेन द्वारा दिये गये जलवायु वर्गीकरण का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिए।

11. Describe the major features of the bottom relief of Indian Ocean.

हिन्द महासाग के नितल की प्रमुख उच्चावच विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

12. Give an account of the horizontal distribution of salinity in ocean water.

महासागरीय जल में लवणता के क्षैतिज वितरण का विवण दीजिए।

14. Major Mineral Resources of India (भारत के प्रमुख खनिज संसाधन)

14. Major Mineral Resources of India

(भारत के प्रमुख खनिज संसाधन)



अयस्क:- वे खनिज जिनसे धातुओं का निष्कर्षण आसानी से तथा सुगमतापूर्वक किया जा सके।

सभी अयस्क खनिज होते हैं लेकिन सभी खनिज अयस्क नहीं होते।

भूगर्भ से खोदकर निकाली जाने वाली वस्तुओं को खनिज कहते हैं।

खनिज प्राकृतिक रासायनिक तत्त्व या यौगिक हैं जो मुख्यतः अजैव क्रियाओं से बनते हैं। ये अपने भौतिक तथा रासायनिक गुणों से जाने जाते हैं।

जिन स्थानों से खनिज निकाले जाते हैं, उन्हें खान कहते हैं।

चिकमंगलूर के कुद्रेमुख क्षेत्र का लोहा ईरान को निर्यात किया जाता है।

केमानगुंडी का लोहा भद्रावती लौह इस्पात संयंत्र को भेजा जाता है।

बैलाडीला का लोहा विशाखापत्तनम भेजा जाता है। जहाँ से इसे जापान एवं अन्य देशों को निर्यात किया जाता है।

बस्तर जिले की बैलाडीला पहाड़ी की खान एशिया की सबसे बड़ी यंत्र सुसज्जित खान है।

गोवा में लोहे के विशाल भंडार हैं। परन्तु, यहाँ घटिया किस्म के लोहा लिमोनाइट तथा सिडेराइट है। (लोहांश-40-60%)

उत्तरी गोवा, मध्यवर्ती गोवा तथा दक्षिणी गोवा में लगभग 315 खानों से लौह-अयस्क निकाला जाता है।

उत्तरी गोवा में पिरना-अदोल, पाले ओनड़ा कुडनेम-विसरूलेम तथा कुदनेम-सुरला प्रमुख क्षेत्र है।

गोवा में लोहे की खानें खुली व मशीनीकृत हैं। यहां लोहा सस्ते नदी-मार्गो अथवा विद्युत से नियंत्रित रज्जुमार्ग (Rope ways) द्वारा ढोया जाता है।

मैंगनीज उत्पादन की दृष्टि से भारत का विश्व में ब्राजील, गेबोन, दक्षिणी अफ्रीका तथा आस्ट्रेलिया के बाद पाँचवाँ स्थान है।

भारत में मैगजीज खनिज का अयस्क भण्डार- 295 मिलियन टन

मध्य प्रदेश की मैंगनीज पेटी बालाघाट और छिंदवाड़ा महाराष्ट्र के नागपुर- भण्डारा जिले की मैंगनीज पेटी का ही विस्तार है।

गोवा में भारत के 18% मैंगनीज भण्डार हैं जो किसी भी राज्य से अधिक है।

भारत अपने कुल मैंगनीज उत्पादन का लगभग 1/3 भाग निर्यात कर देता है।

भारत के मैंगनीज निर्यात का सबसे बड़ा दोष यह है कि इसे कच्ची अवस्था में ही निर्यात कर दिया जाता है।

हमारा अधिकांश मैंगनीज जापान, ब्रिटेन, USA, जर्मनी, बेल्जियम को निर्यात किया जाता है।

जापान हमारे मैंगनीज का 52% भाग खरीदता है।

अधिकांश निर्यात बम्बई, पाराद्वीप, मारमागोवा और विशाखापत्तनम बंद‌रगाहों से किया जाता है।

मैंगनीज निक्षेप लगभग सभी संरचनाओं में पाया जाता है हालांकि; मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम से संबद्ध है।

मैंगनीज धातु प्राय: काले रंग की प्राकृतिक भस्मों के रूप में धारवाड़ युग की परतदार चट्टानों में पाई जाती है।

अभ्रक अत्यंत हल्का खनिज है जो आग्नेय तथा परावर्तित चट्टानों के परतों के रूप में पाया जाता है।

अभ्रक मुख्यत: सफेद, काले अथवा हरे रंग होता है।

सफेद अभ्रक टुकड़े के पेग्मेटाइट नामक आग्नेय चट्टानों में ही मिलते हैं। इसे ‘रुबी अभ्रक अथवा मस्कोविटअभ्रक भी कहते हैं।

रुबी अभ्रक अथवा मस्कोविट अभ्रक सबसे उत्तम किस्म का अभ्रक होता है।

हल्का गुलाबीपन लिए अभ्रक को बायोटाइट (Biotite) अभ्रक कहते हैं।

अभ्रक का उपयोग मुख्यतः विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में किया जाता है। इसे पतली चादरों में विघटित किया जा सकता है जो काफी सख्त और सुनम्य होती है।

भारत में अभ्रक मुख्यतः झारखण्ड, आन्ध्रप्रदेश व राजस्थान में पाया जाता है। इसके पश्चात तमिलनाडु, प० बंगाल और MP आते हैं। 

झारखण्ड में उच्च गुणवत्ता वाले अभ्रक निचले हजारीबाग पठार की 150 किमी० लम्बी व 22 किमी० चौड़ी पट्टी में पाया जाता है।

आन्ध्रप्रदेश के नेल्लोर जिले में सर्वोत्तम प्रकार के अभ्रक का उत्पादन किया जाता है।

राजस्थान में अभ्रक की पट्टी लगभग 320 किमी०, लम्बाई में जयपुर से भीलवाड़ा और उदयपुर के आस-पास विस्तृत है।

अधिकांश अभ्रक भीलवाड़ा से निकाला जाता है। यहाँ पर कम गहराई पर मिलने वाला अभ्रक घटिया किस्म के परन्तु अधिक गहराई से उच्च किस्म का अभ्रक निकाला जाता है।

राजस्थान का 40% अभ्रक रूबी अभ्रक होता है।

बिहार के गया जिले से शुरू होकर झारखण्ड के हजारीबाग, कोडरमा तथा गिरीडीह होती हुई बिहार के मुंगेर तथा भागलपुर तक अभ्रक की पेटी फैली हुई है।

➤  इस पेटी की लम्बाई-160 किमी०, चौ० 26-32 किमी०, मोटाई- 30 मीटर तक।

यहाँ से निकाला गया अभ्रक उच्च कोटि (रूबी अभ्रक) का होता है जिसके कारण इसे “विश्व का अभ्रक भण्डार” कहा जाता है

भारत का 90% अभ्रक निर्यात कर दिया जाता है।

भारतीय अभ्रक के मुख्य ग्राहक जापान, रूस, ब्रिटेन, USA, पोलैण्ड, चेक रिपब्लिक, स्लोवाकिया, जर्मनी, फ्रांस, हंगरी, तथा नीदरलैंडस है। ये देश मिलकर भारत का 80% अभ्रक खरीदते है।

अधिकांश अभ्रक कोलकाता, विशाखापत्तनम, चेन्नई, मुंबई बंदरगाहों से निर्यात किया जाता है।

पिछले कुछ वर्षों से हमारे अभ्रक निर्यात में कमी आई है हालांकि अन्तर्राष्ट्रीय बाजारों में कीमतें बढ़ जाने से अधिक निर्यात से विदेशी मुद्रा अधिक कमाई गई। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित है:-

(i) भारत में औद्योगिक विकास के साथ-साथ अभ्रक की घरेलू खपत बढ़ रही है जिससे निर्यात के लिए कम अभ्रक बच पाता है।

(ii) उन्नत देशों में कृत्रिम अभक पैदा होने लगा है। 

(iii) हमारे अभ्रक को अन्य देशों के अभ्रक की प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। ब्राजील का अभ्रक भारत के अभ्रक का मुख्य प्रतिद्वंदी है।

(iv) कई देशों में अभ्रक के प्रतिस्थानी (substitutes) प्रयोग होने नगे है। इस कारण भारतीय अभ्रक की माँग घटने लगी है।

बॉक्साइट एक अयस्क है जिसका प्रयोग एल्यूमिनियम के विनिर्माण में किया जाता है।

बॉक्साइट मुख्यतः टर्शियरी निक्षेप में पाया जाता है। और लैटेराइट चट्टानों से सम्बद्ध है।

➤ उड़ीसा बॉक्साइट की सबसे बड़ा उत्पादक है।

झारखण्ड में लोहरडगा जिले की पैटलैंडस में इसके प्रसिद्ध समृद्ध निक्षेप है।

छतीसगढ़ में बॉक्साइट निक्षेप अमरकंटक के पठार में पाये जाते हैं जबकि MP में कटनी, जबलपुर तथा बालाघाट में बॉक्साइट के महत्वपूर्ण निक्षेप है।

पहले भारत बॉक्साइट निर्यात करता था। परन्तु, अब भारत बॉक्साइट का आयात कनाडा, USA, आस्ट्रेलिया तथा यूरोपीय देशों से करता है।

कारण- बॉक्साइट की मांग बहुत बढ़ना।

ताम्बा के निक्षेप मुख्यतः झारखण्ड के सिंहभूम, MP के बालाघाट, मलंजखंड तथा राजस्थान के झुंझुनू (खेतड़ी) एवं अलवर जिलों में पाये जाते हैं।

ताम्बे के भण्डार अजमेर, अलवर, भीलवाड़ा, चितौड़‌गढ़, डुंगरपुर, जयपुर, पाली, सिरोही तथा उदयपुर जिलों में स्थित है।

सबसे महत्वपूर्ण झुझुनू जिले की खेतड़ी-सिंघाना पेटी है।

भारत में ताम्बे उत्पादन हमारी माँग से काफी कम होता है और बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है।

भारत मुख्यतः USA, कनाडा, जिम्बाबे, जापान, मैक्सिको आदि देशों से ताम्बे का आयात करता है।

भारत में खनिजों की विविधता का सबसे बड़ा कारण भारत की जटिल भूवैज्ञानिक संरचना एवं विशालता है।

नोट: 1kg यूरेनियम = 25 लाख kg कोयला (ऊर्जा के दृष्टि से)

सीसा तथा जस्ता

जस्ते का सम्पूर्ण उत्पादन लगभग राजस्थान में होता है।

उत्पादन- हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड कम्पनी द्वारा

जस्ते का उपयोग:- मुख्यतः टायर उद्योग, साँचा बनाने, शुष्क बैटरियाँ।

वितरण-

(1) राजस्थान

(2) गुजरात

(3) महाराष्ट्र

(4) आन्ध प्रदेश

(5) मेघालय

सोना

धारवाड़ की शिष्ट शैलों की क्वार्टज शिराओं में, ‘धानु रेखा भंमार’ भी कहा जाता है।

चट्‌टानों तथा नदियों की रेत में।

भण्डार-

(1) कर्नाटक

↳ कोलार- कोलार स्वर्ण क्षेत्र

↳ रायचूर- हट्टी स्वर्ण क्षेत्र

(2) आन्ध्र प्रदेश

↳ अनन्तपुर- रामगिरी स्वर्ण क्षेत्र

हीरा

वितरण/भण्डार

↳ मध्य प्रदेश- पन्ना

↳ आन्ध्र प्रदेश- अन्नन्तपुर, कुडप्पा, कुर्नूल, कृष्णा, गोदावरी

↳ कर्नाटक- बेल्लारी

↳ ओडिशा- संबलपुर

साधारण नमक

उपयोग:- भारी रसायनों जैसे- कास्टिक सोडा, क्लोरीन, मछली तथा आचारों  के परीरक्षण में। 

भारत में प्रमुख स्रोत:

     सागरीय जल, अन्य स्रोत- खारा झील जैसे सांभर, डीडवाना, पंचभद्रा

उत्पादन-

(1) गुजरात- मीठापुर, पोरबन्दर, लवणपुर, भावनगर, कांडला

(2) महाराष्ट्र

(3) कर्नाटक 

(4) केरल

(5) तमिलनाडु- कावेरी डेल्टा के दक्षिण की ओर स्थित

➤ पूर्वी भाग में नदी डेल्टाओं से दूर वाले भागों में नमक का उत्पादन।

चुना पत्थर

➤ यह परतदार चट्टान है।

➤ आन्ध्र प्रदेश में सर्वाधिक चूना पत्थर का भाण्डार है।

उपयोग

कुल उपयोग का 75% सीमेंट में

↳ 16% लौह इस्पात उद्योग में

4% रसापन उद्योग में,

शेष- चीनी, कागज, उर्वरक, शीशा, रबड़ इत्यादि उद्योग में।

वितरण / उत्पादन/ भण्डार

(1) आन्ध्र प्रदेश तथा तेलंगाना (17.7%)- कुडप्पा, कर्नल, गुन्टूर, कृष्णा, नालगोंडा, अदीलाबाद, वारंगल, महबूबनगर और करीमनगर जिले।

(2) राजस्थान (15.5%)- झुंझुनू, बाँसवड़ा, जोधपुर, सिरोही, बून्दी, अजमेर, बीकानेर, डंगरपुर, कोटा, टोंक, अलवर, सिवाई, माधोपुर, चितौड़‌गढ़, नागौर, उद‌यपुर, पाली जिले।

(3) मध्य प्रदेश (15.4%)- जबलपुर, सत्ना, बैतूल, सागर तथा रीवा जिले।

(4) गुजरात (11%)- बनासकांटा (उच्च कोटि), अमरेली, कच्छ, सूरत, जूनागढ़, खेड़ा तथा पंचमहल।

(5) छतीसगढ़- बस्तर, बिलासपुर, रायगढ़, रायपुर तथा दूर्ग जिले।

(6) तमिलनाडु- रामनाथपुरम् तिरुनलवेणी, तिरुचिरापल्ली, सलेम, कोयम्बटूर, मदुरै तथा तंजावुर जिलें।

(7) कर्नाटक- गुलबर्गा, बीजापुर और शिमोगा जिले।

डोलोमाइट

➤ जब चूना पत्थर में 10% से अधिक मैग्नीशियम होता है तो वह डोलोमाइट कहलाता है। जब यह अनुपात 45% से अधिक हो जाता है तो इसे शुद्ध डोलोमाइट कहते हैं।

➤ डोलोमाइट का 90% उपयोग लोहा-इस्पात उद्योग में, 4% उर्वरक, 2% शीशा तथा अन्य मिश्रधातु तथा शेष अन्य उद्योग में।

उत्पादन/वितरण/भण्डार

(1) ओडिशा: यह भारत का सबसे बड़ा (लगभग 30%) उत्पादक राज्य है।

बीरमित्रपुर, सुंदरगढ़, संभलपुर, कोरापुट।

(2) छतीसगढ़: बस्तर, बिलासपुर, दुर्ग तथा रायगढ़।

(3) आन्ध्रप्रदेश: अनन्तपुर, कर्नूल।

(4) झारखण्ड: सिंहभूम तथा पलामू।

एस्बेस्ट्स

रेशायुक्त संरचना तथा आग का प्रतिरोधक।

उपयोग:- फायरप्रूफ वस्त्र, रस्सी, कागज, बेल्ट, पेन्ट, वाहनों में ब्रेक-लाइनिंग। अन्य: सीमेंट की चादरें, शीट, स्लेट, पाईप, टाइलें, फिल्टर पैड, मैंगनीशिया ईंट।

➤ भारत का 90% से अधिक एस्बेस्टस राजस्थान से प्राप्त होता है। इनमें उदयपुर, डूंगरपुर, अलवर तथा पाली मुख्य उत्पादक जिले हैं।

➤ आन्ध्र प्रदेश के कुडप्पा जिले में उच्च कोटि का एस्बेस्टस मिलता है।

➤ कर्नाटक के हमान, मांडया, शिमोगा, मैसूर तथा चिकमगलूर जिलों में भी एस्बेस्टस मिलता है।

➤ इसके अन्य उत्पादक राज्य:- झारखण्ड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, उत्तराखण्ड और नागालैण्ड हैं।

कोयला

➤ कार्बोनीफेरस युग के बाद कोयले का निर्माण जुरासिक, क्रिटेशियस, टर्शियरी युग / कल्प में हुआ।

➤ कोयले के उत्पादन में भारत का स्थान विश्व में तीसरा है।

➤ भारत में कोयले के उत्पादन में प्रथम तीन राज्य क्रमशः हैं- झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा है।

➤ एंथ्रासाइट सबसे उत्तम श्रेणी का कोयला है।

➤ झारखंड (धनबाद, सिंहभूम, गिरिडीह),

➤ झरिया में गोंदलपारा कोयला खदान झारखंड राज्य का सबसे बड़ा कोयला क्षेत्र है।

➤ झारखंड में अन्य कोयला क्षेत्र गिरिडीह, रामगढ़, करनपुरा और डाल्टनगंज हैं।

➤ पश्चिम बंगाल (रानीगंज, आसनसोल),

➤ छत्तीसगढ़ (रायगढ़),

➤ ओडिशा के (देसगढ़ तथा तलचर),

➤ असम (माकूम, लखीमपुर), 

➤ तेलंगाना (सिंगरेनी, रामागुंडम)

➤ तेलंगाना में गोदावरी नदी घाटी में कोयला पाया जाता है। अदीलाबाद, करीमनगर, वारंगल, खम्माम तथा पश्चिमी गोदावरी मुख्य उत्पादक जिले हैं।

➤ तेलंगाना में इस समय कान्यपाली, कोठगूडम तथा तन्दूर खानों से कोयला निकाला जाता है।

➤ महाराष्ट्र का अधिकांश कोयला वर्द्धा घाटी में मिलती है।

चन्द्रपुर, घुघुस, बल्लारपुर तथा बटोटा प्रमुख कोयला उत्पादक जिले।

महाराष्ट्र का लगभग समस्त कोयला रेलवे द्वारा ढोया जाता है।

ट्राम्बे, चोला (कल्याण) खापरखेड़ा, पारस, भुसाबल, बल्लारशाह, नासिक तथा कोरादी स्थानों पर स्थित ताप विद्युत केन्द्रों द्वारा प्रयोग किया जाता है।

MP के सिंगरौली क्षेत्र की कुछ भाग UP के मिर्जापुर जिले में है।

कोटाह के निकट उच्च कोटि का कोयला मिलता है।

मेघालय की गारो, खाँसी तथा जयन्तिया पहाड़ियों में कोयले (लिग्नाइट) के भण्डार मिलते हैं।

तमिलनाडू लिग्नाइट के भण्डार तथा उत्पादन की दृष्टि से अग्रणीय है।

तमिलनाडू में कुड्डालोर जिले का नेवेली कोयला क्षेत्र लिग्नाइट कोयला के लिए विश्व प्रसिद्ध है।

नेवेली कोयला क्षेत्र के कारण ही दक्षिण भारत में उद्योगों को बहुत प्रोत्साहन मिला है।

सन् 1956 में नेवली लिग्नाइट निगम द्वारा यहाँ का लिग्नाइट खनन शुरू किया गया है।

जम्मू कश्मीर में कालाकोट से लिग्नाइट प्राप्त होता है।

प्राकृतिक गैस

➤ प्राकृतिक गैस सामान्यतः तेल के कुँओं से प्राप्त होती है।

➤ जब कभी तेल के लिए कुआँ खोदा जाता है तो तेल से पहले गैस प्राप्त होती है क्योंकि तेल की अपेक्षा गैस हल्की होती है।

➤ 1997 में अंडमान क्षेत्र में 1700 अरब घन फूट गैस की खोज की गई। यह आने वाले 30 वर्षों में देश की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

➤ 2002 में रिलायंस कम्पनी ने कृष्णा-गोदावरी अपतटीय बेसिन में देश के अब तक के बड़े गैस भंडारों की खोज की।

➤ यहाँ 14 खरब घन फूट गैस होने का अनुमान है।

➤ 2003 में राजस्थान के बाड़मेर गैस की खोज।

➤ 2004 में रिलायंस ने ओडिशा के तट पर गैस की खोज की।

➤ 2005 में ONGC ने कृष्णा-गोदावरी के उथले जल में गैस ढूंढ निकाली। यह अमालपुरम तट से 12 किमी० दूरी पर है।

➤ मुम्बई हाई भारत का सबसे बड़ा गैस उत्पादक है और देश की लगभग तीन-चौथाई (71%) प्राकृतिक गैस पैदा करता है।

➤ वर्तमान में गैस के प्रक्रमण, परिवहन तथा वितरण की दृष्टि से भारत की सबसे बड़ी कंपनी GAIL (गैस ऑथोरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड) है।

↳  इसके पास 5200 किमी० पाइप लाइन है।



भारत के प्रमुख खनिज संसाधन से सम्बंधित महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्नोत्तर



1. खनिज पदार्थों की दृष्टि से कौन-सा भारतीय क्षेत्र अधिक समृद्ध है?

(a) मालवा का पठार

(b) दक्कन का पठार

(c) लद्दाख का पठार

(d) छोटानागपुर का पठार

[read more] (d) छोटानागपुर का पठार [/read]

2. भारतीय खनिज पदार्थों का भण्डार गृह कहलाता है-

(a) मालवा का पठार

(b) दक्कन का पठार

(c) लद्दाख का पठार

(d) छोटानागपुर का पठार

[read more] (d) छोटानागपुर का पठार [/read]

3. निम्नलिखित में से कहाँ से उत्तम किस्म के लौह अयस्क की प्राप्ति होती है?

(a) जादूगोड़ा से

(b) बैलाडीला से

(c) लोहरदगा से

(d) अभ्रकी पहाड़ी से

[read more] (b) बैलाडीला से [/read]

4. कुद्रेमुख लौह खनिज परियोजना निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?

(a) कर्नाटक

(b) झारखण्ड

(c) छत्तीसगढ़

(d) आ० प्र०

[read more] (a) कर्नाटक [/read]

5. बैलाडीला खान से खनन किये जाने वाले लौह अयस्क को निम्नलिखित में से किस बंदरगाह से निर्यात किया जाता है?

(a) मार्मागाओ

(b) न्यू मंगलौर

(c) विशाखापत्तनम

(d) हल्दिया

[read more] (c) विशाखापत्तनम [/read]

6. कर्नाटक राज्य में स्थित बाबा बूदन की पहाड़ियाँ निम्नलिखित में से किस खनिज के उत्खनन के लिए प्रसिद्ध है?

(a) यूरेनियम

(b) लौह-अयस्क

(c) बॉक्साइट

(d) मैंगनीज

[read more] (b) लौह-अयस्क [/read]

7. भारत में सर्वाधिक लोहा पैदा करने वाला राज्य है-

(a) ओडिसा

(b) झारखण्ड

(c) छत्तीसगढ़

(d) म० प्र०

[read more] (a) ओडिसा ,कर्नाटक राज्य में भारत का सबसे बड़ा लौह अयस्क भंडार है, लेकिन उड़ीसा राज्य में इसका सबसे अधिक उत्पादन होता है। [/read]

8. भारत में पाया जाने वाला अधिकांश लौह अयस्क किस प्रकार का है।

(a) हेमेटाइट

(b) मैग्नेटाइट

(c) सीडेराइट

(d) लिमोनाइट

[read more] (a) हेमेटाइट [/read]

9. जावर एवं रामपुरा-आगुचा खनन क्षेत्र किस खनिज से सम्बन्धित है।

(a) बॉक्साइट

(b) यूरेनियम

(c) सीसा-जस्ता

(d) ताँबा

[read more] (c) सीसा-जस्ता [/read]

10. भारत का सर्वाधिक जस्ता उत्पादक राज्य है-

(a) महाराष्ट्र

(b) राजस्थान

(c) झारखण्ड

(d) उड़ीसा

[read more] (b) राजस्थान [/read]

11. निम्नलिखित में से किस खनिज में भारत आत्म निर्भर नहीं है?

(a) लौह-अयस्क

(c) अभ्रक

(b) मैंगनीज

(d) ताँबा

[read more] (d) ताँबा [/read]

12. खेतड़ी किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?

(a) सोना

(c) ताँबा

(b) कोयला

(d) लौह अयस्क

[read more] (c) ताँबा [/read]

13. भारत में बॉक्साइट का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन है?

(a) केरल

(b) ओडिशा

(c) मध्य प्रदेश

(त) झारखण्ड

[read more] (b) ओडिशा [/read]

14. निम्नलिखित में से कौन बॉक्साइट का एक प्रमुख खान है?

(a) जावर

(b) खेतड़ी

(c) लोहरदगा

(d) कलील

[read more] (c) लोहरदगा [/read]

15. पलामू एवं लोहरदगा निम्नलिखित में से किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?

(a) ताँबा

(b) बॉक्साइट

(c) लौह अयस्क

(d) मैंगनीज

[read more] (b) बॉक्साइट [/read]

16. जिप्सम प्रचुर मात्रा में कहाँ उपलब्ध है?

(a) बिहार

(b) गुजरात

(c) मध्य प्रदेश

(d) राजस्थान

[read more] (d) राजस्थान [/read]

17. भारत का लगभग 55% अभ्रक उत्पादित करता है

(a) मध्य प्रदेश

(b) ओडिशा

(c) झारखण्ड

(d) प० बंगाल

[read more] (c) झारखण्ड [/read]

18. कोडरमा किस खनिज के उत्खनन के लिए प्रसिद्ध है?

(a) ताँबा

(b) लौह अयस्क

(c) बॉक्साइट

(d) अभ्रक

[read more] (d) अभ्रक [/read]

19. अभ्रक के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

(a) प्रथम

(b) द्वितीय

(c) तृतीय

(d) चतुर्थ

[read more] (a) प्रथम [/read]

20. भारत में सर्वोत्तम श्रेणी का संगमरमर किस स्थान में पाया जाता है?

(a) जबलपुर

(b) भरतपुर

(c) मकराना

(d) जैसलमेर

[read more] (c) मकराना [/read]

21. गुजरात में वडोदरा क्षेत्र की मोतीपुरा खान से कौन-सा पत्थर निकाला जाता है?

(a) लाल संगमरमर

(b) काला संगमरमर

(c) सफेद संगमरमर

(d) इनमें से सभी

[read more] (c) सफेद संगमरमर [/read]

22. भारत में सर्वाधिक हीरा निम्न में से किस स्थान से निकाला जाता है?

(a) पन्ना (मध्य प्रदेश)

(b) गोलकुण्डा (कर्नाटक)

(c) जयपुर (राजस्थान)

(d) क्विलोन (केरल)

[read more] (a) पन्ना (मध्य प्रदेश) [/read]

23. निम्नलिखित में से सोने की सर्वाधिक मात्रा उत्पादित करने वाला राज्य कौन-सा है?

(a) कर्नाटक

(b) आ० प्र०

(c) झारखण्ड

(d) छत्तीसगढ़

[read more] (a) कर्नाटक [/read]

24. कोलार स्वर्ण खदान निम्न में से किस राज्य में स्थित है?

(a) कर्नाटक

(b) आ० प्र०

(c) महाराष्ट्र

(d) म० प्र०

[read more] (a) कर्नाटक [/read]

25. भारत में स्वर्ण कहाँ पाया जाता है?

(a) कोलार (कर्नाटक)

(b) खेतड़ी (राजस्थान)

(c) पन्ना (मध्य प्रदेश)

(d) मोतीपुरा (गुजरात)

[read more] (a) कोलार (कर्नाटक) [/read]

26. निम्नलिखित में से कौन-सा एक राज्य भारत में अभ्रक का सबसे प्रमुख उत्पादक है?

(a) झारखण्ड

(b) कर्नाटक

(c) राजस्थान

(d) म० प्र०

[read more] (a) झारखण्ड [/read]

27. निम्नलिखित में से किस आण्विक खनिज के संचित भण्डार की दृष्टि से भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है?

(a) यूरेनियम

(b) थोरियम

(c) ग्रेफाइट

(d) एण्टीमनी

[read more] (b) थोरियम [/read]

28. टंगस्टन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध डेगाना खान किस राज्य में स्थित है?

(a) झारखण्ड

(b) ओडिशा

(c) राजस्थान

(d) छत्तीसगढ़

[read more] (c) राजस्थान, डेगाना (राजस्थान) में एक मात्र टंगस्टन की खान स्थित है। [/read]

29. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिये गये कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (कोयला क्षेत्र)  सूची-II (संबंधित राज्य)

A. कर्णपुरा 1. झारखण्ड

B. सिंगरौली 2. मध्य प्रदेश

C. सिंगरेनी 3. तेलंगाना

D. कोरबा 4. छत्तीसगढ़

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4 

(b) 1 4 3 2

(c) 2 1 4 3

(d) 2 1 3 4

[read more] (a) 1 2 3 4  [/read]

30. कोयले का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य है-

(a) प० बंगाल

(b) झारखण्ड

(c) उड़ीसा

(d) छत्तीसगढ़

[read more] (d) छत्तीसगढ़, पिछले कुछ वर्षों से छत्तीसगढ़  देश का सबसे बड़ा कोयला उत्पादक राज्य बन गया है। इससे पहले झारखंड कई दशकों से देश का अग्रणी कोयला उत्पादक राज्य था।  [/read]

31. झरिया किस खनिज उत्पादन के लिए भारत में प्रसिद्ध है?

(a) लोहा

(b) कोयला

(c) अभ्रक

(d) ताँबा

[read more] (b) कोयला [/read]

32. भारत में मिलने वाला अधिकांश कोयला किस भू-भाग में निक्षेपित हुआ है ?

(a) धारवाड़

(b) गोंडवाना

(c) आर्कियन

(d) टर्शियरी

[read more] (b) गोंडवाना [/read]

33. भारत में सर्वप्रथम 1774 ई० में कोयला का उत्खनन किस स्थान पर किया गया?

(a) झरिया

(b) रानीगंज

(c) गिरिडीह

(d) कर्णपुरा

[read more] (b) रानीगंज [/read]

34. न्येवेली में खनन किया जाने वाला प्रमुख खनिज है-

(a) लिग्नाइट

(b) यूरेनियम

(c) सीसा-जस्ता

(d) बॉक्साइट

[read more] (a) लिग्नाइट [/read]

35. भारत में सबसे अधिक कोयले के भण्डार हैं-

(a) गोदावरी की घाटी में

(c) गंगा की घाटी में

(b) सतपुड़ा की घाटी में

(d) दामोदर की घाटी में

[read more] (d) दामोदर की घाटी में [/read]

36. झरिया कोयला क्षेत्र किस राज्य में अवस्थित है?

(a) छत्तीसगढ़

(b) झारखण्ड

(c) ओडिशा

(d) असम

[read more] (b) झारखण्ड [/read]

37. निम्नलिखित कोयला क्षेत्रों में किसके कोयला भण्डार सर्वाधिक हैं?

(a) झरिया

(b) रानीगंज

(c) कोरबा

(d) सिंगरौली

[read more] (a) झरिया [/read]

38. भारत में सर्वाधिक कोयला भण्डार पाये जाते हैं-

(a) छत्तीसगढ़

(b) झारखण्ड

(c) म० प्र०

(d) उड़ीसा

[read more] (b) झारखण्ड [/read]

39. भारत में अंकलेश्वर किसके उत्पादन के लिए जाना जाता है?

(a) कोयला

(c) लौह-अयस्क

(b) यूरेनियम

(d) पेट्रोलियम

[read more] (d) पेट्रोलियम [/read]

40. निम्नलिखित में से किस नदी घाटी को ‘भारत का रूर’ कहा जाता है?

(a) गोदावरी घाटी

(b) महानदी घाटी

(c) दामोदर घाटी

(d) नर्मदा घाटी

[read more] (c) दामोदर घाटी [/read]

41. संचित भण्डार एवं उत्पादन की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा कोयला

क्षेत्र है-

(a) दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र

(b) महानदी घाटी कोयला क्षेत्र

(c) गोदावरी घाटी कोयला क्षेत्र

(d) राजमहल कोयला क्षेत्र

[read more] (a) दामोदर घाटी कोयला क्षेत्र [/read]

42. निम्नलिखित में कौन-सा कथन असत्य है?

(a) एन्थ्रासाइट कोयला सर्वोत्तम किस्म का कोयला है।

(b) भारत में पाया जाने वाला अधिकांश कोयला बिटुमिनस प्रकार का है।

(c) जम्मू-कश्मीर में एन्थ्रासाइट कोयला पाया जाता है।

(d) भारत में कोयला का संचित भण्डार मुख्यतः 78° पूर्वी देशान्तर के पश्चिम में पाया जाता है।

[read more] (d) भारत में कोयला का संचित भण्डार मुख्यतः 78° पूर्वी देशान्तर के पश्चिम में पाया जाता है। [/read]

43. भारत में खनिज तेल के भण्डार मुख्यतः किस प्रकार की चट्टानों में पाये जाते हैं?

(a) आग्नेय

(b) अवसादी

(c) कायान्तरित

(d) इनमें से सभी

[read more] (b) अवसादी [/read]

44. भारत में खनिज तेल का उत्पादन सर्वप्रथम प्रारम्भ किया गया था-

(a) मुम्बई हाई में

(c) नहरकटिया में

(b) अंकलेश्वर में

(d) डिग्बोई में

[read more] (d) डिग्बोई में [/read]

45. तेल एवं प्राकृतिक गैस आयोग (ONGC) की स्थापना कब हुई?

(a) 1856 ई०

(b) 1914 ई०

(c) 1936 ई०

(d) 1956 ई०

[read more] (d) 1956 ई० [/read]

46. काइकालूर खनिज तेल क्षेत्र किस नदी घाटी क्षेत्र में स्थित है?

(a) कृष्णा- गोदावरी

(b) नर्मदा- तापी

(c) गंगा- ब्रह्मपुत्र

(d) कृष्णा- कावेरी

[read more] (a) कृष्णा- गोदावरी [/read]

47. निम्नलिखित में कौन-सा खनिज तेल क्षेत्र गुजरात राज्य में स्थित नहीं है?

(a) अंकलेश्वर

(b) कलोल

(c) मेहसाना

(d) बदरपुर

[read more] (d) बदरपुर [/read]

48. निम्नलिखित में कौन-सा कथन सत्य है?

(a) खनिज तेल मुख्यतः परतदार चट्टानों में पाया जाता है।

(b) मुम्बई हाई भारत का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है।

(c) भारत के मूल पेट्रोलियम उत्पादन का लगभग दो तिहाई अपतटीय क्षेत्रों से प्राप्त होता है।

(d) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं।

[read more] (d) उपर्युक्त सभी कथन सत्य हैं। [/read]

49. ‘मंगला’ नामक तेल कुआँ किस राज्य में स्थित है?

(a) असम

(b) गुजरात

(c) राजस्थान

(d) महाराष्ट्र

[read more] (c) राजस्थान [/read]

50. गुजरात का सर्वाधिक महत्वपूर्ण तेल क्षेत्र है-

(a) अंकलेश्वर

(b) लुनेज

(c) कलोल

(d) मेहसाना

[read more] (a) अंकलेश्वर [/read]

51. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (खनिज पदार्थ)    सूची-II (खनिज क्षेत्र)

A. ग्रेफाइट   1. बेलारी

B. सीसा      2. डीडवाना

C. लवण      3. रम्पा

D. चाँदी      4. जावर

कूट: A B C D

(a) 3 4 2 1

(b) 1 4 2 3

(c) 3 1 4 2

(d) 2 3 1 4

[read more] (a) 3 4 2 1 [/read]

52. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-

सूची-I      सूची-II

A. मैंगनीज   1. ओडिसा

B. एस्बेस्टस 2. मध्य प्रदेश

C. निकेल   3. राजस्थान

D. जस्ता   4. आन्ध्र प्रदेश

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4 

(b) 4 3 2 1

(c) 3 4 1 2

(d) 2 4 1 3

[read more] (d) 2 4 1 3 [/read]

53. निम्नलिखित को सुमेलित कीजिए-

सूची-I  सूची-II

A. मैंगनीज  1. बालाघाट

B. लौह-अयस्क 2. बस्तर

C. बॉक्साइट 3. माण्डला

D.कोयला  4. शहडोल

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 3 4 1

(c) 3 4 1 2

(d) 4 1 2 3

[read more] (a) 1 2 3 1 [/read]

54. सूची-I (खनिज) को सूची-II (स्थान) के साथ सुमेलित कीजिए और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए

सूची-I (खनिज)     सूची-II (स्थान)

A. कोयला   1. गिरिडीह

B. ताँबा   2. जायकोंडम

C. मैंगनीज 3. अलवर

D. लिग्नाइट 4. धारवाड़

कूट: A B C D

(a)  1 4 3 2

(b)  2 3 4 1

(c)  1 3 4 2

(d) 2 4 3 1

[read more] (c) 1 3 4 2 [/read]

55. विश्व का सर्वोत्तम किस्म का अभ्रक प्राप्त होता है-

(a) धनबाद से

(b) हजारीबाग से

(c) झरिया से

(d) कुल्टी से

[read more] (b) हजारीबाग से [/read]

56. भारत में ताम्र-स्वर्ण-लौह-कोयला निम्नलिखित में से किस वर्ग के स्थानों से क्रमबद्ध है?

(a) क्षेत्री-कोलर-कुद्रेमुख झरिया

(b) कोलार-क्षेत्री-कुद्रेमुख-झरिया

(c) झरिया-कोलार-कुद्रेमुख-क्षेत्री

(d) क्षेत्री-कुद्रेमुख-कोलार-झरिया

[read more] (a) क्षेत्री-कोलर-कुद्रेमुख झरिया [/read]

57. बिहार में सूची-I (खनिजों) को सूची-II (प्राप्ति स्थानों) से सह-सम्बन्धित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-

सूची-I (खनिज)       सूची-II (प्राप्ति स्थान)

A. अभ्रक     1. मुंगेर

B. स्वर्ण       2. गया

C. डोलोमाइट 3. किशनगंज

D. पेट्रोलियम 4. रोहतास

कूट: A B C D

(a) 3 4 1 2

(b) 1 2 3 4

(c) 2 1 4 3

(d) 4 3 2 1

[read more] (c) 2 1 4 3 [/read]

58. भारत की सबसे महत्वपूर्ण यूरेनियम खान कहाँ स्थित है?

(a) मनावलकुरिची

(c) वाशी

(b) गौरीविदनूर

(d) जादूगोड़ा

[read more] (d) जादूगोड़ा [/read]

59. भारत के किस राज्य में अनुमानतः कोयले के विशालतम सुरक्षित भण्डार उपलब्ध हैं?

(a) आन्ध्र प्रदेश

(b) झारखण्ड

(c) मध्य प्रदेश

(d) ओडिसा

[read more] (b) झारखण्ड [/read]

60. सिंहभूम (झारखण्ड) किसके लिए प्रसिद्ध है? 

(a) कोयला

(b) लोहा

(c) ताँबा

(d) ऐलुमिनियम

[read more] (c) ताँबा [/read]

61. निम्नलिखित में से भारत का वह राज्य कौन-सा है जो गंधक (सल्फर) के उत्पादन में आगे हैं?

(a) असम

(b) महाराष्ट्र

(c) पंजाब

(d) तमिलनाडु

[read more] (b) महाराष्ट्र [/read]

62. झरिया कोयला की खानें देश के किस राज्य में है?

(a) आन्ध्र प्रदेश

(b) पश्चिम बंगाल

(c) झारखण्ड

(d) उड़ीसा

[read more] (c) झारखण्ड [/read]

63. बैलाडिला किसके लिए प्रसिद्ध है?

(a) बॉक्साइट

(b) लौह-अयस्क

(c) ताँबा

(d) कोयला

[read more] (b) लौह-अयस्क [/read]

64. कौन-सा भारतीय राज्य कोयले की बड़ी-बड़ी खानों के लिए मशहूर है?

(a) झारखण्ड

(b) आ० प्र०

(c) कर्नाटक

(d) बिहार

[read more] (a) झारखण्ड [/read]

65. खेतड़ी किसके लिए प्रसिद्ध है?

(a) सोना

(b) ताँबा

(c) ऐलुमिनियम

(d) उर्वरक

[read more] (b) ताँबा [/read]

66. निम्न में से कौन-सा राज्य प्रमुख कोयला उत्पादक नहीं है?

(a) छत्तीसगढ़

(b) प० बंगाल

(c) महाराष्ट्र

(d) राजस्थान

[read more] (d) राजस्थान [/read]

67. भात में यूरेनियम खदान कहाँ स्थित है?

(a) अल्वाय

(b) जादूगोड़ा

(c) खेतड़ी

(d) सिंहभूम

[read more] (b) जादूगोड़ा [/read]

68. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए-

सूची-I          सूची-II

A. कोयला   1. हजारीबाग

B. लोहा      2. न्येवेली

C. लिग्नाइट 3. राउकेला

D. अभ्रक    4. झरिया

कूट:

(a) 2 1 4 3

(b) 4 3 2 1

(c) 4 2 3 1

(d) 3 2 4 1

[read more] (b) 4 3 2 1 [/read]

69. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए-

सूची-I         सूची-II

A. लिग्नाइट   1. ताँबा

B. बॉक्साइट  2. लोहा

C. मैग्नेटाइट   3. ऐलुमिनियम

D. पायराइट   4. कोयला 

कूट : A B C D

(a)  4 3 1 2

(b) 2 3 1 4

(c) 4 3 2 1

(d) 4 1 3 2

[read more] (c) 4 3 2 1 [/read]

15. Energy Resources of India (भारत के ऊर्जा संसाधन)

15. Energy Resources of India

(भारत के ऊर्जा संसाधन)



Energy Resources of India

1. निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा के गैर परम्परागत स्रोत (Non- Conventional) की श्रेणी में आता है?

(a) कोयला

(b) पेट्रोलियम

(c) प्राकृतिक गैस

(d) बायो गैस

[read more] (d) बायो गैस [/read]

2. निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा का परम्परागत स्रोत नहीं है?

(a) प्राकृतिक गैस

(b) कोयला

(c) खनिज तेल

(d) भूतापीय ऊर्जा

[read more] (d) भूतापीय ऊर्जा [/read]

3. निम्नलिखित में से किस प्रकार की ऊर्जा से सबसे कम वायु प्रदूषण होता है?

(a) तापीय ऊर्जा

(b) जलीय ऊर्जा

(c) नाभिकीय ऊर्जा

(d) सौर ऊर्जा

[read more] (d) सौर ऊर्जा [/read]

4. भारत में ऊर्जा उत्पादन में सर्वाधिक भागीदारी है-

(a) जल-विद्युत्

(b) ताप-विद्युत्

(c) परमाणु विद्युत्

(d) सौर ऊर्जा

[read more] (b) ताप-विद्युत् [/read]

5. भारत की पहली लहर ऊर्जा परियोजना निम्न में से किस स्थान पर स्थापित की गई है?

(a) कांडला

(b) बिझिनजाम

(c) कारवाड़

(d) धारवाड़

[read more] (b) बिझिनजाम [/read]

6. चेन्नई के समीप कलपक्कम नामक स्थान पर निम्न में से किसकी स्थापना की गई है?

(a) अखबारी कागज संयंत्र

(b) लिग्नाइट कारखाना

(c) नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र

(d) तेलशोधन संयंत्र

[read more] (c) नाभिकीय ऊर्जा संयंत्र [/read]

7. काकरापारा परमाणु शक्ति केन्द्र निम्नांकित में से किस राज्य में है?

(a) कर्नाटक

(b) गुजरात

(c) तमिलनाडु

(d) महाराष्ट्र

[read more] (b) गुजरात [/read]

8. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए-

सूची-I       सूची-II

A. तारापुर परमाणु शक्ति केन्द्र 1. कर्नाटक

B. रावतभाटा परमाणु शक्ति केन्द्र 2. गुजरात

C. काकरापार परमाणु शक्ति केन्द्र 3. राजस्थान

D. कैगा परमाणु शक्ति केन्द्र 4. महाराष्ट्र

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 3 4 1 2

(c) 4 3 2 1

(d) 2 1 4 3

[read more] (c) 4 3 2 1 [/read]

9. कैगा में होता है-

(a) पोटैशियम निष्कर्षण

(b) नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन

(c) जल-विद्युत उत्पादन

(d) कोयला उत्खनन

[read more] (b) नाभिकीय ऊर्जा उत्पादन [/read]

10. भारत का प्रथम परमाणु ऊर्जा उत्पादन केन्द्र है-

(a) नरौरा (उत्तर प्रदेश)

(b) तारापुर (महाराष्ट्र)

(c) कलपक्कम (तमिलनाडु)

(d) काकरापार (गुजरात)

[read more] (b) तारापुर (महाराष्ट्र) [/read]

11. सुमेलित कीजिए-

सूची-I (परमाणु ऊर्जा केन्द्र)  सूची-II (राज्य)

A. कलपक्कम 1. तमिलनाडु

B. काकरापार 2. कर्नाटक

C. कैगा 3. गुजरात

D. रावतभाटा 4. राजस्थान

कूट: A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 1 3 4

(c) 1 3 2 4

(d) 1 2 4 3

[read more] (c) 1 3 2 4 [/read]

12. भारत में भूतापीय ऊर्जा का संयंत्र कहाँ स्थापित किया गया है?

(a) अंडमान-निकोबार के मूस प्वाइण्ट में

(b) राजस्थान के धौल में

(c) हि० प्र० के मणिकर्ण में

(d) हरियाणा के सोनीपत में

[read more] (c) हि० प्र० के मणिकर्ण में [/read]

13. देश में कुल विद्युत् उत्पादन में ताप-विद्युत् का योगदान है-

(a) 60%

(b) 70%

(c) 75%

(d) 85%

[read more] (c) 75% [/read]

14. तालचर एवं इन्नौर उल्लेखनीय है

(a) परमाणु शक्ति संयंत्रों हेतु

(b) जल-विद्युत् शक्ति संयंत्रों हेतु

(c) भू-तापीय शक्ति संयंत्रों हेतु

(d) तापीय शक्ति संयंत्रों हेतु

[read more] (d) तापीय शक्ति संयंत्रों हेतु [/read]

15. राष्ट्रीय ताप-विद्युत् निगम (N.T.P.C) की निम्नलिखित केन्द्रों एवं सम्बन्धित राज्यों को सुमेलित करें-

सूची-I        सूची-II

A. सिंगरौली 1. छत्तीसगढ़

B. कोरबा 2. तेलंगाना

C. रामागुण्डम 3. बिहार

D. कहलगाँव 4. उत्तर प्रदेश

कूट : A B C D

(a) 1 2 3 4

(b) 2 1 3 4

(c) 4 1 2 3

(d) 1 4 3 2

[read more] (c) 4 1 2 3, सिंगरौली ताप विद्युत परियोजना मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सीमा के पास स्थित है, लेकिन मुख्यतः इसे उत्तर प्रदेश से जोड़ा जाता है। [/read]

16. निम्नलिखित ताप विद्यत् केन्द्रों एवं संबंधित राज्यों में कौन सुमेलित नहीं है ?

(a) ओबरा- उत्तर प्रदेश

(b) विन्ध्याचल- मध्य प्रदेश

(c) तालचर- उड़ीसा

(d) कोरबा- मध्य प्रदेश

[read more] (d) कोरबा- मध्य प्रदेश [/read]

17. भारत की प्रथम जल विद्युत् परियोजना है

(a) कृष्णा नदी पर शिवसमुद्रम परियोजना

(b) शरावती नदी पर महात्मा गाँधी परियोजना

(c) कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम परियोजना

(d) सतलज नदी पर भाखड़ा नांगल परियोजना

[read more] (c) कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम परियोजना [/read]

18. चूखा जल-विद्युत् परियोजना जो कि भारत एवं भूटान की संयुक्त परियोजना है, किस नदी पर स्थित है?

(a) मानस नदी

(b) तिस्ता नदी

(c) वांग्चू नदी

(d) महाकाली नदी

[read more] (c) वांग्चू नदी [/read]

19. महात्मा गाँधी जल-विद्युत् परियोजना स्थित है-

(a) कर्नाटक में कावेरी नदी पर

(b) कर्नाटक में तुंगभद्रा नदी पर

(c) कर्नाटक में शरावती नदी पर

(d) कर्नाटक में कृष्णा नदी पर

[read more] (c) कर्नाटक में शरावती नदी पर [/read]

20. दुलहस्ती जल-विद्युत् परियोजना स्थित है-

(a) जम्मू-कश्मीर में झेलम नदी पर

(b) जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर

(c) हिमाचल प्रदेश में सतलज नदी पर

(d) हिमाचल प्रदेश में व्यास नदी पर

[read more] (b) जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर [/read]

21. लोकटक शक्ति परियोजना निम्नलिखित में से किस राज्य में स्थित है?

(a) प० बंगाल

(b) केरल

(c) मेघालय

(d) मणिपुर

[read more] (d) मणिपुर [/read]

22. भारत तथा एशिया की एकमात्र अधोभौमिक संजय जल-विद्युत् परियोजना निम्न में से किस राज्य में स्थित है ?

(a) अरुणाचल प्रदेश

(b) हिमाचल प्रदेश

(c) उत्तर प्रदेश

(d) आन्ध्र प्रदेश

[read more] (b) हिमाचल प्रदेश [/read]

23. भारत की कुल ऊर्जा खपत में निम्नलिखित साधनों के योगदान के आधार पर इनका सही अवरोही क्रम है-

(a) कोयला, पेट्रोलियम, जल-विद्युत्, प्राकृतिक गैस

(b) कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत्

(c) पेट्रोलियम, कोयला, प्राकृतिक गैस, जल-विद्युत्

(d) पेट्रोलियम, कोयला, जल-विद्युत्, प्राकृतिक गैस

[read more] (a) कोयला, पेट्रोलियम, जल-विद्युत्, प्राकृतिक गैस [/read]

24. पवन ऊर्जा के उत्पादन में भारत का विश्व में कौन-सा स्थान है?

(a) दूसरा

(b) तीसरा

(c) चौथा

(d) पाँचवाँ

[read more] (c) चौथा [/read]

25. भारत में प्रथम जल-विद्युत् शक्ति गृह की स्थापना 1898 ई० में कहाँ की गई थी?

(a) शिवसमुद्रम

(b) दार्जिलिंग

(c) मोहरा

(d) खोपोली

[read more] (b) दार्जिलिंग, पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग के  सिद्रापोग में [/read]

26. एशिया की पहली भूमिगत जल-विद्युत् परियोजना भारत के निम्नलिखित राज्यों में से किसमें स्थित है?

(a) जम्मू और कश्मीर

(b) हिमाचल प्रदेश

(c) अरुणाचल प्रदेश

(d) उत्तर प्रदेश

[read more] (b) हिमाचल प्रदेश [/read]

27. भारत में विद्युत् आपूर्ति सबसे पहले कहाँ शुरू हुई?

(a) कोलकाता

(b) दार्जिलिंग

(c) मुम्बई

(d) चेन्नई

[read more] (b) दार्जिलिंग [/read]

28. ताप-विद्युत् परियोजनाओं के सन्दर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा सही है?

(a) कोरबा-उत्तर प्रदेश

(b) रामागुंडम-तमिलनाडु

(c) तलचर-आन्ध्र प्रदेश

(d) कावास-गुजरात

[read more] (d) कावास-गुजरात [/read]

29. ओबरा शहर प्रसिद्ध है-

(a) तेलशोधक कारखाने के लिए

(b) थर्मल पावर प्लाण्ट के लिए

(c) स्टील उद्योग के लिए

(d) ऐलुमिनियम प्लाण्ट के लिए

[read more] (b) थर्मल पावर प्लाण्ट के लिए [/read]

30. द्वितीय जल-विद्युत् शक्ति केन्द्र कहाँ प स्थापित किया गया था?

(a) चम्बल

(b) दामोद

(c) मण्डी

(d) शिवसमुद्रम

[read more] (d) शिवसमुद्रम, 1902 में कर्नाटक के शिवसमुद्रम मे कावेरी नदी के तट पर 130 किलोवाट क्षमता का दूसरा जल विद्युत गृह बनाया गया। [/read]

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